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मुकेश हत्याकांड : देशी मीडिया का जमीर भले न जागा हो विदेशी मीडिया ने भारत के हालात पर चिंता जताई है!

त्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या भारतीय मीडिया का जमीर जगाने में भले ही नाकामयाब रही हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान जरूर खींचा है। उनकी हत्या के बाद विभिन्न मीडिया संगठनों ने पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की है।

मुकेश चंद्राकर एक स्वतंत्र पत्रकार थे, जो बस्तर क्षेत्र में सक्रिय थे और अपने यूट्यूब चैनल ‘बस्तर जंक्शन’ के माध्यम से रिपोर्टिंग करते थे। उनकी हत्या के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने 11 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

बीबीसी ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या को छोटे शहरों में रिपोर्टिंग के खतरों से जोड़ा है।

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ ने उनकी हत्या को भ्रष्टाचार उजागर करने के प्रयासों से संबंधित बताया है।

‘द गार्जियन’ ने भारतीय प्रेस संगठनों द्वारा इस हत्या की जांच की मांग पर प्रकाश डाला है।

‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ ने इस घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बढ़ती मांगों की रिपोर्ट की है।

‘अल जज़ीरा’ ने भारतीय मीडिया संगठनों द्वारा इस हत्या की जांच की मांग की खबर दी है।

पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता के मुद्दों पर अमेरिका में सक्रिय संगठनों ने चिंता व्यक्त की है।

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (CPJ) ने भारत में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जिसमें आगामी चुनावों के दौरान संभावित खतरों और उनसे निपटने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है।

इसके अतिरिक्त, ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर खतरे की बात कही है, जहां पत्रकारों और ऑनलाइन आलोचकों को सरकारी तंत्र द्वारा निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

इन रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि मुकेश चंद्राकर की हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के मुद्दों को उजागर किया है।

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