उर्मिलेश-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला (Venezuela) पर अपने हमले के जरिये वहां सत्ता-परिवर्तन (Regime Change) की योजना को अंजाम देने की कोशिश तेज कर दी है. राजधानी काराकास पर भारतीय समय के अनुसार बीती रात तकरीबन 2 बजे के आसपास अमेरिकी हमले (बमबारी) की शुरुआत हुई.
ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला के वामपंथी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके इस दावे की स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है. वेनेजुएला से भी राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी के लापता होने की खबर आ रही है.
अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप काफी समय वेनेजुएला को सबक सिखाने की धमकी दे रहे थे. इसके पीछे असल वजह थी, वेनेजुएला में अमेरिका-विरोधी मादुरो की वामपंथी सत्ता! गैस और बहुमूल्य खनिजों से भरे वेनेजुएला को अमेरिका अपने कब्जे में लेने या कम से कम अपनी कठपुतली सरकार के हवाले करने की जोरदार कोशिश में लगा हुआ था.
इस बीच रूस, ईरान, कोलंबिया, चीन, बोलिविया और क्यूबा सहित दुनिया के कई देशों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की तीव्र निंदा की है. रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी की नज़र वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार और अन्य खनिजों पर है. समझा जाता है कि इन देशों के प्रतिनिधि बहुत जल्दी ही संयुक्त राष्ट्र संघ के जरिये वेनेजुएला में मनमाफिक सत्ता-परिवर्तन की अमेरिकी मंशा को विफल करने की हर संभव कोशिश करेंगे!
मुकेश असीम-
अमरीका द्वारा वेनेजुएला पर किया गया आतंकवादी हमला अत्यंत निंदनीय है। लुटेरी अमरीकी साम्राज्यवादी पूंजी द्वारा वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमले, उसकी जनता की आजादी छीनने और उसके पेट्रोलियम, गैस व अन्य संसाधनों पर जबरी कब्जे की इस घृणित आपराधिक कोशिश के मद्देनजर दुनिया भर के इंसाफ पसंद लोगों द्वारा वेनेजुएला की अवाम के साथ एकजुटता जरूरी है।
अमेरिकी हमले का मक़सद वेनेज़ुएला के तेल और खनिजों पर कब्जा करना है, यह अमेरिका की खुली”गुन्डागर्दी है..अगर अमेरिका तेल क़े लीएँ वेणुजुएला क़ो बर्बाद कर दें रहाँ है,तों चीन को भी अब ताइवान के बम्बू कर देना चाहिए…मौका भी है,यूएन का दस्तूर भी यही बोलता है…सिर्फ वेनेजुएला ही क्यों। इजराइल को भी अरब देशों पर दबाव के लिए बनाए रखा है जिससे उन देशों के ऑयल पर कंट्रोल रहे,ईरान के पेट्रोल पर कंट्रोल नहीं है इसलिए दुश्मन है…अमेरिका ने दुनियाँ भर मेँ चारों तरफ लूट”माँऱ मचा रखी है,जहां उसके पपेट(एजेंट)सरकार में ना घुस पा रहे हों,वहां वो सैन्य”शक्ति द्वारा संसाधन क़ी लूट मचाता है…
नवमीत-
अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी मीडिया दावा कर रहे हैं कि वेनेज़ुएला में “बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई” की गयी है। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को “गिरफ्तार” कर लिया गया है और देश से बाहर ले जाया गया है।
यह अपने आप में कोई साधारण ख़बर नहीं है। यह अमेरिकी साम्राज्यवाद के उस राजनीतिक तंत्र का हिस्सा है जिसके तहत पहले तो दादागिरी दिखाते हुए सैन्य अतिक्रमण किया जाता है और फिर उसे लोकतंत्र, शांति और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का नाम लेकर वैध ठहराया जाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प खुले तौर पर मादुरो की गिरफ़्तारी की घोषणा कर रहा है। अब तो इस अपहरण की तस्वीर भी आ गयी है। साफ है कि यह कोई कूटनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि खुली सैन्य दादागिरी है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी नैरेटिव इसे “कानून के तहत कार्रवाई”, “नार्को टेररिज़्म के विरुद्ध ऑपरेशन” और “क्षेत्रीय स्थिरता” के नाम पर पेश कर रहा है।
