Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : संसद में ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा, श्रीनगर में ऑपरेशन महादेव का प्रयोग और उसका सच

संजय कुमार सिंह

यह संयोग हो या नहीं, प्रयोग तो है ही कि इधर संसद में ऑपरेशन सिन्दूर पर 16 घंटे की बहुप्रचारित चर्चा चल रही थी और उधर ऑपरेशन महादेव की खबर आ गई। आज मेरे सभी अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता से है। इसमें यह खबर रह गई है कि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा, बड़े पैमाने पर समावेशीकरण पर फोकस कीजिये निष्कासन पर नहीं। यह हिन्दू की लीड का शीर्षक है लेकिन बिहार में एसआईआर को लेकर जो खबर प्रचारित है वह यह कि, एसआईआर पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार। यह देशबन्धु का शीर्षक है जो चार कॉलम में छपा है। इसका उपशीर्षक है, सर्वोच्च अदालत ने कहा, आधार और मतदाता पहचान पत्र को मानने पर करें विचार। यही शीर्षक आज इंडियन एक्सप्रेस में भी है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से फिर कहा – आधार और वोटर कार्ड पर भी विचार करें; मतदाता सूची के मसौदे पर स्टे नहीं। हिन्दू की लीड का शीर्षक इंडियन एक्सप्रेस में लीड के साथ छपी एसआईआर से संबंधित खबर का उपशीर्षक है। यह हेडलाइन मैनेजमेंट का ही असर है कि अखबारों की खबरों के अनुसार संसद में ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा चल रही है, बिहार में एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई और पहलगाम हमले का मास्टर माइंड मारा गया। वह भी कल सावन के सोमवार को ऑपरेशन महादेव के तहत। लेकिन वास्तविकता यह है कि कश्मीर में जो तीन आतंकवादी मारे गये हैं उनके पहलगाम हमले का मास्टरमांड होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक है, मारे गये तीन आतंकियों पर पहलगाम पहेली। इसमें लिखा है, सोमवार को कश्मीर में इन अटकलों का दौर चलता रहा कि पहलगाम के रहस्यमयी हत्यारे मारे गये हैं। इस खबर का उपशीर्षक है, उग्रवादियों से मुठभेड़ ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा के दिन हुई। खबर में बताया गया है कि इनके पहलगाम के हत्यारे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आप जानते हैं कि अभी तक पहलगाम के हत्यारों की पहचान से संबंधित कोई खबर नहीं थी। कोई महीने भर पहले आई खबर में कहा गया था, एनआईए ने पहलगाम के हिल पार्क क्षेत्र में हमलावरों को आश्रय प्रदान करने में कथित भूमिका के लिए दो स्थानीय लोगों – परवेज अहमद जोथर और बशीर अहमद जोथर को गिरफ्तार किया है।  इसपर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था, पहलगाम के हमलावर स्थानीय नहीं, शायद ‘जबरदस्ती’ शरण ली गई। उन्होंने यह भी कह था कि पहलगाम में गोली मारकर 26 लोगों की हत्या करने वाले सभी लोग बाहरी थे। वारदात के तीन महीने से ज्यादा बाद अब अचानक सावन के सोमवार को ऑपरेशन महादेव में तीन आतंकी मारे गये। इनमें से एक को पहलगाम हमले का मास्टर माइंड कह दिया गया। । अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, सेना ने पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सुलेमान समेत तीन आतंकी मार गिराये। मैंने पहले कभी नहीं सुना या पढ़ा था कि मास्टरमाइंड का नाम सुलेमान है। जो भी हो, दैनिक भास्कर ने शीर्षक में ही कहा है कि यह दावा सूत्र का है। हालांकि, फ्लैग शीर्षक है, घाटी में ऑपरेशन महादेव – सेना के पैरा कमांडोज को बड़ी सफलता। मुख्य शीर्षक है, श्रीनगर में तीन आतंकी ढेर; इनमें एक पहलगाम हमले में था : सूत्र

