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भारतीय मेडिकल शिक्षा को निगलता भ्रष्टाचार, CBI की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली। भारत की मेडिकल शिक्षा प्रणाली एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले की चपेट में आ गई है। देश की प्रमुख जांच एजेंसी CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और निजी मेडिकल कॉलेजों की मिलीभगत से जुड़े एक व्यापक घोटाले का पर्दाफाश किया है। यह खुलासा 30 जून 2025 को CBI द्वारा दर्ज की गई आपराधिक FIR के माध्यम से हुआ है, जिसमें 34 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

इस घोटाले में आरोप है कि मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के डॉक्टरों और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के पूर्व अध्यक्ष ने मिलकर निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए निरीक्षण रिपोर्टों को प्रभावित किया, नकली संकाय (proxy faculty) दिखाए और फर्जी छात्र प्रवेश दिखाकर नियामकीय प्रक्रिया को गुमराह किया।

CBI के अनुसार, रिश्वत और गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग के ज़रिये कॉलेजों को निरीक्षण रिपोर्टों और अनुमोदन प्रक्रियाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की सुविधा मिली। इनमें 7 निजी मेडिकल कॉलेजों और NMC के तीन निरीक्षकों के नाम सामने आए हैं। रायपुर के श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च से जुड़े अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए, जिनके पास से 5.5 मिलियन रुपये बरामद हुए।

NMC की साख पर सवाल
2020 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को भंग कर NMC की स्थापना की गई थी, ताकि चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता लाई जा सके। लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक NMC भी उसी तरह की विफलता का शिकार हो रही है। स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ विकाश केशरी ने कहा, “NMC एक नाकाम प्रयास साबित हो रही है, जिसकी संरचनात्मक कमज़ोरियां और अंधाधुंध विस्तार इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।”

प्रभावित हो रही है गुणवत्ता
CBI का कहना है कि यह पूरा घोटाला न सिर्फ नियामकीय ढांचे की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को भी खतरे में डालता है।

सरकारी कदम और प्रतिक्रिया
सरकार ने इस घोटाले की पृष्ठभूमि में नए मेडिकल कॉलेज खोलने और सीटें बढ़ाने की योजना बनाई है। मार्च 2025 में सरकार ने 10,000 पोस्ट MBBS सीटें जोड़ने की घोषणा की है और अगले पांच वर्षों में 75,000 नई सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो “स्वास्थ्य सेवाओं की नींव कमजोर होगी”।

यह घोटाला देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, और यह तय करना जरूरी हो गया है कि क्या भारत सिर्फ “डॉक्टरों की संख्या” बढ़ाना चाहता है या फिर “कुशल डॉक्टरों” को तैयार करना।


संतोष यादव-

प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल “The Lancet” ने भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अधिकारियों के साठ गाँठ से चल रहे भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट छपी है।

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