यशवंत सिंह-
चोर की दाढ़ी में तिनका!
न्यूज़ इंडिया का कंसल्टिंग एडिटर यूसुफ अंसारी बहुत बड़ा झुट्ठा और विश्वासघाती है। आज उसने अपनी फेसबुक वॉल पर जो सफ़ाई पेश की है, उससे तो वो ख़ुद ज़्यादा फँस गया है। वरिष्ठ पत्रकार रजत अमरनाथ जी की पत्रकार बिटिया लावण्या शर्मा ने यूसुफ़ की पोस्ट पर जाकर कमेंट में अपना जवाब लिखा है, जो इस प्रकार है-
मैं स्वर्गीय श्री रजत अमरनाथ की बेटी हूँ, जिसने यशवंत अंकल से मदद मांगी थी। यूसुफ अंकल, कम से कम ऊपरवाले का तो खौफ रखिए। अपने आपको सही साबित करने के लिए आप एक स्वर्गीय व्यक्ति को झूठा ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। जिस इंसान को आप पर इतना भरोसा था कि उसने अपने नाम के साथ आपका नाम जोड़कर कंपनी तक शुरू कर दी, उसी इंसान के निधन के बाद आप उसे ही गलत ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपकी रूह नहीं कांपती।
मैंने बचपन में खुद कई बार आपको पापा से यह कहते हुए सामने से देखा है कि “भाईजान, हाथ टाइट चल रहा है, थोड़ी मदद कर दीजिए।” और आज आप उसी बात से साफ इंकार कर रहे हैं।
आपका कहना है कि मैंने आपसे “नामुनासिब” तरीके से बात की, लेकिन सच्चाई आप भी जानते हैं और मैं भी। दो बार मेरी कॉल पर आपसे बात हुई और आपने कहा “मैं कुछ करता हूँ बेटा,” और उसके बाद मेरी हर कॉल और हर मैसेज को आपने नजरअंदाज कर दिया।
हज की हुई रकम से नहीं किया जाता, इसके बावजूद आपने पैसे मांगे। कितनी आसानी से आप एक के बाद एक सफेद झूठ बोलते चले गए।
एक और सफेद झूठ यह है कि आपने अपना फ्लैट अपनी अम्मी के ऑपरेशन के लिए नहीं बेचा था, बल्कि राजनीति में प्रवेश करने के लिए बेचा था, पूरे जोर-शोर से तैयारी करने के लिए।
परिवार संभालने की हिम्मत आप दिखाते हैं, लेकिन जब हम अपने हक की चीज़, अपने पापा के खून-पसीने की कमाई के पैसे वापस मांगते हैं तो आपको तकलीफ होती है। यह तो सिर्फ पापा से ली गई रकम की बात है, आपने तो पापा के नाम पर भी लोगों से पैसे लिए हैं। पापा के जानने वालों से, उनकी पीठ पीछे, आप पैसे लेते थे और यह सब पापा को बहुत समय बाद पता चलता था।
टीवी9 के समय आपसे हर महीने “आर्थिक मदद” नहीं मांगी गई थी। आपसे सिर्फ यह कहा गया था कि जो पैसे आपने लिए हैं, उन्हें धीरे-धीरे करके वापस कर दीजिए, जो आपने एक बार भी नहीं किया।
बात करने के लिहाज पर तो आप कुछ न बोलें तो बेहतर है। अगर एक बेसहारा जानवर को भी बार-बार कोई पत्थर मारे, तो वह भी गुस्से में आ जाता है। हम फिर भी इंसान हैं, जो तमीज़ के साथ आप जैसे इंसान से बार-बार अपने पापा की मेहनत की कमाई वापस मांग रहे हैं।
कई बातें ऐसी भी हैं जिन्हें मैंने अब तक उजागर नहीं किया है, क्योंकि उन्हें लिखते-लिखते न जाने कितना समय बीत जाएगा।
समझ नहीं आता कि कोई इंसान अपने ईमान को इस तरह कैसे धोखा दे सकता है, जैसा आप दे रहे हैं। आम इंसानों में इंसानियत होनी चाहिए, लेकिन आप वह इंसानियत बहुत साल पहले ही खो चुके हैं।
यूसुफ अंसारी ने क्या सफ़ाई पेश की है, पढ़िए-
भड़ास4मीडिया चलाने वाले यशवंत सिंह ने मेरे बारे में फेसबुक पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी है। इसमें स्वर्गीय पत्रकार और मेरे पूर्व सहयोगी व मेरे दोस्त रजत अमरनाथ की बेटी के हवाले से उनके 35 लाख रूपए उधार लेकर हड़पने और वापिस नहीं करने आरोप लगाया है।
