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उत्तर प्रदेश

अखिलेश दुबे कांड : अमिताभ यश का नाम छापने में कांपे अख़बार, एक साहसी पत्रकार की छानबीन क्यों?

अभिषेक उपाध्याय-

बड़ी ख़बर- अमिताभ यश का नाम नहीं छापा!! अखबारों का हाथ कांपा? चौंकाने वाली ख़बर!!

आखिर अखिलेश दुबे के पीड़ितों की प्रेस कॉंफ्रेस की ख़बर से अमिताभ यश का नाम क्यों गायब कर दिया अखबारों ने? एक दैनिक भास्कर ही डटा रहा। हिम्मत कर अड़ा रहा।

बड़ी बात ये भी कि अखिलेश दुबे की ज़मानत ख़ारिज वाले हाईकोर्ट आर्डर में 46 मामलों का जिक्र है, जो SIT के पास पड़े हुए हैं।

फिर भी आखिर नए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के आने के बाद अखिलेश दुबे के खिलाफ जांच की सुई आगे क्यों नहीं बढ़ी?

एफआईआर दर्ज की कार्यवाही क्यों नहीं हुई, शिकायतें क्यों थक गई हैं पड़ी-पड़ी?


कानपुर का एक साहसी पत्रकार जो अखिलेश दुबे के मामले में लगातार तथ्यात्मक ख़बरें रिपोर्ट कर रहा है, और बिना किसी का नाम काटे, ज्यों का त्यों, छाप रहा है,

उसके बारे में किसी बड़े अधिकारी को छानबीन की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? अरे छानबीन ही करना है तो उनकी छानबीन कीजिए, जिसके वास्ते कर्म की नैतिकता और पद की महत्ता ने आपको ये वर्दी सौंपी है!

ताकत के भरम में चूर बड़े लोगों को समझना चाहिए कि इस धरती में ईश्वर सिर्फ एक है। बाकी सिकंदर महान भी झेलम में फंस गया था और जूलियस सीज़र अपनों के ही चक्रव्यूह में सिमट गया था।

इसलिए भले ही आपको बेहद ताकतवर होने का भरम हो, फिर भी यकीन रखिए कि आप ईश्वर नहीं हैं!!


कानपुर पुलिस, आपकी बात आंशिक तौर पर सत्य है। मगर अखिलेश दुबे के मामले के सवाल इससे कहां कम होते हैं?

ये ठीक है कि आपने मुख्य आरोपी के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत किए हैं। ये ठीक है कि आपने अन्य कई अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

मगर इस मामले में IPS एंगल की जांच क्यूं नहीं की जा रही है। जब मुख्य शिकायकर्ता रवि सतीजा बाकायदा प्रेस कॉंफ्रेंस करके एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश का नाम ले रहे हैं तो फिर उनकी पड़ताल क्यों नहीं हो रही है?

आप या तो एडीजी लॉ एंड ऑर्डर को क्लीन चिट दे दीजिए, या फिर मुख्य शिकायतकर्ता की बातों पर मुहर लगा दीजिए। कुछ तो कीजिए।

आखिर SIT के पास पड़ी पचासों शिकायतों पर एफआईआर क्यों नही हो रही है, जबकि उनकी जांच भी हो चुकी है? आखिर रघुवीर लाल के कानपुर पुलिस कमिश्नर बनने के बाद से सारा एक्शन ठप्प क्यों नज़र आ रहा है?

ब्रिटेन के मुख्य न्यायाधीश रहे लॉर्ड हेवर्ट लिख गए हैं कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, न्याय होते हुए दीखना भी चाहिए। सो नाना राव पेशवा के शौर्य की इस धरती पर न्याय कीजिए।

कल अखिल कुमार थे। आज रघुवीर लाल हैं। परसों कोई और पुलिस कमिश्नर आएगा। मगर अखिलेश दुबे के पीड़ितों के इंसाफ का पन्ना उसी तरह फड़फड़ाएगा! समय की बनाई SIT के पन्नों में इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा!!

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