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सुब्रत राय की मक्कारी और जिद्दीपन ने सहारा को बर्बाद कर दिया!

चरण सिंह राजपूत-

तिहाड़ से छुड़ाने के नाम पर भी अपने ही कर्मचारियों से ही ठग लिए थे 1250 करोड़ रुपए : सहारा के मुखिया रहे सुब्रत राय यदि 2015 में बात मान लेते तो शायद आज सहारा ग्रुप का वजूद ख़त्म होने की कगार पर न होता। सहारा के निवेशक, कर्मचारी सड़कों पर न होते। सुब्रत राय के परिवार पर जेल जाने का संकट न आता। सहारा ग्रुप के अडानी ग्रुप को बेचने की नौबत न आती। सुब्रत राय ठहरे थे जिद्दी आदमी। उन्होंने एक न सुनी जिसका खामियाजा पूरे ग्रुप को भुगतना पड़ रहा है। अपने इर्द गिर्द मक्कार लोगों को रखने वाले सुब्रत राय को स्वाभिमान आदमी उन्हें पसंद न था। मक्कार लोगों ने सहारा में खूब मौज मस्ती काटी पर ईमानदार आदमी हमेशा प्रबंधन के टारगेट पर ही रहा। 

दरअसल 2015-16 में जब बकाया वेतन मांग को लेकर सहारा मीडिया में आंदोलन चला तो सहारा के मुखिया सुब्रत ने हम लोगों को तिहाड़ जेल में बुलाया। उस समय सुब्रत राय मनीलांड्रिंग के मामले में जेल में बंद थे। 12 आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल सुब्रत राय से मिला था। उस समय सुब्रत राय ने ईमेल के माध्यम से सहारा के कर्मचारियों, अधिकारियों और निवेशकों को जेल से छुड़ाने के लिए आर्थिक मदद करने के लिए एक पत्र लिखा था। तब जानकारी हुई थी कि उस पत्र पर सहारा में 1250 करोड़ रुपए जमा हुआ था। यह वह दौर था जब सहारा में वेतन मिलना बंद हो चुका था एक टोकन मनी मिल रहा था। वह न के बराबर था।

किसी कर्मचारी ने बच्चों का पेट काटकर, किसी ने बीवी के जेवर बेचकर किसी ने कर्जा लेकर सुब्रत राय को जेल से छुड़ाने के लिए पैसा दिया। सुब्रत राय ने उस पैसा को भी हड़प लिया। उस समय सहारा को सेबी को 500 करोड़ रुपए देने थे। सेबी ने स्टॉलमेंट बांध दी थी। जब मैंने तिहाड़ जेल में सुब्रत राय से कहा कि आपके पत्र पर 1250 करोड़ रुपए जमा हुआ है और आपको 500 करोड़ रुपए सेबी को देने हैं। दे क्यों नहीं देते ? तब सुब्रत राय ने बड़ी बेशर्मी से स्वीकार किया था कि मुझे किसी दूसरे मद में पैसों को जरूरत थी। इसलिए मैंने कर्मचारियों को पत्र लिखा। मतलब सुब्रत राय ने तिहाड़ जेल से छुड़ाने के नाम पर अपने ही कर्मचारियों को ही ठग लिया था।

मक्कारी सुब्रत राय और उनके सिपहसालारों में कूट कूट कर भरी थी। तिहाड़ जेल में दो घंटे तक मीटिंग चली थी। तमाम बातें हुईं। सुब्रत राय के पास कोई जवाब न था। अंत में उन्होंने कहा कि मेरा सिर काटकर ले जाओ। मेरे पास पैसा नहीं है। उस मीटिंग में सुब्रत राय ने धमकी भरे लहजे में कहा था कि कोई नेता बनने की कोशिश न करे। सहारा में एक ही नेता है और वह सुब्रत राय है।

मीटिंग के बाद जब हम लोग नोएडा परिसर में चल रहे धरने में पहुंचे तो मैंने अपने भाषण में कहा था कि यदि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना नेतागिरी है तो आज से हम नेता हैं। उस समय मैंने आंदोलन को सहारा क्रांति का नाम दिया था। वह सहारा मीडिया में हुआ आंदोलन ही था कि उसके बाद निवेशकों और दूसरे विभागों में आंदोलन हो गया था। अब पूरे सहारा ग्रुप में आंदोलन चल रहा है। ईडी ने सहारा प्रबंधन और मालिकान पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है। 

सहारा प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि सहारा की 88 संपत्ति अडानी ग्रुप खरीदने को तैयार है। सहारा प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से अप्रूवल मांगा है। सहारा मीडिया, निवेशक और सहारा शहर के कर्मचारी आंदोलन पर हैं।

14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अडानी डील को लेकर सुनवाई है। सहारा प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि अडानी डील के बाद अडानी ग्रुप से मिलने वाला पैसा सहारा सेबी खाते में डाला जाए। याचिका में निवेशकों के साथ ही सहारा कर्मचारियों का बकाया भुगतान, वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य भुगतान किया जाए। देशभर के निवेशक सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहे हैं। अब देखना होगा कि सहारा, सहारा कर्मियों, निवेशकों, प्रबंधन, मालिकान और अडानी ग्रुप से डील का क्या होता है। 

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1 Comment

1 Comment

  1. Kashiram Rajoriya

    October 6, 2025 at 12:14 am

    Is Sara group ko koi bhi le le per garibon ka jo Paisa hai main bhi aaj ke bhugtan kiya jaaye India government se anurodh hai ki garibon ka hath Milana chahie bahut pareshan hai Garib main byaaj ke Paisa Mili

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