प्रकाश के रे-
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मदुरो और उनकी पत्नी का अमेरिका द्वारा अपहरण भयंकर गुंडई है. अमेरिका ने कहा है कि अब वेनेज़ुएला पर हमले नहीं होंगे.
अगर वेनेज़ुएला के तेल पर अमेरिका का क़ब्ज़ा हो जाता है, तो इसके परिणाम केवल लैटिन अमेरिका तक सीमित नहीं रहेंगे. दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर क़ब्ज़े से पश्चिम एशिया में अस्थिरता की अमेरिका की चिंता कम हो जाएगी और वह ईरान में सत्ता परिवर्तन करा सकता है. साथ ही, वह तेल बाज़ार में बहुत प्रभावशाली हो जाएगा.

अगर वेनेज़ुएला में अमेरिकी प्रभाव के विरुद्ध अच्छा-ख़ासा प्रतिरोध होता है, तो यह अमेरिका के लिए नुक़सानदेह होगा और वेनेज़ुएला तबाह हो जायेगा.
वेनेज़ुएला और ईरान में सत्ता परिवर्तन चीन और रूस के लिए बड़ा झटका होगा. बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए भी यह बड़ा झटका है. अमेरिका अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने पैंतरों को तेज़ करेगा.
इस घटना के बड़े भू-राजनीतिक परिणाम होंगे.
अविन कुमार-
अमेरिका ने वेनेजुएला पर एकतरफा हमला कर के वहाँ के राष्ट्रपति को अगवा कर लिया है। जितने भी लिबरल्स जो लोकतंत्र की दुहाई देते रहते हैं, उन सबके ज़ुबान को लकवा मार दिया है। अमेरिका की इस दादागिरी के ख़िलाफ़ वो कुछ नहीं बोलेंगे।
दरअसल वैश्विक पूंजीवाद एक बड़े संकट के दौर से गुज़र रहा है। और जब जब पूंजीवाद पर संकट आता है, वो पूरी दुनिया और मानव जाति को युद्ध में धकेल देता है। हमारी मौजूदा सरकार जो कि विश्वगुरु होने का दावा करती है, मुझे उम्मीद है कि वो अमेरिका के इस कार्रवाही पर सख़्त बयान देगी।
मनोज अभिज्ञान-
2026 की शुरुआत ही है और वेनेजुएला आज अचानक वैश्विक सुर्खियों में आ गया। राजधानी काराकस और उसके आसपास धमाकों की खबरें आईं। La Guaira बंदरगाह को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यह दावा किया गया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई में पकड़ा गया है और उन पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा। वेनेजुएला सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज किया और इसे संप्रभु देश पर सैन्य आक्रमण बताया।
अब तक प्राप्त तथ्य यह हैं कि काराकस और आसपास के इलाकों में तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। कुछ सैन्य और बंदरगाह संबंधी ढांचों को नुकसान पहुंचा, खासकर La Guaira पोर्ट, जो वेनेजुएला का अहम समुद्री द्वार है। वेनेजुएला सरकार ने आपात जैसी स्थिति की घोषणा ककर दी है और इसे विदेशी सैन्य आक्रमण बताया है।
अगर यह मान भी लिया जाए कि अमेरिकी दावा सही है, तो अंतरराष्ट्रीय क़ानून के लिहाज़ से मामला बेहद गंभीर है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार कोई भी देश किसी दूसरे संप्रभु देश में सैन्य बल का प्रयोग केवल दो स्थितियों में कर सकता है:
- आत्म-रक्षा में
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति से
वेनेजुएला ने न तो अमेरिका पर कोई सीधा सैन्य हमला किया था, न ही ऐसी कोई UN अनुमति सामने आई। इस स्थिति में किसी मौजूदा राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के ज़रिये पकड़कर दूसरे देश ले जाना extradition नहीं बल्कि abduction माना जाता है।
