अमित चतुर्वेदी-
नासा का हब्बल टेलिस्कोप दो साल पहले तक सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप था, लेकिन दो साल पहले नासा ने जेम्स वेब नाम से हब्बल से भी शक्तिशाली टेलिस्कोप बनाकर अंतरिक्ष में छोड़ा है जो ब्रह्मांड के तमाम तस्वीरों को भेजता रहता है।
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये भी जेम्स वेब ने खींची है। इस तस्वीर में जो संरचना दिख रही है, इसका नाम है “दी बॉस”। ये “दी बॉस” नाम की गैलेक्सीज़ की सीरीज़ में 830 गैलेक्सीज़ हैं, और इनकी हमसे दूरी है, 1 बिलियन लाइट ईयर यानी 100 करोड़ प्रकाश वर्ष।
इसका मतलब ये हुआ कि जो नासा के जेम्स वेब नाम के टेलिस्कोप ने इस “बॉस” नाम की गैलेक्सीज़ की संरचना की तस्वीर खींची वो आज से 100 करोड़ साल पहले की तस्वीर है। हो सकता है, हो सकता है नहीं बल्कि एकदम तय है कि आज ये संरचना हो ही नहीं, या इसका रूप पूरी तरह परिवर्तित हो चुका हो।
ब्रह्मांड की ये विशालता हमारे समझ और हमारे समय, दूरी या सापेक्षता के पैमानों के द्वारा नापने लायक ही नहीं, क्यूंकि हम प्रकाशवर्षों की दूरी पर स्थित जो भी चीज़ें देख पा रहे हैं वो उनकी दूरी के बराबर प्रकाश वर्षों पुरानी भी है।
यानि, अगर हम कोई चीज़ आज समझ भी लेते हैं या डिस्कवर कर भी लेते हैं तो वो इतनी ही पुरानी होती हैं जितनी वो दूर होती हैं।
इसका मतलब ये हुआ कि हम ब्रह्मांड को जितना भी जानेंगे वो ब्रह्मांड के अतीत के बारे में जानेंगे। ये सेंटेंस भी कितना अजीब है न, कि भविष्य में हम जितनी भी चीज़ें जानेगे उतनी ही अतीत के बारे में जानेंगे।
ये ब्रह्मांड की विशालता जितनी रहस्यमयी उसे जानने के पहले है उससे ज़्यादा रहस्यमयी उसे जानने के क्रम में बढ़ती ही जाती है। एक आम मनुष्य का एवरेज लाइफ स्पैन 80 वर्ष का होता है जिसमें उसकी चैतन्यता का ब्रैकेट भी लगभग 50 वर्ष का होता है। इन 50 वर्षों में उसके पास घर परिवार दुनियादारी के मसलों से जूझने के बाद बहुत थोड़ा सा समय बचता है।
शायद ईश्वर ने, सर्व शक्तिमान ने जो शायद ये ब्रह्मांड ही है, उसने हमें बनाया ही इतना तुच्छ है कि हम इस विराट ब्रह्मांड के ओर छोर को जान ही न पायें।
विषय इतना विराट है कि जितना इसे जानेंगे उतना अपने आपको अज्ञानी मानेंगे, इसीलिए ज़्यादा न जानने में ही भलाई है…