हिन्दू में इस खबर का शीर्षक है, श्रीनगर में तीन आतंकी मारे गये; पहलगाम से संबंधों की जांच की जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक भी ऐसा ही है, जम्मू और कश्मीर में तीन आतंकी मारे गये, सुरक्षा एजेंसियां पहलगाम से संबंध की जांच कर रही हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स का फ्लैग शीर्षक है, मास्टर माइंड मारा गया? मुख्य शीर्षक है, जम्मू कश्मीर में मुठभेड़ में तीन मारे गये इनका पहलगाम हमला करने वालों से संबंध। दि एशियन एज में यह खबर सेकेंड लीड है। इसका शीर्षक है, “जम्मू व कश्मीर की मुठभेड़ में पहलगाम का ‘मास्टरमाइंड’ मारा गया?” उपशीर्षक में तीन बुलेट प्वाइंट हैं। पहला, श्रीनगर के पास मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गये दूसरा, सेना का अभियान अभी भी जारी है। तीसरा, पहचान की पुष्टि की जा रही है। इसके बावजूद हेडलाइन मैनेजमेंट, संपादकीय लापरवाही या समर्पण का आलम यह है कि तमाम अखबारों ने मारे गये तीन आतंकियों में से एक को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड या नेतृत्व करने वाला कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक भी ऐसा ही है और यह खबर लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड बिहार में एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, वोटर आईडी के साथ आधार को भी स्वीकार कीजिये। पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड है, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा से कहा, यह अपील दाखिल नहीं की जानी चाहिये थी। लोकसभा में ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा की खबर लीड के साथ है। इसका शीर्षक है, लोकसभा में कांग्रेस के गौरव गोगोई के सवाल के जवाब में राजनाथ सिंह और एस जयशंकर ने ट्रम्प के मध्यस्थता के दावे को खारिज किया। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, पहलगाम के मास्टरमाइंड समेत तीन ढेर। इसके साथ के बॉक्स की खबर का शीर्षक है, “विपक्ष यह पूछे कि पाकिस्तान के कितने जेट गिरे : राजनाथ”। ऑपरेशन सिन्दूर पर 16 घंटे चलने वाली बहस कल शुरू हुई और उसपर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई दिलचस्प बातें कीं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने दूसरे लोगों की बातों के साथ इसे भी हाईलाइट किया है। 

हिन्दुस्तान टाइम्स ने विदेश मंत्री के इस दावे को चार कॉलम की खबर का शीर्षक बनाया है कि सैनिक कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच फोन पर कोई वार्ता नहीं हुई. मुझे लगता है कि अगर ऐसा था तो उसी समय कहा जाना चाहिये था। तब क्यों नहीं कहा गया जब बार-बार पूछा जा रहा था कि युद्ध विराम की घोषणा ट्रम्प क्यों कर रहे हैं। हिन्दू ने राजनाथ सिंह के इस खुलासे को सिंगल कॉलम में छापा है, अगर जरूरत पड़ी तो ऑपरेशन सिन्दूर फिर शुरू होगा। इंडियन एक्सप्रेस ने लोकसभा में ऑपरेशन सिन्दूर और पहलगाम हमले पर चर्चा को लीड बनाया है। शीर्षक है, सरकार ने कहा युद्धविराम के लिए कोई दबाव नहीं था, लक्ष्य पूरे हुए; विपक्ष ने ट्रम्प के दावों का मुद्दा उठाया। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, केंद्र सरकार ने कहा कि सेना ने लक्ष्य हासिल कर लिया तो ऑपरेशन सिन्दूर रोक दिया गया। यहां सवाल यह था और है कि युद्धविराम की घोषणा ट्रम्प ने कैसे की। इसका जवाब नहीं दिया गया है और जो कहा गया उससे भी कई सवाल पैदा हुए हैं। देखा जाये संसद में आगे क्या होता है और कल अखबारों में क्या छपता है। आज का संयोग या प्रयोग तो ऑपरेशन महादेव है ही। खास बात यह रही कि सेना ने लक्ष्य हासिल कर लिया तो ऑपरेशन सिन्दूर रोक दिया गया साथ ही यह भी कहा गया है कि, अगर जरूरत पड़ी तो ऑपरेशन सिन्दूर फिर शुरू होगा। मुद्दा यह है कि लक्ष्य पूरा हो गया तो जरूरत क्यों पड़ेगी और जरूरत क्या है।