मुख्य आरोपी ये हैं कि मैंने अपनी मां को हज पर भेजने के लिए, उनका ऑपरेशन करने के लिए और बच्चों की फीस के लिए उनसे पैसे उधार लिए। ये तमाम आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और मुझे बदनाम करने वाले हैं। 1997 से लेकर 2017 तक मैं लगातार किसी संस्थान से जुड़ा रहा हूं। मेरी इतनी आमदनी होती रही कि अपने परिवार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए मुझे किसी से उधार लेने की जरूरत नहीं थी।
मैं अपनी मां, पत्नी और बेटे के साथ 2006 में हज पर गया था। उस समय में ज़ी न्यूज़ में था और मेरी सैलरी ठीक-ठाक थी। वैसे भी उधार के पैसों से हज नहीं होता। 2010 में मेरी मां को कैंसर का पता चला तब मैं चैनल वन में था। सैलरी भी अच्छी खासी थी। लेकिन इलाज पर खर्चा ज्यादा बढ़ा तो मैंने अपना फ्लैट बेचकर मां का इलाज कराया और अपनी ज़रूरतें पूरी की। इसलिए इसके लिए किसी से उधार लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
अप्रैल 2017 से मार्च 2021 के बीच मैं कहीं नौकरी नहीं कर रहा था। फ्रीलांस कर रहा था। ये आर्थिक तंगी का दौर था। इस दौरान रजत भाई के साथ कभी कभार मेरा छोटा-मोटा लेनदेन चलता था। ये लेन-देन पांच-दस हज़ार रुपए तक ही चलता था। उस समय रजत भाई मुझे लाखों रुपए उधार देने की स्थिति में नहीं थे और न मैं इस स्थिति मे था। मेरी जरूरत में वो हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। मैं भी उनकी ज़रूरत में उनके साथ हमेशा रहा। यह लेनदेन हम दोनों दोस्तों के बीच ही रहता था।
2020 में रजत भाई को ब्रेन स्ट्रोक आया था। वो समय लॉकडाउन का था। उनके बेटे का फोन आया था उसने यही कहा था कि कुछ पैसा वापस कर दीजिए। मैंने उससे कहा था कि बेटा मेरी तरफ तो रजत भाई का कोई उधार नहीं है। मैं खुद आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा हूं। इस वक्त मेरे पास भी नहीं पैसा नहीं है। लेकिन मैं कुछ ऐसे दोस्तों को जानता हूं जिन पर रजत भाई ने बड़ा एहसान किया है। संकट के इस दौर में उनसे मदद ली जा सकती है। आप मुझे सिर्फ फोटो भेज दो। दूसरा रास्ता मैंने क्राउड फंडिंग का सुझाया था। उसके बाद भाभी का फोन आया और उनहोंने मुझे जो कुछ सुनाया वह मैं बता नहीं सकता। उनका रवैया बहुत तल्ख था। इस सबको अनदेखा करके मैंने इस दौरान दो बहुत करीबी मित्रों से उनके इलाज के लिए एक लाख भिजवाए थे और उनके ठीक होकर घर आने के बाद एक लाख रुपए मैंने खुद उन्हें दिए थे। इस घटना के बाद रजत भाई मुझे घर के बाहर ही मिलते थे। उन्होंने भाभी और बच्चों के रवैये पर अफसोस भी जताया था। मैंने उनसे कई बार कहा कि मैं एक बार पत्नी के साथ आपके घर आता हूं। बैठ कर बात करके गलतफहमी दूर कर लेते हैं। लेकिन उन्होंने हर बार मना कर दिया।
रजत भाई की बेटी ने भी मुझे एक दो बार फोन किया था और बहुत ही नामुनासिब तरीके से बात की थी। उसे वो बातें नहीं करनी चाहिए थीं। यह बात सच है उस समय अपनी खराब आर्थिक स्थिति की वजह से मैं उनकी कोई मदद नहीं कर पाया था। लेकिन ये आरोप पूरी तरह गलत है कि मैंने उनका उधार लेकर वापस नहीं किया।
रजत भाई के साथ दिसंबर 2022 तक मेरा लगातार संपर्क बना रहा। मुलाकात कम होती थी बातचीत जरूर होती रहती थी। 2021 में मेरी अहमदाबाद में संदेश अखबार में नौकरी के समय और बाद में TV9 भारतवर्ष (डिजिटल)से जुड़े रहने के दौरान रजत भाई मुझसे हर महीने मेरी सैलरी में से कुछ आर्थिक मदद चाहते थे। ऐसा करने में पूरी तरह असमर्थ था। इसे लेकर उन्हें मुझसे वो नाराजगी भी हुए। इसी नाराजगी की वजह से बाद में संवाद हीनता की स्थिति बनगई।
