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उत्तर प्रदेश

यूपी में पत्रकारों की हत्या और गिरफ्तारी पर भारतीय प्रेस परिषद से हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की हत्या और पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही गिरफ्तारियों को लेकर भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है। भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को लिखे गए पत्र में पूर्व सदस्य अशोक कुमार नवरत्न ने प्रदेश में पत्रकारों की लगातार हो रही हत्याओं और गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक इशारों पर पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में सीतापुर में एक पत्रकार की हत्या हुई थी, और अब बाराबंकी जिले के एक तालाब में एक अन्य पत्रकार की लाश बरामद हुई है। इसके अलावा, लखीमपुर खीरी में एक पत्रकार को बिना किसी ठोस आधार के जेल भेज दिया गया, जबकि पुलिस महानिदेशक कार्यालय का स्पष्ट निर्देश है कि बिना उच्चाधिकारियों की जांच के पत्रकारों की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए।

पत्र में मांग की गई है कि भारतीय प्रेस परिषद उत्तर प्रदेश सरकार से पिछले छह महीनों में हुई पत्रकारों की हत्याओं और गिरफ्तारियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगे। साथ ही, परिषद को राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को तलब कर इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

अशोक कुमार नवरत्न, जो उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के संरक्षक और ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव हैं, ने यह भी कहा कि अगर इस मुद्दे पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

पत्रकार संगठनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थकों ने भी इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए जल्द से जल्द न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

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