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आज के अखबार : देसी खबरों और तथ्यों की उपेक्षा करके अंतरराष्ट्रीय खबर से छवि निर्माण की कोशिश

संजय कुमार सिंह

आज मेरे नौ में से आठ अखबारों की लीड प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा और वहां उनके भाषण की खबर है। इनमें चार ने आतंकवाद पर मोदी के सुझाव को लीड बनाया है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है – आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए ड्रग्स नेटवर्क पर करारी चोट की जरूरत। बाकी चार ने जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री के भाषण को लीड बनाया है और जैसा देशबन्धु का शीर्षक है, बताया है कि प्रधानमंत्री के अनुसार – वैश्विक आर्थिक विकास के मानकों को बदलने की जरूरत है। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, भारतीय मूल्य सबके लिए विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। प्रधानमंत्री (या देश) के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट की इस कोशिश के बीच नवोदय टाइम्स की लीड दिल्ली में प्रदूषण का प्रभाव है। खबर के अनुसार, सरकार ने ग्रैप के नियम और कड़े कर दिए हैं तथा चौथे चरण के प्रदूषण से निपटने के लिए किए जाने वाले कुछ प्रावधान अब तीसरे चरण के प्रवाधान का हिस्सा है। इस क्रम में दिल्ली सरकार ने निजी संस्थानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत कहा गया है कि 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करें। पता नहीं दिल्ली सरकार ने यह आदेश निजी संस्थानों के लिए क्यों जारी किया है और यह सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों नहीं है। वैसे भी सरकार निजी संस्थाओं को इस तरह का आदेश देने लगे तो काम करना-कराना मुश्किल हो जाएगा और अगर यह इतना ही जरूरी या व्यावहारिक है तो सरकार को अपने मामले में लागू करना चाहिए था। जो भी हो, खबर तो यह है ही लेकिन यह खबर बिना कहे भी बताती है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने 10 साल के अपने शासन में राजधानी की दशा-दिशा का क्या किया है। इसलिए यह दिल्ली के हर पाठक के लिए महत्वपूर्ण खबर है। फिर भी आज ज्यादातर अखबारों की लीड सरकार की छवि बनाने वाली खबर है।

यह कोई नई बात नहीं है। अक्सर होता रहा है। प्रदूषण की खबर के बारे में मैंने कल यहां लिखा था, आईक्यू एयर की रैंकिंग के आधार पर दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है पर खबर ढूंढ़ते रह जाओगे। देशबन्धु में यह खबर बॉटम है, नवोदय टाइम्स में तीन कॉलम की लीड लेकिन अमर उजाला के पहले पन्ने से गायब है। टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर यह खबर तो नहीं है लेकिन अधपन्ने पर सिंगल कॉलम की खबर बताती है, “दिल्ली ने 16 नवंबर को ‘बेहद खराब’ एक्यूआई वाले के दिन के रूप में भोगा”। इसके अलावा, देश की राजधानी के सबसे प्रदूषित शहर होने की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग से संबंधित खबर दिल्ली के मेरे नौ अखबारों में पहले पन्ने पर जो है वह इतना ही। जाहिर है, इसे छोड़कर कल श्रम कानूनों में ‘सुधार’ का भरपूर प्रचार किया गया था। इस तथ्य के बावजूद कि सुधार में सुरक्षाकर्मियों के लिए कुछ नहीं था। आज द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, सरकार ने ड्राफ्ट लेबर कोड (मसौदा श्रम संहिताओं) पर प्रतिक्रिया लेने का संकेत दिया है। सूत्रों के हवाले से छपी इस खबर के अनुसार, केंद्र ने चार नए श्रम कानूनों के मसौदा नियमों को फिर से अधिसूचित करने और ट्रेड यूनियनों व अन्य से प्रतिक्रिया मांगने का फैसला किया है। समझौता करने वाला यह कदम 10 श्रमिक संगठनों द्वारा नई श्रम व्यवस्था के कार्यान्वयन के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की धमकी के बाद उठाया गया है। इससे पहले, जैसा आप जानते हैं, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध (आईआर) संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता को अधिसूचित करते हुए कहा था कि ये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। यह सरकार और खबरों की हालत है। आज टेलीग्राफ की खबर कल का प्रचार पढ़ने वाले सभी पाठकों को तो नहीं ही मिलेगी।

आज सरकार का प्रचार आतंकवाद पर उसके सख्त रुख से किया गया है। लेकिन हम जानते हैं कि कुछ ग्राम की पुड़िया के लिए और उसके नाम पर रिया चक्रवर्ती और शाहरुख खान के बेटे आर्यन को कैसे परेशान किया गया। उसकी कैसी जबरदस्त रिपोर्टिंग हुई। अंत में मामला फुस्स हो गया। इसमें अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, सुधार की कोई खबर तो नहीं ही है, टन में नशे की बरामदगी के मामलों में भी किसी खुलासे की खबर नहीं है। सरकार ने कार्रवाई की या नहीं, अखबारों ने जानने-बताने की जरूरत नहीं समझी और अब प्रधानमंत्री ने कह दिया तो संपादकों ने लीड बना दिया। कहने की जरूरत नहीं है कि सरकार नैरेटिव बनाने की अपनी नीति पर चल रही है और अखबार-संपादक उसका पूरा सहयोग कर रहे हैं। आतंकवाद से संबंधित आज के शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने नशा और आतंकवाद के गठजोड़ के खिलाफ वैश्विक संघर्ष की जरूरत बताई। कहा, विकास को कैसे पारिभाषित किया जाता है इसपर पुनर्विचार की जरूरत है (टाइम्स ऑफ इंडिया)। प्रधानमंत्री ने जी20 से कहा, नशा-आतंकवाद का गठजोड़ एक वैश्विक खतरा है, अभी कार्रवाई हो (इंडियन एक्सप्रेस)। प्रधानमंत्री ने नशे के खिलाफ युद्ध, हेल्थकेयर और ज्ञान पर फोकस की अपील की (दि एशियन एज)द हिन्दू का शीर्षक है, जी-20 सम्मेलन में मोदी ने स्वास्थ्य, कौशल पर नई पहल के प्रस्ताव किए।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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