उत्तरकाशी। स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप की मौत ने उत्तराखंड की पत्रकार बिरादरी को हिला दिया है। उनके शव का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मंगलवार को जारी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मौत सीने और पेट में लगी अंदरूनी चोटों के कारण हुई। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की चोटें आमतौर पर दुर्घटनाओं के दौरान लगती हैं।
राजीव प्रताप का शव उत्तरकाशी जिले की जोशियाड़ा बैराज से बरामद हुआ था। उत्तरकाशी पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल ने बताया कि पोस्टमॉर्टम में किसी भी प्रकार के हमले के निशान नहीं मिले।
राजीव 18 सितंबर की रात से लापता थे। उनकी पत्नी मुस्कान के अनुसार, 18 सितंबर की रात 11:15 बजे उन्होंने आखिरी बार पति से बात की थी। उसी रात राजीव ने अपने दोस्त के साथ चौहान होटल में खाना खाया और फिर दोस्त की कार से गंगोरी के लिए रवाना हुए। अगले दिन जब वे वापस नहीं लौटे, तो उनके दोस्त ने पुलिस और परिवार को सूचना दी।
परिवार ने आरोप लगाया है कि राजीव को उनकी कुछ रिपोर्टों के बाद धमकियां मिल रही थीं। उनके भाई आलोक प्रताप सिंह का कहना है कि राजीव ने हाल ही में जिला अस्पताल की खराब स्थिति को उजागर किया था। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिली थी।
उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है। जो मामले से जुड़े सभी पहलुओं का जांच करते हुए जल्द रिपोर्ट सौपेंगी। लोगों के बयान, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों, सीसीटीवी फुटेजों की एक बार फिर से गहन समीक्षा की जाएगी.. दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड
जांच में सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, राजीव 18 सितंबर को रात 11:39 बजे अकेले गाड़ी चलाते हुए दिखाई दिए। उनकी कार अगले दिन घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर बरामद हुई, जिसमें उनकी चप्पलें भी मिलीं।
एसपी सरिता डोभाल ने बताया कि जांच अभी जारी है और प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुछ पत्रकार संगठनों ने भी उनकी मौत की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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