रजत भाई के देहांत के समय में दिल्ली से बाहर था। इसका मुझे इसका पता भी काफी बाद में चला। शर्मिंदगी की वजह से मैं उनके घर झूठी सांत्वना देने नहीं गया। यह मेरी गलती है और इस गलती पर मुझे जिंदगी भर अफसोस रहेगा। लेकिन दो शब्द सांत्वना के कह देना भर से रजत भाई के परिवार की समस्या का समाधान नहीं होगा। मैं जानता हूं रजत भाई बड़ी जिम्मेदारियां छोड़कर गए हैं। उनका परिवार मुश्किल में है। इस समय मुझे उनके साथ खड़ा होना चाहिए था लेकिन खाली हाथ खड़े होने का भी कोई फायदा नहीं है। पिछले कई साल से मैं भी लगभग उसी दौर से गुजर रहा हूं जिस दौर से रजत भाई गुजारे थे। उन्हें मेरे हालात बखूबी मालूम थे।
जब यशवंत ने मुझे रजत भाई की बेटी के मैसेज के बारे में बताया था मैंने उन्हें भी अपनी स्थिति साफ कर दी थी कि मेरी तरफ रजत भाई का उधार का कोई पैसा नहीं है। हमारे बीच छोटा-मोटा लेनदेन जरूर होता था। उनका कहना था कि वह 35 लाख रुपए बता रही है आप 5-10 लाख अभी देदो। बाकी बाद में देख लेना। मैंने उनसे कहा था कि अभी मैं इस स्थिति में नहीं हूं। मेरी आर्थिक स्थिति सुधरेगी तो मैं खुद परिवार की हर संभव मदद करूंगा।
इस बारे में मुझे सिर्फ इतना कहना है की मेरी तरफ रजत भाई का उधर का कोई पैसा नहीं है। उनके परिवार की तरफ से मुझ पर ये आरोप मुझे बदनाम करने के लिए लगाया जा रहे हैं। मैं नहीं जानता वैसा क्यों कर रहे हैं। हो सकता है इसके पीछे किसी की कोई साजिश हो इस बारे में अगर पक्के तौर पर कुछ नहीं कर सकता। लेकिन यह मेरा खुद से वादा है कि मेरी आर्थिक स्थिति सुधरेगी तो मैं रजत भाई के परिवार को संभालने के लिए जो भी मुझसे बन पड़ेगा मैं करूंगा। इसके लिए किसी को कोई कैंपेन चलाने की जरूरत नहीं है। ये मेरी अंतरात्मा की आवाज़ है।
यूसुफ अंसारी की उपरोक्त पोस्ट पर आई कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं पढ़ें-
आशुतोष शुक्ला- अंसारी जी कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति अगर आपकी पोस्ट को पढ़कर पोस्टमार्टम करेगा तो यही कहेगा कि सत्य कहीं गायब है, मुझे नहीं पता कि रजत जी की बेटी सही बोल रही है या गलत और आपने कितना रुपया लिया. लेकिन पोस्ट में आपकी ये स्वीकारोक्ति कि मैंने उनको लाख रूपये दिए और वो मुझसे मेरी सैलरी में हिस्सा चाहते थे ये शब्द अपने आप में सच बयां कर रहा है कि आपका लेन-देन 10-5 हज़ार से ऊपर का था. मेरी सैलरी में मेरा कोई मित्र कैसे अपेक्षा रख सकता है कि उसे मैं कुछ दूंगा।
गौरव श्रृंगी- Yusuf Ansari जी, बिना किसी मतलब के कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे पर उंगली नहीं उठाता। यह कोई बात नहीं हुई जब आपकी स्थिति खराब थी तब सामने वाले ने आपकी मदद करी और आज जब उनकी स्थिति खराब है तो आप खुद की स्थिति खराब होने का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हो। बेवजह सुहानुभूति मत लूटो।
Amol Bajaj– पत्रकारों की लेखनी ऐसी होती है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ बोल रहा है , यह समझ पाना कठिन हो जाता है। जब दोनों पक्ष के लोग पत्रकारिता से जुड़े हैं तो अपनी लेखनी में शब्दों की चासनी में लपेटकर इस तरह अपनी बातों को रखते हैं कि पढ़ने वालों का मुंह मीठा हो जाता है।यह तय कर पाना मुश्किल है कि कौन सही है। लेकिन अभी तक जितना समझ मे आया है कि यशवंत जी की पारखी नजर से कोई बच नहीं सकता है। यशवंत जी सामने वाले को बैटिंग करने का पूरा अवसर देने के बाद अपनी फील्डिंग शुरू करते हैं।इस तरह के मामलों में यशवंत जी पूरी ईमानदारी बरतते हैं।इसका साक्षी हमसब हैं।
