अमित चतुर्वेदी-
ये सोनम वांगचुक है, इन्होंने भारतीय सेना के उन जवानों के लिए जो लेह लद्दाख और गलवान की बर्फ़ीली चोटियों पर तैनात रहकर भारत की सीमाओं की रक्षा करते हैं उनकी सुविधाओं के लिए एक सोलर हीटेड टेंट बनाया था जिसका पेटेंट इनके पास है। इस टेंट में बाहर से 30 c॰ ज़्यादा तापमान होता है। इनकी इसी तकनीक पर आधारित सोलर टेंट बनाकर सैनिकों को दिए गए हैं।

वैसे ये सोनम वांगचुक 3 idiot के वो इडियट हैं जिन पर बेस्ड फुनसुक वांगडू का रोल आमिर खान ने निभाया था। सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांगियाल को पद्मश्री पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार दिया गया था और वो माउंट एवरेस्ट फ़तह करने वाले सबसे युवा भारतीय थे।
सोनम वांगचुक को भी रमन मैग्सेसे जैसा नोबेल के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जा चुका है।
आज इन्ही सोनम वांगचुक पर देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया है।
सोनम वांगचुक पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज होना इस बात का परिचायक है कि हमारे देश की सरकार माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में बेहद मजबूत और सशक्त तरीके से कार्य कर रही है!
राम मूर्ति राय-
कुछ ही वर्ष पूर्व उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू सोनम वांगचुक को सम्मानित कर रहे थे, तब सोनम वांगचुक देशभक्त थे, उनका एनजीओ वैध था, उनके फंडिंग के सारे स्रोत वैध थे….।।
लेकिन जैसे ही उन्होंने केंद्र सरकार से कह दिया कि चीन हमारे भूभाग को कब्जा कर लिया है, हमारे लोग वहां नही जा पा रहे है, जहां पहले आसानी से आते जाते थे।
जैसे ही उन्होंने केंद्र सरकार को उसका लेह लद्दाख से किया हुआ वादा याद दिला दिया, उसके लिए प्रोटेस्ट किया वैसे ही सरकार से लेकर सरकारी मीडिया सबने उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया…….।।
और अफसोस है कि चौथी पास अनपढ़ के चेलों ने उन्हें देशद्रोही मान भी लिया…..।।
दरअसल सोनम वांगचुक का दोष यह है कि वह इस देश मे रुक गए, यहां के लोगो के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए इनोवेशन करने लगे, वह उन चीजों को इनोवेट करने लगे जो शुद्ध स्वदेशी हो औऱ उससे लोगो का जीवन आसान हो….।।
सोनम वांगचुक की यह बहुत बड़ी गलती थी, वो इस देश को पहचान नही पाए। यह देश भेड़ बकरियों अनपढों कुपढो गुलामो का देश है, यहां चौथी पास प्रधानमंत्री, अनपढ़ दंगाई बलात्कारी, हत्यारे नेताओ, माफियाओं का सम्मान तो हो सकता है लेकिन प्रतिभाओं का सम्मान हो यह जरूरी नही है……।।
भारत से प्रतिभाओं का पलायन का कारण सिर्फ अवसरों की कमी नही है बल्कि उसका बड़ा कारण यह है कि यहाँ प्रतिभाओं का कोई सम्मान नही है..।।
सुंदर पिचाई, शांतनु नारायण,अरबिंद कृष्ना,सलिल पारेख,संजय मेहरोत्रा जैसी तमाम प्रतिभाएं भारत छोड़कर उन देशों में चली गयी जो देश प्रतिभाओं का सम्मान करते है, वो आज उनके लिए काम कर रहे है, उनकी तरक्की का रास्ता बता रहे है। हम भी उनका खूब सम्मान करते है, सीना फुलाकर कहते है, कि वो भारत का है…..।।
