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उत्तर प्रदेश

फतेहपुर बवाल के आरोपियों का नाम लेने से क्यों रोका गया सुरेश खन्ना को? देखें वीडियो

अभिषेक उपाध्याय-

विश्वनाथ प्रताप सिंह भी यूपी के सीएम रहे हैं और वीर बहादुर सिंह भी। इनमें से कोई भी आज सीएम होता तो फतेहपुर की घटना पर सारे नाम लेने को कहता। फिर आरोपी चाहे ब्राह्मण हो, ठाकुर, पाल हो या पटेल।

वो ऐसा कतई नहीं करता कि गोमती नगर छेड़छाड़ पर अरबाज और यादव का नाम गिनाए और बाकी जातियों को भूल जाए।

वो ऐसा कभी नहीं करता कि फतेहपुर कांड में अपने मंत्री को आरोपियों का नाम लेने से ही रोक दे। शायद इसीलिए कि अब तक इस कांड में किसी यादव और मुस्लिम का नाम सामने नहीं आया है!!!

योगी को वीपी सिंह और वीर बहादुर सिंह से सीखना चाहिए। बात-बात में जाति की राजनीति का दुराग्रह कुछ और नहीं बल्कि एक विशेष तरह की मानसिक अवस्था है।

रवींद्र नाथ टैगोर अपनी महान कृति “गोरा” में लिख गए हैं- “जिस क्षण आप एक शिशु को अपने हृदय से लगाते हैं, आपको एहसास होता है कि कोई भी व्यक्ति किसी जाति में पैदा नहीं होता।”

रवींद्रनाथ टैगोर की गोरा का मुख्य चरित्र गोरमोहन उर्फ गोरा एक कट्टर हिंदू ब्राह्मण होता है और ब्रह्म समाज से नफरत करता है।

पर उपन्यास के आखिर में वह उसी ब्रह्म समाज की गुरूता के आगे नतमस्तक हो जाता है।

व्यक्ति को भाग्य के चलते मिले किसी बड़े पद के बाद दृष्टिकोण में विराट और बड़ी सोच का मालिक बन जाना चाहिए, भले ही उसका आरंभिक इतिहास कुछ भी रहा हो!!!

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