बहरहाल, आपने रजत जी के साथ छल किया है तो खुदा आपको देख रहे होंगें। वक्त सबका आएगा। आपने हज किया है ।आपका मन पाक होगा । आप सही हों ? लेकिन अभी आप कठघरे में हैं।
Yashwant Singh– यूसुफ अंसारी छलिया है! रजत जी के पास कैश रहता था हर वक्त। ये बात यूसुफ जानता था। वो हर माह नए बहाने से लाखों माँग ले जाता। इसे कीड़े पड़ेंगे इसी जन्म में।
Chander Mauli– यूसुफ अंसारी भाई आपको भी जनता हूं और Yashwant Singh भाई साहब को भी और बस इतना कहना चाहता हूं कि यशवंत भाई बिना तथ्य कोई बात नही बोलते जरूर कुछ न कुछ है तब जाकर उन्होंने लिखा होगा आशा करता हूं इस मसले को आप लोग मिल कर सुलझा लोगे।
Rehan Ashraf Warasi- अंसारी साहब , जितनी आसानी से आप समझाने की कोशिश कर रहे हैं उतना सीधा लग नहीं रहा, बात ईमानदारी की करो और जो लिया है उसके इज्जत के साथ वापिस कीजिए, याद रखिये कर्ज़दार की नमाज़ ए जनाज़ा से पहले पूछा जाता है , क़र्ज़ लेकर बहुत क्लियर है अपने यहाँ इसलिए बेहतर यही है की क़र्ज़ को निपटाइये, गलती पर नदिम होना और उसे दुरुस्त करना ज़रूरी है।
कुमार अशोक राजपूत- बेटी प्रूफ के साथ कह रही है, पैसा लिया है तब हर हाल में पैसा वापस करो…. यशवंत अन्य तभी कह रहे हैं मामला पहले से पेंडिंग किए हुए हो।
सौरभ गर्ग- कुछ तो गड़बड़ है जो इस लेख को पढ़ने के बाद समझ आ रहा है. कुछ बात है जो लिखी नहीं गयी पर समझ आ रही है. पर हमारे पास तो कोई सबूत नहीं इसलिए कह नहीं सकते ना ही कुछ बोलना लिखना उचित है. पर कुछ तो गड़बड़ है इतना समझ आया है
मोहम्मद तारिक आज़मी- अंसारी साहब, आपकी बातो में एक बात तो है कि आप एडमिट कर रहे है कि आपने अपने बुरे वक्त में पैसे लिए थे. आपने वह पैसे वापस किये इसकी कोई दलील आपके पास नहीं है न कोई साक्ष्य है आपके पास. अल्लाह के घर क्या मुह दिखाओगे, जाओ अपने उस दोस्त के घर और बैठो उसके यतीम बच्चो के साथ हिसाब करो और थोडा थोडा ही सही वापस करो. अगर नहीं लिया है उधार तो एक काम करो ‘मस्जिद में खड़े होकर कुरआन हाथो में लेकर इसका वीडियो पोस्ट कर दो’ झूठा हलफ उठाया तो अल्लाह उसका अजर तुम्हारी एक नहीं कई पीढियों तक देगा.
अखिलेश प्रधान- चोरी ऊपर से सीनाजोरी वाली बात हो गई ये तो। ग़ज़ब ही धूर्तता है। एक तो पैसे लिए हैं, लौटा भी नहीं रहे और उसमें भी सफ़ाई दे रहे सहानुभूति लूटने के लिए।
मूल खबर-



आलोक सिंह
January 20, 2026 at 4:00 pm
सब प्रारब्ध है और इस कलयुग में सब कुछ संभव है दोस्ती में जिस दिन पैसा शामिल हो जाता है उस दिन दोस्त दोस्त नहीं रहता यह बात जितनी जल्दी समझ लें उतना ही बेहतर होता है।
दोनों पक्ष की दलीलें पढ़ने के बाद मैं तो किसी डिसीजन पर पहुंचा नहीं
आलोक कुमार
January 20, 2026 at 4:41 pm
यूसुफ अंसारी शक्ल से ही आदतन बेईमान और कर्जखोर दिखाई दे रहा है और इस मामले में उसकी इतनी लंबी सफाई ही इस बात की स्वीकारोक्ति है कि उसने रजत जी के रूपये हड़पे हैं।
अगर जरूरतमंद परिवार के रुपये इसने नहीं लौटाए तो इसके खिलाफ एक अभियान चलाने की जरूरत है कि जिससे कि मौजूदा कंपनी सजा के रूप में इसे कार्यमुक्त कर दे और इसे इस कृत्य के कारण कहीं भी नौकरी न मिले।
यशवंत जी बिना किसी वाजिब तथ्य के किसी के मामले में नहीं पड़ते हैं।यशवंत जी का इस प्रकरण में पड़ना मतलब की अंसारी के चल, कपट और बेईमानी की पुष्टि है।