लेकिन जो प्रतिभाएं भारत मे रुक गयी,स्वदेशी तकनीक पर काम करने लगी, लोगो का जीवन स्तर कैसे ऊपर उठे इस पर रिसर्च करने लगीं, उनकी हम कोई कद्र ही नही कर पाते है…..यह इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है….।।
दरअसल यह देश बुद्धिजीवियों, टैलेंटेड लोगो को डिजर्व ही नही करता है, यह देश सिर्फ अंगूठाटेक,नफरती, घृणित, दंगाई हत्यारे बलात्कारी नेताओ औऱ ऐसे नेताओं की स्तुति करने वालो को ही डिजर्व करता है….।।
सोनम वांगचुक इस देश को न पहचान कर बड़ी गलती कर दिये, यदि वह भी देश छोड़ दिये होते तो भारी भरकम पैकेज के साथ आज सुंदर पिचाई,शांतनु नारायण की तरह देश दुनिया मे सम्मान पा रहे होते और हम भी सीना फुलाकर गर्व के साथ कहते सोनम वांगचुक भारत के है……।।
Major General G D Bakhshi :~
लद्दाख में संकट और हिंसा के दृश्य देखकर मेरे दिल में दर्द की चुभन होती है। 4 लोग मारे गए हैं और 70 से अधिक घायल हुए हैं। लद्दाख के लोग इतने साधारण और मधुर स्वभाव के हैं। बौद्ध होने के नाते वे बहुत दयालु हैं। फिर भी, वे दुनिया के सबसे बेहतरीन पर्वतीय सैनिक हैं। उन्होंने भारत की रक्षा के लिए अपनी जान दी है और वीरता के लिए कई पुरस्कार जीते हैं (जिनमें अशोक चक्र भी शामिल हैं)। उस शांगरी-ला में किसी भी पीड़ा को देखकर मुझे बहुत दुख होता है। लद्दाख एक बहुत ही महत्वपूर्ण और रणनीतिक सीमावर्ती राज्य है। हमें इन बहादुर और देशभक्त लोगों को अलग-थलग करने का जोखिम बिल्कुल नहीं उठाना चाहिए। हमें वहाँ की किसी भी पीड़ा या कष्ट के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। मुझे बताया गया है कि सीआईए का खेल फिर से खेला जा रहा है और एनजीओ रंगीन क्रांति को मंचित करने के लिए पैसे डाल रहे हैं। सीआईए हमेशा अशांत पानी में मछली पकड़ता है। लद्दाखियों की माँगें अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं हैं। वे संविधान की छठी अनुसूची चाहते हैं। इसमें क्या गलत है? बीजेपी ने इसका वादा किया था। हम इसे क्यों नहीं दे सकते? यह पूर्वोत्तर राज्यों और एएलपी में लागू है। युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। पहाड़ी राज्य पर्यावरणीय रूप से नाजुक हैं। मुझे लगता है कि हमें इन बहादुर और देशभक्त लोगों को लाड़-प्यार करना चाहिए और उनका पोषण करना चाहिए। भारत इन्हें अलग-थलग करने का जोखिम नहीं उठा सकता। हालांकि, हिंसा गलत है और कानून-व्यवस्था को लागू करना होगा। लेकिन हमें किसी भी वास्तविक शिकायत के प्रति बहुत सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। भगवान के लिए, हम इस तरह के महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य में असंवेदनशील होने का जोखिम नहीं उठा सकते।



शैलेश श्रीवास्तव
September 27, 2025 at 7:03 pm
विपक्षी दल इतने व्याकुल क्यों हो जाते हैं जब कोई भेड़िया पकड़ा जाता है ,ये शायद भूल जाते हैं कि या नया भारत है, एक फिल्म बनाकर सुर्खियां बटोरकर को देश भक्त नहीं हो जाता । वांगचुक गद्दार है और यह साबित भी होगा , सोनम वांगचुक कांग्रेस के इशारे पर काम कर रहा था