आप के खिलाफ जांच

आप जानते हैं कि दिल्ली के कथित शराब घोटाले की जांच के साथ-साथ दिल्ली में क्लासरूम के निर्माण में घोटाले की जांच भी चल रही है। आज एक से ज्यादा अखबारों में खबर है कि बारापूला फेज-3 में भ्रष्टाचार की जांच करेगी एसीबी। उधर दिल्ली की डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए फ्री टिकट या पिंक टिकट की जगह पिंक पास दिया जायेगा। खास बात यह होगी कि यह योजना अब सिर्फ दिल्ली में रहने वाली महिलाओं के लिये ही होगी। जाहिर है, अब एनसीआर की जो महिलायें दिल्ली जाएंगी उन्हें दिल्ली में महिलाओं को मिलने वाली यह सुविधा नहीं मिलेगी जबकि एनसीआर के दोनों राज्यों में डबल इंजन की सरकार है और सभी सांसद सत्तारूढ़ पार्टी के ही हैं। फिर भी, एनसीआर की महिलाओं को दिल्ली सरकारी की योजना से चुपके से बाहर कर दिया गया है और इसपर कोई सवाल नहीं है। विरोध तो खैर कभी भी कुछ का भी नहीं होता।           

प्रेसिडेंशियल रेफ्रेंस

हिन्दुस्तान टाइम्स में आज छपी एक खबर के अनुसार, केरल और तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि राष्ट्रपति के रेफरेंस को वापस कर दें। खबर के अनुसार, दोनों राज्यों की सरकारों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अलग-अलग प्रेसिडेंशियल रेफरेंस को वापस करने के लिए कहा है। आप जानते हैं कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट को एक प्रेसिडेंशियल रेफरेंस भेजा है, जिसमें पूछा गया है कि क्या शीर्ष कोर्ट राज्यपालों और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजे गए राज्य के विधेयकों को मंजूरी देने के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित कर सकता है? तमिलनाडु सरकार ने राज्यपालों की तरफ से विधेयकों को मंजूरी देने की समय-सीमा के संबंध में राष्ट्रपति के संदर्भ (रेफरेंस) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष कोर्ट में दाखिल आवेदन में कहा गया है कि तमिलनाडु के राज्यपाल के मामले में फैसला सुनाने के ठीक एक महीने बाद दिया गया यह संदर्भ उक्त फैसले को पलटने का एक प्रयास है। राज्य का तर्क है कि अनुच्छेद 143 के तहत संदर्भ में राष्ट्रपति की तरफ से उठाए गए प्रश्न सीधे तौर पर तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में फैसले पर असर करने वाले हैं। अमर उजाला डॉट कॉम की खबर के अनुसार, राज्य ने कहा कि यह संदर्भ एक छद्म अपील के अलावा  कुछ नहीं है और कानूनन अस्वीकार्य है क्योंकि शीर्ष कोर्टे को अनुच्छेद 143 के तहत अपने ही फैसले को पलटने का कोई अधिकार नहीं है। तमिलनाडु राज्यपाल मामले में शीर्ष कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपाल को विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी। राज्य का कहना है कि शीर्ष कोर्ट को राष्ट्रपति संदर्भ पर कोई जवाब दिए बिना ही वापस कर देना चाहिए।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन