इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अखिलेश दुबे 6 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। अदालत ने यह कहते हुए जमानत देने से इनकार किया कि अपराध की प्रकृति गंभीर है, और आरोपी के गवाहों को प्रभावित करने तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की आशंका बनी हुई है। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दुबे पर गंभीर आपराधिक आरोप पेश किए, जिन्हें देखते हुए कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार किया।
कानपुर: मोटी रकम हड़पने के इरादे से निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने के मामले में हाईकोर्ट ने एबीसी न्यूज चैनल के मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने टिप्पणी की कि समूचे घटनाक्रम और साक्ष्यों से साफ है कि इस पूरे प्रकरण का केंद्र बिंदु अखिलेश दुबे ही हैं। अदालत ने कहा कि यदि उन्हें जमानत दी गई तो वह अधिवक्ता पेशे का दुरुपयोग करते हुए साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को धमका सकते हैं।
मामले की शुरुआत भाजपा नेता रवि सतीजा की ओर से बर्रा थाने में दर्ज रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें अखिलेश दुबे पर रंगदारी वसूलने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद 6 अगस्त को अखिलेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सेशन कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान अखिलेश की ओर से यह दलील दी गई कि उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत द्वेषवश फंसाया गया है। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर कहा कि दुबे की भूमिका इस प्रकरण में केंद्रीय है। अभियोजन ने बताया कि रंगदारी के संबंध में सुशील त्रिवेदी ने भी बयान दर्ज कराया है और पीड़िताओं ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अखिलेश के दबाव में ही झूठी शिकायतें दर्ज कराई थीं।
अदालत को यह भी बताया गया कि अखिलेश दुबे के खिलाफ अब तक छह आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और एसआईटी के समक्ष उनके विरुद्ध 46 मामलों की जांच लंबित है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने यह मानने से इनकार कर दिया कि जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार हैं, और इस तरह अखिलेश दुबे की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।


