उत्तर प्रदेश के सीतापुर में चार गोलियां मारकर पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी (35) की बदमाशों ने हत्या कर दी। राघवेंद्र दैनिक जागरण के सीतापुर महोली तहसील प्रभारी थे। बताया जा रहा है कि धान खरीद केंद्र का घपला उजागर करने के चलते उनकी हत्या की गई है। इसे लेकर सीतापुर समेत पूरे यूपी में आक्रोश देखा जा रहा है, खासकर मीडिया जगत में। पत्रकार हत्याकांड की खबर जागरण ने भी खुलकर छापी है। छिपाया नहीं है कुछ भी। नीचे पढ़ें वारदात को लेकर किसने क्या लिखा है…
ज्ञानेंद्र शुक्ला-
मिर्जापुर में मिड डे मील की धांधली पर लिखने, बलिया में पेपर लीक की बात उजागर करने पर पत्रकार जेल भेजे गए थे अब धान खरीद उजागर करने, स्टांप ड्यूटी का घपला खोलने पर पत्रकार को मौत के घाट उतार दिया गया!
अब तो बस यही आधिकारिक घोषणा बची है कि जो सच बोलेगा या तो जेल ठूंस दिया जाएगा या मार दिया जाएगा!
मिथलेश धर-
हिंदी अख़बारों में ऐसा कम ही होता है कि वह अपने पत्रकार के साथ हुई किसी वारदात को प्रमुखता से जगह दे। अखबार तो अपना पत्रकार तक मानने से मना कर देते हैं। पत्रकार की खबर उसके अखबार में भी नहीं छप पाती। देखकर अच्छा लगा कि जागरण ने इस खबर को प्रमुखता से जगह दी।

अभिषेक उपाध्याय-
यूपी में जिस रोज़ धान की ख़रीद में गड़बड़ी और स्टॉंप चोरी की ख़बर उजागर करने वाले पत्रकार राघवेन्द्र वाजपेयी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी जाती है,
सूबे का CM उसी रोज़ एक मीडिया हाउस को दिए अपने इंटरव्यू की संभल वाली क्लिप शेयर करके गर्वित और हर्षित हो रहा हो!!
घटनाएँ दर घटनाएँ घटती जाएँ पर ज़िम्मेदारों पर कभी कोई एक्शन न हो!!!
आप किसी को भी सीएम बना दीजिए, इससे तो बेहतर ही शासन देगा!!!
राघवेंद्र वाजपेयी एक मशाल जलाकर गए हैं और इस मशाल की परछाई में सत्ता का चेहरा संवेदनहीनता की राख सा काला और विद्रूप नज़र आ रहा है!
ममता त्रिपाठी-
खींचो न कमानों को न तलवार निकालो
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो
जिस समय संगम की तलहटी में बैठकर शब्दों के जादूगर ने यह बात लिखी थी उस समय उसे नहीं पता होगा अब क़लम लहू, आधुनिक पिस्टल और धमकियों में ज़द में है।
माफियाओं और नौकरशाही का ख़तरनाक कॉकटेल कलम को रौंदने पर आमादा है।
हत्या किसी परिवार के लिए चीख हो सकती है पर आज कुछ नौकरशाहों को पिस्टल की गूंज में संगीत सुनाई दिया होगा।
कलम जंजीरों में है, जो भी बेड़ियां तोड़ेगा उसका सीना और माथा किसी पिस्टल की गोली का इंतजार कर रहा होगा।
घोटालों को उजागर करने वाले पत्रकार को पुलिस अधिकारियों ने पहले RTI एक्टविस्ट बताया बाद में उसके संस्थान और पेशे की जानकारी दी गई।
जो खबर इस पत्रकार ने लिखी थी उसमें तहसीलदार और कई लेखपाल की नौकरी पर बन आई थी। हत्या किसने की यह भविष्य के गर्भ में है, पर हत्या उस फ्लाईओवर पर हुई जहां कोई CCTV फुटेज न मिल सके।
कुछ समय पहले भाई को खोने वाला पत्रकार आज खुद निशाने पर आ गया। बस पीछे रह गया था मानसिक संतुलन खो चुका उसका पिता, दो छोटे बच्चे और एक बदहवास पत्नी।
कभी के चंबल में और आज के यूपी में फर्क के लिए गोलियों के साए में आना होगा। बाकी देश में रामराज्य है।

मूल खबर…


