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उत्तर प्रदेश

चैनल मालिक अखिलेश दुबे पर भारी पड़ सकती हैं ये 6 शिकायतें, सीपी ने जांच के आदेश दिए!

कानपुर। भाजपा नेता रवि सतीजा को छेड़छाड़ के फर्जी केस में फंसाने और रंगदारी मांगने के आरोपों में जेल भेजे गए न्यूज़ चैनल मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे को भले ही 37 शिकायतों में राहत मिल चुकी है, लेकिन छह मामले अब भी उनकी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने इन मामलों में वीडियो रिकॉर्डिंग, सीडीआर और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी ने संबंधित शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

ये सभी शिकायतें तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के कार्यकाल में ‘ऑपरेशन महाकाल’ के दौरान सामने आई थीं। इनमें से चार मामलों में अखिलेश दुबे का नाम सीधे नहीं है, लेकिन उनके साथियों के शामिल होने के आरोपों की पड़ताल जारी है।

युवती के पलटे बयान, फिर भी लगी चार्जशीट — 8 लाख की डील का आरोप

गोविंदनगर निवासी कारोबारी सागर मल्होत्रा की शिकायत की एसआईटी जांच कर रही है। आरोप है कि एक युवती ने उन पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर एफआईआर कराई थी, लेकिन कोर्ट में दिए गए बयान में वह स्वयं ही आरोपों से मुकर गई। इसके बावजूद तत्कालीन थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने चार्जशीट लगा दी।

सागर मल्होत्रा के अनुसार, केस खत्म करने के लिए उनसे 8 लाख रुपये वसूले गए और यह रकम अखिलेश दुबे के साथी लवी मिश्रा तक पहुंची। शिकायतकर्ता ने युवती और लवी मिश्रा के बीच हुई कई बातचीत के रिकॉर्ड पुलिस को सौंपे हैं। अब एसआईटी यह जांच रही है कि इस पूरे प्रकरण में अखिलेश दुबे की क्या भूमिका रही।

अधिवक्ता को वाट्सऐप कॉल पर धमकी

अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा से जुड़े अधिवक्ता मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि 24 अप्रैल 2025 को कोर्ट से लौटते समय उन्हें अखिलेश दुबे के नजदीकी टोनू यादव ने वाट्सऐप कॉल पर एक प्लॉट विवाद को लेकर धमकाया। मनोज सिंह का कहना है कि धमकी दुबे के कहने पर दी गई थी।

पुलिस ने अखिलेश दुबे और टोनू यादव के बीच हुई कॉल डिटेल निकाल ली है। एसआईटी दोनों के मोबाइल की लोकेशन भी खंगाल रही है।

कारोबारी का आरोप—दुकान के सौदे पर धमकी, पगड़ी उतरवाई

गोविंदनगर के कारोबारी जसबीर सिंह भाटिया ने आरोप लगाया था कि दुकान के सौदे को लेकर हुए विवाद में अखिलेश दुबे ने उन्हें धमकाया और उनकी पगड़ी उतरवाकर बेइज्जत किया। जसबीर का कहना है कि उन्होंने शुभम गुलाटी से 11.65 लाख रुपये में दुकान का सौदा किया था। कोरोना काल में उन्होंने 8.95 लाख रुपये दे दिए, लेकिन बाकी रकम देने पहुंचे तो शुभम ने दुकान किसी और को बेचने की बात कही।

यह पूरा सौदा एक साधारण पर्ची पर लिखा गया था। जसबीर के विरोध करने पर कथित रूप से अखिलेश दुबे ने हस्तक्षेप किया और धमकी दी। पुलिस कमिश्नर ने इस लेनदेन के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं।

‘बिकरू केस की पैरवी रोकने की साजिश’—अधिवक्ता की शिकायत

अधिवक्ता सौरभ भदौरिया, जो बिकरू कांड के पैरवीकार हैं, ने आरोप लगाया कि उनकी पैरवी रोकने के लिए उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराने की साजिश अखिलेश दुबे के घर रची गई। उनका आरोप है कि बिकरू कांड के आरोपी जय बाजपेई के भाई रजयकांत बाजपेई ने अपनी नौकरानी से उन पर छेड़छाड़ की शिकायत कराई। एसआईटी को नौकरानी और रजयकांत के बीच लंबी बातचीत के रिकॉर्ड मिले हैं, जिनके आधार पर और जांच की जा रही है।

दुकान पर कब्जे का मामला

गोविंदनगर के संजय अग्रवाल ने दुकान पर कब्जे की शिकायत की थी। उन्होंने सनी चुग को सामान सहित दुकान 50 लाख रुपये में दी थी, लेकिन आरोप लगाया कि सनी ने केवल 8 लाख रुपये दिए। कई महत्वपूर्ण कॉल विवरण पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस कमिश्नर ने प्रकरण की विस्तृत जांच का आदेश दिया है।

केडीए सचिव के पूर्व पीए पर जमीन घोटाले का आरोप

साकेतनगर के श्रवण कुमार बाजपेई ने केडीए सचिव के पूर्व पीए कश्यपकांत दुबे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने केडीए की जमीनों में अनियमितताओं का ‘खेल’ किया। पुलिस को गवाहों के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।

चार और शिकायतों में जांच जारी

  • मनोज मिश्रा ने आरोप लगाया कि अखिलेश दुबे के कुछ साथी खाली जमीन को फ्लैट बताकर बेच रहे थे। उनसे नया प्रार्थना पत्र लेकर अखिलेश दुबे के विरुद्ध भी शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
  • गौरव त्रिपाठी ने धमकी और कब्जे की शिकायत दी है।
  • महेश बाबू (निरालानगर) ने कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी पर सरकारी जमीन बेचने और अखिलेश दुबे से मिलीभगत का आरोप लगाया है।
  • पूर्व पार्षद राजीव सेतिया (श्यामनगर) ने रंगदारी एवं फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है।

दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने इस मामले को लेकर लिखा है-

अखिलेश दुबे मामले में क्या अखिलेश यादव की आशंका सही साबित हो रही है? समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक नहीं बल्कि कई प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में इस बात की आशंका जतायी थी कि अखिलेश दुबे मामले को रफ़ा-दफ़ा कर दिया जाएगा।

कानपुर के नए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के आने के बाद से आख़िर इस मामले में क्या चल रहा है? कोई नई एफ़आईआर? कोई नई चार्जशीट? कोई नया इन्वेस्टिगेशन?

जिन IPS का मुख्य शिकायतकर्ता रवि सतीजा ने नाम लिया था, क्या उनसे कानपुर के नए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने पूछताछ की?

आख़िर इतनी ख़ामोशी क्यों है? क्या अखिलेश यादव इस अखिलेश दुबे के मामले में एकदम सटीक भविष्यवक्ता साबित हो रहे हैं?

केंद्र को भी संज्ञान लेना चाहिए। ये तो CBI जाँच का फ़िट केस है।

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