

दक्षिण भारत के पूर्व सांसद जो एक ज़माने में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं, उनका असली नाम क्या है? सुब्रमण्यम/सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसा कि हिंदी मीडिया में लिखा जाता है या सुब्रमण्यन स्वामी जो उनके X अकाउंट पर लिखे गए नाम (Subramanian Swamy) का हिंदी लिप्यंतर करने पर सामने आता है?
दूसरे शब्दों में हिंदी में उनका पहला नाम लिखते समय अंत में ‘म’ लिखा जाना चाहिए या ‘न’?
आपने देखा कि हिंदी मीडिया में उनके नाम के अंत में ‘म’ लिखा जाता है जबकि अंग्रेज़ी के उनके नाम के अंत में ‘N’ है। हिंदी में छपी उनकी एक किताब ‘रामसेतु’ के कवर पर भी उनके नाम के अंत में ‘न’ ही लिखा हुआ है – सुब्रमणियन स्वामी।
अब ऐसे में सवाल उठता है कि हिंदी में उनके नाम का कौन सा रूप सही है? सुब्रमण्यम या सुब्रमण्यन/सुब्रमणियन?


कुछ लोग कह सकते हैं कि सुब्रमण्यम भी ग़लत है और सुब्रमण्यन भी क्योंकि संस्कृत में सही शब्द सुब्रमण्य नहीं, सुब्रह्मण्य है जिसका मतलब है शिव, विष्णु, कार्तिकेय आदि। NDTV हिंदी में उनका नाम सुब्रह्मण्यम ही छप रहा है। लेकिन हम फ़िलहाल इस पचड़े में नहीं पड़ेंगे क्योंकि हमारी पहली तफ़तीश इस बारे में है कि शब्द के अंत में ‘म’ है या ‘न’ है?
इसके लिए मैंने तमिल विकिपीडिया में स्वामी का पेज खोला और उनके पहले नाम (சுப்பிரமணியன்) के अंतिम वर्ण को तमिल वर्णमाला के ‘न’ और ‘म’ वर्णों से मिलाया। आप ख़ुद देख सकते हैं कि उनके पहले नाम के अंत में जो वर्ण है, वह ன (न) से हूबहू मिलता है, ம (म) से बिल्कुल नहीं मिलता। अंतिम वर्ण के ऊपर जो बिंदी है, उसका मतलब यह हुआ कि अंत में ‘न्’ है, ‘न’ नहीं है।

तो यह तय रहा कि उनके पहले नाम के अंत में ‘न्’ की ध्वनि है, ‘म्’ की नहीं है। अब चूँकि हिंदी में हलंत शब्द लिखने की परंपरा लगभग समाप्त हो गई है इसलिए हिंदी में सुब्रमण्यन लिखना ही उचित है, सुब्रमण्यन् नहीं। और सुब्रमण्यम्/सुब्रमण्यम लिखना तो बिल्कुल ही ग़लत है क्योंकि पहले नाम के अंत में ‘म्’ है ही नहीं।
अब रहा सवाल यह कि इसे सुब्रह्मण्यन लिखा जाए जो संस्कृत के हिसाब से इस नाम का शुद्ध उच्चारण है या फिर सुब्रमण्यन/सुब्रमणियन जो अंग्रेज़ी और तमिल उच्चारण के अनुसार सही होगा, तो यह संपादकीय नीति का मामला है। जिस नीति के तहत बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री का नाम हिंदी में हसीना लिखा जा रहा है, भले ही बांग्ला में हासिना लिखा जाता हो, वही नीति इस मामले में भी अपनाई जा सकती है। यानी सुब्रमण्यन की जगह सुब्रह्मण्यन भी लिख सकते हैं।
निष्कर्ष यह कि संस्कृत के हिसाब से लिखें तो सुब्रह्मण्यन सही है और तमिल/अंग्रेज़ी के हिसाब से लिखें तो सुब्रमण्यन/सुब्रमणियन सही हैं।
लेकिन वे दोनों वर्तनियाँ (सुब्रमण्यम और सुब्रह्मण्यम) तो बिल्कुल ही ग़लत हैं जो फ़िलहाल चल रही हैं और जिनके अंत में ‘म’ है।


