नवंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक 4PM यूट्यूब पर राजनीतिक कमेंट्री के मामले में सबसे आगे रहा। चैनल ने 287.4 मिलियन व्यूज हासिल किए और कुल व्यूज मार्केट में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने नाम की। दूसरे स्थान पर NMF News रहा, जिसे 138.6 मिलियन व्यूज मिले और इसका व्यू शेयर 8 प्रतिशत रहा। तीसरे नंबर पर DB Live रहा, जिसके वीडियो 131.2 मिलियन बार देखे गए।
सूची में चौथे स्थान पर Ulta Chasma uc रहा, जिसने 110.6 मिलियन व्यूज हासिल किए। इसके बाद The Live TV को 82.5 मिलियन और Ajit Anjum चैनल को 77.4 मिलियन व्यूज मिले। The Jaipur Dialogues, Dhruv Rathee और Ravish Kumar Official जैसे चैनल भी टॉप 10 में शामिल रहे, जिससे साफ है कि व्यक्तिगत चेहरों और विश्लेषण आधारित कंटेंट की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि टॉप 15 में Abhisar Sharma, online news india, The Newspaper, The Rajneeti और Deepak Sharma जैसे चैनल भी जगह बनाने में कामयाब रहे। यह दिखाता है कि यूट्यूब पर राजनीतिक विमर्श अब कुछ गिने-चुने बड़े ब्रांड्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग विचारधाराओं और प्रस्तुतिकरण वाले चैनल दर्शकों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
16वें से 30वें स्थान तक के चैनलों में THE CHANAKYA DIALOGUES HINDI, Earth 24, Headlines India, Bharat Samachar, 4PM UP, The Deshbhakt, Apka Akhbar, Jai Maharashtra News, GLOBAL BHARAT TV और Article19india जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी का व्यू शेयर 1 से 2 प्रतिशत के बीच रहा, लेकिन कुल व्यूज के लिहाज से ये भी लाखों दर्शकों तक पहुंच बना चुके हैं।
इन आंकड़ों से एक बड़ा संकेत यह भी मिलता है कि मुख्यधारा मीडिया से जुड़े टीवी चैनलों की तुलना में यूट्यूब आधारित स्वतंत्र और वैकल्पिक मीडिया प्लेटफॉर्म्स राजनीतिक चर्चा में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। दर्शक अब टीवी स्टूडियो की बहसों से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन पर मिलने वाले विश्लेषण, सवाल-जवाब और सीधे संवाद को तरजीह दे रहे हैं। नवंबर 2025 के ये नंबर बताते हैं कि आने वाले समय में यूट्यूब पर राजनीतिक पत्रकारिता और कमेंट्री का दबदबा और बढ़ सकता है।
4पीएम के संस्थापक और मुख्य संपादक संजय शर्मा चैनल के नंबर वन होने पर लिखते हैं-
दो साल नहीं…
दो साल से ज़्यादा हो गए..
लगातार !
बिना रुके !
बिना झुके !
जब सत्ता नाराज़ थी,
जब सिस्टम चिढ़ा हुआ था,
जब धमकियाँ थीं, नोटिस थे,
और “चुप करा दो” का दबाव था…
तब भी 4PM नंबर 1 था ..
क्योंकि यह चैनल
न किसी नेता का है,
न किसी उद्योगपति का,
न किसी एजेंडे का..
यह चैनल
आपका है
जब गोदी मीडिया तालियाँ बजा रहा था,
तब हमने सवाल पूछे..
जब सच बोलना गुनाह बना दिया गया था,
तब हमने गुनाह किया..
और सज़ा?
नोटिस, हमले, बदनाम करने की कोशिशें…
लेकिन आपने हमें कभी अकेला नहीं छोड़ा ..
आज जो नंबर 1 है,
वो कोई YouTube चैनल नहीं ..
वो जनता की आवाज़ है..
याद रखिए,
अगर सच कमज़ोर होता,
तो दो साल तक नंबर 1 नहीं रहता..
हम खड़े हैं..
आपके भरोसे..
और आख़िरी साँस तक सवाल पूछते रहेंगे..
4PM
न झुका है,
न बिकेगा,
न डरेगा..



प्रमोद श्रीवास्तव
December 27, 2025 at 9:20 am
पिछले कुछ वर्षों से राजनीति, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार आदि में निरंतर पतन हो रहा है क्योंकि अब ये सारे क्षेत्र केवल धनोपार्जन के साधन बनते जा रहे हैं. दुर्भाग्यवश इसी क्रम में अब पत्रकारिता भी जुड़ गयी है जो यूट्यूब के माध्यम द्वारा अपने व्यावसायिक हितों को अधिक महत्त्व दे रही है तथा इस उद्द्येश प्राप्ति हेतु वे किसी सीमा तक जा सकते हैं. हाँ सारे पत्रकार नहीं किन्तु कुछ को अवश्य इस श्रेणी में रखा जा सकता है. यूट्यूब पर सनसनीखेज शीर्षक बना कर पाठकों को आकर्षित कीजिये तथा पूर्णतः फेक/मनगढ़ंत ख़बरें डाल कर चैनल की Viewership बढ़ाइए तदनुसार अपनी कमाई में वृद्धि कीजिये. 4PM चैनल इसका ज्वलंत उदाहरण है. सरकार से प्रश्न पूछना तथा उसकी आलोचना करना सर्वथा उचित और स्वीकार्य है किन्तु आधारहीन ख़बरें चलाना पत्रकारिता का कौन सा पक्ष है . उक्त चैनल पिछले 18 महीनों में 36 बार मोदी सरकार गिरा चुका है. सरकार आज गिरी, कल गिरेगी, नायडू और नितीश की मीटिंग हो गयी, इतने MP तैयार हैं, कांग्रेस से बात हो गयी आदि आदि. यह कपोल कल्पना आधारित आखिर कौन सी पत्रकारिता है?. Views के आधार पर भले ही कोई चैनल टॉप पर चला जाये किन्तु उसकी विश्वसनीयता सदैव निम्नतम स्तर पर रहेगी. तात्कालिक आर्थिक लाभ हेतु क्या नकारात्मक पत्रकारिता आवश्यक है?