दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ को लेकर भड़ास पर एक खबर प्रकाशित हुई थी। इस खबर में बताया गया था कि सरकार मौतों के आंकड़े छुपा रही है।
अब इसी प्रकरण पर न्यूजलॉन्ड्री ने एक रिपोर्ट की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतकों के परिजनों का मुंह बंद करने के लिए घटनास्थल पर कैश भी बांटा गया। यह खुलासा बेहद शर्मनाक है।
सोचिए टीवी अखबार वाले आपको क्या दिखा रहे और क्या छुपा रहे है। आज यदि मीडिया का डिजिटल माध्यम न हो तो आपको पता ही न चले कि- “देश बीती रात को ही बिक चुका है।”
नीचे इस मामले पर कुछ प्रतिक्रियाएं और वीडियो देखें…
डॉ मुकेश कुमार-
भगदड़ में मारे गए लोगों से जुड़ी ख़बरें छिपाने के लिए सरकार किस हद तक चली गई इसका उदाहरण है ये।
मृतकों के परिजनों को जल्दबाजी में कैश बांटा गया ताकि वे अपना मुंह बंद रखें।
सवाल ये है कि ये पैसा कहां से आया, किसने दिया?
नंदलाल शर्मा-
गजब की अंधेर गर्दी मची है… रेलवे अधिकारियों ने 16 फरवरी को भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को पैसा बांटने के लिए भोरे-भोरे 1.8 करोड़ रुपया कहां से जुगाड़ किया…
क्या भाजपा कार्यालय में कैश रखा है? क्या भाजपाई में घर में कैश रखे हुए हैं? या सुबह के चार बजे कोई बैंक खुलवा दिया गया… फिर रेलवे वालों ने टिकट का पैसा ही कैश में बांट दिया…
ये सबकुछ एक सरकार, एक नेता और एक पार्टी को बचाने के लिए किया गया है। न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट है कि रेलवे अधिकारियों ने दिल्ली के तीन अस्पतालों के बाहर खड़े होकर भोरे-भोरे 1.8 करोड़ रुपया 18 परिवारों को बांटा…
सोच के देखिए कि मोदी को बचाने के लिए संस्थाएं कितना नीचे गिर गई हैं। जिन लोगों को पैसा मिला उन्होंने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने ये सबकुछ इसलिए किया क्यों कि मामले को जल्दी से रफा दफा करना था…
पैसा मिलने के बाद लोग मुंह बंद करके अपने घर चले गए… कुंभ की भदगड़ से महामानव ने क्या सबक सीखा है… ये देश अब गुलाम हो चुका है। कुछ नहीं हो सकता…
अजीत अंजुम-
ऐसे डिजिटल मीडिया संस्थान न हों तो आपको कई बार पता भी नहीं चलेगा कि हकीकत क्या है?
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अखबारों और न्यूजसाइटों के पत्रकारों को किसी भी घटनास्थल का निर्बाध एक्सेस मिलना चाहिए!


