
मृत्युंजय कुमार-
राजीव प्रताप IIMC में हमारे क्लास साथी थे। राजीव उत्तराखंड में मुखर होकर स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे थे। इस वजह से कुछ धमकियां भी मिल रही थीं। 10 दिन पहले वे अचानक गायब हो गए, अगले दिन उनकी गाड़ी नदी में मिली और लगभग 10 दिन बाद उसी नदी के एक मुहाने पर उनकी लाश मिली।
राजीव अब हमारे बीच नहीं हैं; लेकिन उनके पीछे उनकी गर्भवती पत्नी और बुजुर्ग माता पिता हैं। जिनकी कई प्रकार से मदद करना अपेक्षित है। हमारे एक मित्र राजीव के परिवार के साथ संपर्क में हैं। उम्मीद है हम लोग मदद के सही तरीके के बारे में जल्दी सूचित कर पाएंगे।
IIMC के साथियों और सभी पत्रकारों से निवेदन है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और राजीव के परिवार की मदद के लिए आवाज उठाएं। मुख्यमंत्री ऑफिस से इस बारे में ट्वीट कर उचित कर्रवाई का भरोसा दिया गया है। अभी तक सरकार और प्रशासन की तरफ से ठीक रिस्पांस है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
लिखना बहुत मुश्किल है, लेकिन श्रद्धांजलि मित्र। ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति दें, तुम्हें इंसाफ मिले।
विश्वजीत सिंह-
छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर आपको याद होगा, भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए उनकी हत्या कर दी गई थी। अब उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर राजीव प्रताप सिंह 18 सितंबर 2025 की रात को लापता हो गए थे 10 दिनों बाद, उनका शव जोशियाड़ा बैराज की झील से बरामद किया गया।
वे ‘दिल्ली-उत्तराखंड लाइव’ नामक यूट्यूब चैनल चलाते थे, जहां स्थानीय मुद्दों जैसे भ्रष्टाचार, अस्पताल और स्कूलों की बदहाली पर रिपोर्टिंग करते थे। राजीव की पत्नी मुस्कान ने हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 11 सितंबर को राजीव ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उत्तरकाशी जिला अस्पताल की बदहाली (जैसे गंदगी, कुत्तों का घूमना, दवाइयों की कमी) को उजागर किया था।
वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें धमकियां मिलीं, जिसमें वीडियो हटाने या जान से मारने की चेतावनी दी गई। परिवार का मानना है कि भ्रष्टाचार उजागर करने की वजह से यह साजिश थी।

राजीव प्रताप नहीं रहे। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले एक युवा पत्रकार की मौत विचलित करने वाली है। उनकी पत्नी का दावा है कि उत्तरकाशी के जिला अस्पताल पर उन्होंने एक वीडियो किया था. इस वीडियो में उन्होंने अस्पताल के खस्ता हाल को दिखाया था. दिखाया था कि कैसे दवाओं की कमी के चलते इस हिमालयी जिले में लोगों को अस्पताल की चौखट से बैरंग लौटना पड़ता है।
अब उनकी पत्नी कह रही हैं कि इस रिपोर्ट के बाद उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। वो अपने एक पुलिसकर्मी दोस्त की गाड़ी से गंगोरी से आ रहे थे। उनका दोस्त रास्ते में उतर गया। 9 दिन बाद उनकी लाश भगीरथी में मिली। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। लेकिन परिवार फ़ाउल प्ले की बाट कर रहा है।
राजीव दिल्ली-उत्तराखंड लाइव नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफार्म चलाते थे। वो किसी बड़े संस्थान से नहीं जुड़े थे। भारत में लाखों की संख्या में ऐसे पत्रकार हैं जिनके पास किसी बड़े संस्थान की बैकिंग नहीं है। लेकिन तमाम खतरे उठाते हुए वो पत्रकारिता कर रहे हैं।
राजीव ने IIMC से तालीम हासिल की थी। वो संभावनाओं से भरे पत्रकार थे। इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ये हम सब की जिम्मेदारी है। राजीव के परिवार को न्याय दिलाना हम सब की जिम्मेदारी है। अक्सर पत्रकार की हत्या को हादसा बना कर उसे केस की फाइल बंद कर दी जाती है।
उत्तराखंड के स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताप का शव उनके लापता होने के 10 दिन बाद नदी से मिलता है। पुलिस कहती है कि हादसा लगता है। पत्नी कह रही हैं कि उत्तरकाशी में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रिपोर्टिंग के बाद उन्हें धमकियां मिल रहीं थीं।
सच्चे पत्रकार की मौत पूरे समाज की मौत के बराबर है, पूरी कहानी का लिंक नीचे दिया है। बिके हुए पत्रकार महल बनवा रहे और चैन से रह रहे हैं, बेबाक और ईमानदारों को श्मशान भी नसीब नहीं हो रहा।
राजीव के फेसबुक पेज पर उनकी जनसरोकार भरी रिपोर्टिंग देखिए….


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