यह खतरनाक मिसाल है, क्योंकि अगर इसे वैध मान लिया जाए तो हर शक्तिशाली देश किसी भी कमजोर देश के नेता को अपराधी घोषित कर उठा सकता है। यही वजह है कि कई देश, चाहे वे मादुरो के समर्थक हों या आलोचक, इस कार्रवाई को संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहे हैं।
सवाल यह नहीं है कि मादुरो लोकप्रिय हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या यह सत्ता परिवर्तन की ठोस योजना है। Regime change केवल नेता हटाने से नहीं होता। इसके लिए तीन चीज़ें ज़रूरी होती हैं: अंदर से वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व, सेना का झुकाव और अंतरराष्ट्रीय मान्यता। इन तीनों मोर्चों पर अभी स्थिति अधूरी दिखती है। वेनेजुएला में कोई ऐसा संगठित वैकल्पिक नेतृत्व सामने नहीं है जो तुरंत सत्ता संभाल सके। सेना के बड़े पैमाने पर टूटने या पाला बदलने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस, चीन और कई Global South देश किसी अमेरिकी समर्थित सत्ता परिवर्तन को आसानी से स्वीकार करने वाले नहीं हैं।
दूसरी संभावना यह है कि यह पूरी कार्रवाई सत्ता परिवर्तन से ज्यादा symbolic power display हो। ऐसी कार्रवाई का संदेश वेनेजुएला से ज्यादा दूर तक जाता है। अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह चाहे तो किसी भी सरकार के शीर्ष तक पहुंच सकता है। यह संदेश रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के लिए भी है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है। भले ही वह अभी पूरी क्षमता से उत्पादन न कर पा रहा हो, लेकिन संकट की खबरें ही बाज़ार को हिला देती हैं। तेल बाज़ार में अक्सर वास्तविक कमी से पहले डर की कीमत जुड़ जाती है। La Guaira जैसे बंदरगाह को नुकसान, प्रतिबंधों की आशंका और कैरेबियन क्षेत्र में सैन्य तनाव, इन सबका असर यह होगा कि जोखिम प्रीमियम बढ़ेगा, कीमतों में अस्थिरता आएगी और निवेशक भविष्य की सप्लाई को लेकर सशंकित होंगे।
भारत वेनेजुएला से अभी सीमित मात्रा में तेल लेता है, लेकिन भारत की चिंता सप्लायर नहीं, कीमत है। अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल कुछ डॉलर भी ऊपर जाता है, तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल महंगे होंगे, परिवहन लागत बढ़ेगी जिससे महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। रुपये पर दबाव बनेगा।
अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के कई देश इस घटना को मादुरो के समर्थन या विरोध के चश्मे से नहीं देख रहे। वे इसे बड़े सवाल की तरह देख रहे हैं कि अगर किसी देश का नेता, चाहे वह कितना भी विवादित क्यों न हो, इस तरह सैन्य बल से हटाया जा सकता है, तो छोटे और कमजोर देशों की सुरक्षा की गारंटी क्या है?
सौमित्र रॉय-
दुनिया का महज़ एक फीसदी ड्रग्स बनाने वाले वेनेजुएला पर ट्रंप ने आज रात को सोते हुए हमला करवाया है।
काराकास में एक बंदरगाह पर अपाचे हेलीकॉप्टर से हमले के बाद ट्रंप ने अपनी डेल्टा फोर्स को राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ने उतारा है।
अमेरिका को वेनेजुएला से हर हाल में तेल, सोना और रेयर अर्थ मटेरियल चाहिए।
मादुरो ने अपनी फौज़ को वियतनाम की तरह गुरिल्ला युद्ध के लिए ललकारा है।
उधर, ईरान में भी 4 दिन पहले अमेरिका ने जेन जी को भड़काकर दंगे करवाए।
लेकिन कल, इसकी पोल खुल गई। इस साल ट्रंप का भी कुर्सी से रुखसत होना तय है।
वेनेजुएला में रेजीम चेंज हो न हो, लेकिन अमेरिका में ये ज़रूर होगा।


