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जनवादी लेखक संघ की प्रेस विज्ञप्ति देखें-
यौन-उत्पीड़न की घटना की जाँच हो और लेखकों के आतिथेय के तौर पर ‘नई धारा’ इसकी ज़िम्मेदारी ले!
पटना में ‘नई धारा’ के राइटर्स रेज़िडेन्स में हुई यौन उत्पीड़न की जिस घटना का हवाला सोशल मीडिया पर बार-बार देखने को मिल रहा है, वह बेहद अफ़सोसनाक है। अगर यह सच है कि रेज़िडेन्ट कवि कृष्ण कल्पित ने, माफ़ी माँगकर या बिना माँगे, तत्काल प्रभाव से वह जगह छोड़ दी है तो यह अपने में घटना के होने का सबूत है। लेकिन साथ ही यह इस बात का भी सबूत है कि यौन-उत्पीड़न के मामले में आयोजक मेज़बान को जिस तरह का हस्तक्षेप करना चाहिए था, उसके बजाये उन्होंने मामले को रफ़ा-दफ़ा करने का रवैया अपनाया। यह सीधे-सीधे उत्पीड़क का बचाव है।
जनवादी लेखक संघ कृष्ण कल्पित की हरकत और ‘नई धारा’ के इस रवैये की कठोर निंदा करता है। हमारी स्पष्ट राय है कि ‘नई धारा’ को खुद ज़िम्मेदारी लेकर यौन-उत्पीड़न की इस घटना की जाँच करानी चाहिए थी। ऐसा न होने की स्थिति में लेखक-समुदाय की कोशिश होनी चाहिए कि इस संस्था को भी श्री कल्पित के साथ-साथ क़ानून के दायरे में लाया जाए। हम पीड़िता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि अगर वे इस मामले को क़ानूनी प्रक्रिया में ले जाना चाहें तो हम उनका साथ देने के लिए कृतसंकल्प हैं। ऐसे मामलों के जानकार किसी विधिवेत्ता से क़ानूनी सलाह लेकर इस दिशा में बढ़ा जा सकता है, लेकिन वह पूरी तरह से पीड़िता की इच्छा पर निर्भर होगा।
इस बीच जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर पीड़िता का नाम उछाला है या उनकी तस्वीर साझा कर इशारों में उनकी पहचान ज़ाहिर करने की कोशिश की है, साथ ही जिन्होंने पीड़िता को अपने तौर-तरीक़ों में सुधार लाने का उपदेश दिया है, हम उनकी भी निंदा करते हैं। ये सार्वजनिक क्षेत्र में स्त्री की स्वतंत्र उपस्थिति को हतोत्साह करने वाले क़दम हैं जो उस उपस्थिति को नापसंद करनेवालों के द्वारा ऐसे सभी मौक़ों पर उठाये जाते हैं।
संजीव कुमार (महासचिव)
बजरंग बिहारी तिवारी (संयुक्त महासचिव)
नलिन रंजन सिंह (संयुक्त महासचिव)
संदीप मील (संयुक्त महासचिव)
जन संस्कृति मंच की प्रेस विज्ञप्ति देखें –
जन संस्कृति मंच की ओर से जारी : जन संस्कृति मंच सोशल मीडिया पर चल रही इस ख़बर का संज्ञान लेता है कि नई धारा पत्रिका के राइटर्स रेजिडेंसी कार्यक्रम में कवि के रूप में बुलाए गए कृष्ण कल्पित ने पटना में एक युवा स्त्री कवि का यौन उत्पीड़न किया है।
जसम इस आपराधिक कृत्य की भर्त्सना करता है। साथ ही जसम समूचे साहित्यिक समाज से अपील करता है कि वह कठोरतम शब्दों में इस घटना की निंदा करे और अपने आयोजनों में इस व्यक्ति को शामिल होने की इजाजत न दे।
जसम ने इस घटना की पुष्टि कर ली है। सर्वाइवर के निजता के अधिकार के प्रति सजग होने के नाते जसम उनका नाम गोपनीय रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
जन संस्कृति मंच भारत में एक आधुनिक जनवादी प्रगतिशील सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में वह स्त्री विद्वेष और स्त्री विरोधी यौन हिंसा की सामाजिक स्वीकृति का हर रूप में विरोध करने के लिए कृतसंकल्प है। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में विशेष रूप से स्त्री देह के ऑब्जेक्टिफिकेशन, स्त्री की उपस्थिति के सेक्सुअलाइजेशन और स्त्री को पुरुष की उपभोग सामग्री के रूप में देखने की सामंती प्रवृत्ति को जड़मूल से मिटा देने के लिए वह निरंतर सक्रिय है।
जन संस्कृति मंच “नई धारा” से मांग करता है कि वह इस घटना की जिम्मेदारी ले और एक सार्वजनिक वक्तव्य जारी करे। इस वक्तव्य में यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि उन्होंने किस रूप में इस घटना क्रम की जांच की है, सर्वाइवर को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए हैं और सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी भयानक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जन संस्कृति मंच उन लोगों को भी चेतावनी देता है जो सोशल मीडिया पर सर्वाइवर का नाम सार्वजनिक करने, उन्हें ट्रोल करने और उनका चरित्र हनन करने में जुटे हुए हैं ताकि मॉलेस्टर के पक्ष में माहौल बनाया जा सके। जसम अभियुक्त समेत ऐसे तमाम लोगों को दंडित करने के सर्वाइवर के संघर्ष में हमेशा एकजुट रहेगा।
मनोज सिंह
महासचिव, जन संस्कृति मंच
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