यह भी कोई नयी भाषा नहीं है। बिलकुल इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल कोरिया, वियतनाम, इराक, लीबिया, सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान पर हमले के लिये भी किया गया था।
अब अगला अमेरिकी नैरेटिव होगा कि यहाँ “शांति” स्थापित की जायेगी। लेकिन यह भी सर्वविदित है कि साम्राज्यवाद के लिए शांति का मतलब युद्ध का अभाव नहीं होता, बल्कि ऐसा अंतराल होता है जिसमें उसके हितों को बिना बाधा के लागू किया जा सके। जब कोई देश इस व्यवस्था में बाधा बनता है, तो इस तरह के साम्राज्यवादी युद्ध को ही शांति का साधन घोषित कर दिया जाता है। बमबारी, स्पेशल ऑपरेशन, नर संहार, युद्ध अपराध, अपहरण जैसे कृत्य “स्थिरता” और “शांति स्थापना” कहलाने लगते हैं।
यह “लोकतंत्र” के नैरेटिव का सबसे बड़ा पाखंड है। अमेरिकी मीडिया का नैरेटिव है कि किसी देश के राष्ट्रपति को पकड़कर बाहर ले जाना लोकतंत्र की बहाली की दिशा में उठाया गया कदम है। किसी भी गंभीर राजनीतिक सोच के लिए यह विचार ही हास्यास्पद है।
यह भी उल्लेखनीय है कि मादुरो पर लगाए गए “नार्को टेररिज़्म” के आरोप वर्षों से अमेरिकी नीति का हिस्सा रहे हैं। यह साफ तौर पर वेनेज़ुएला के संसाधनों (मुख्यतः तेल) पर नियंत्रण हेतु गढ़ा गया नैरेटिव है। किसी देश के नेतृत्व को अपराधी घोषित कर दो, उस देश की संप्रभुता अपने आप संदिग्ध हो जायेगी। फिर संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय क़ानून, मानवाधिकार इन सबकी कोई वैल्यू नहीं रह जाती। वैसे भी ये सिर्फ कमज़ोर देशों पर लागू होते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में यह भी साफ है कि तथाकथित “अंतरराष्ट्रीय समुदाय” असल में कुछ साम्राज्यवादी ताकतों का झुण्ड मात्र है जो दूसरे देशों के संसाधनों पर गिद्ध दृष्टि जमाये रहते हैं। इस घटनाक्रम के दौरान कोलंबिया जैसे देशों की प्रतिक्रियाएँ और संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठकों की माँग नक्कारखाने में तूती से ज्यादा नहीं हैं।
बाकी यह संकट किसी एक या दो व्यक्तियों, जैसे ट्रम्प और मादुरो, या दो देशों का संकट नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का संकट है जिसमें साम्राज्यवाद अपने हितों के लिए लोकतंत्र को नारे की तरह, शांति को हथियार की तरह और अंतरराष्ट्रीय क़ानून को सुविधा अनुसार इस्तेमाल करता है। अंततः इसका सबसे बड़ा ख़ामियाज़ा तो हमेशा की तरह मेहनतकश जनता को भुगतना है। भले ही यह वेनेज़ुएला की जनता हो या फिर उससे बाहर की भी।
यह एक साम्राज्यवादी आतंकवादी आक्रमण है, जिसे “शांति और लोकतंत्र” की भाषा में ढकने की कोशिश की जायेगी।
यही अमेरिकी साम्राज्यवाद का असली चेहरा है।
मनीष आज़ाद-
अभी अभी ट्रंप ने अपने अकाउंट से ट्वीट किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ कर दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। इस खबर की पुष्टि होना बाकी है, लेकिन वेनेजुएला पर अमेरिका ने आक्रमण तो किया है और मादुरो की सरकार ने देश में इमरजेंसी घोषित कर दी है।
अमेरिकी साम्राज्यवाद की यह एक हताश कोशिश है, यह निश्चित ही ट्रंप के लिए घातक साबित होने वाला है।


