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सियासत

भारत में जब NSE ने सफाई मांगी तो अडानी एकदम नादान बलमा बन गया!

सौमित्र रॉय-

गौतम अदानी से बड़ा धूर्त कोई नहीं मिलेगा। वह सोचता है कि भारत में सारे लोग मूर्ख हैं। लेकिन, कुछ पढ़ने–लिखने वाले 1% समझदार लोग ही अकेले अदानी की बैंड बजा देते हैं।

235 मिलियन डॉलर की घूसखोरी के मामले में अमेरिकी कोर्ट ने जैसे ही ईमेल से समन भेजने की धमकी दी, अदानी की पैंट पीली हो गई।

उसने फटाफट अमेरिकी कोर्ट में अपना वकील खड़ा किया। कल कोर्ट में वकील जज के सामने गिड़गिड़ा रहा था–हुज़ूर, माई बाप। हमारे सेठ को कुछ मत करना। हम बात करेंगे। अभी कोई आदेश मत देना।

इधर, भारत में जब NSE ने अदानी से सफाई मांगी तो एकदम नादान बलमा बन गया, क्योंकि सैंया भए कोतवाल।


अदानी पर ‘कानूनी शिकंजा’ वाली खबर पर स्टॉक एक्सचेंज से सफाई, बोले– कंपनी पर कोई आरोप नहीं, कोई खुलासा जरूरी नहीं

नई दिल्ली/मुंबई। अदानी समूह को लेकर 23 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड से स्पष्टीकरण मांगा था। इस पर अदानी एंटरप्राइजेज ने 24 जनवरी 2026 को दोनों स्टॉक एक्सचेंजों को आधिकारिक पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट की है और कहा है कि मीडिया रिपोर्ट में जिस खबर का जिक्र है, उसमें कंपनी के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और न ही कंपनी किसी भी तरह की कानूनी कार्यवाही की पक्षकार है।

अदानी एंटरप्राइजेज ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह स्पष्टीकरण 23 जनवरी 2026 को प्रकाशित उस मीडिया रिपोर्ट के संदर्भ में है, जिसका शीर्षक था “US regulator seeking measures to serve Gautam, Sagar Adani legal summons, Bloomberg reports”। कंपनी का कहना है कि इस रिपोर्ट को लेकर पहले भी 21 नवंबर 2024 को स्पष्टीकरण दिया जा चुका है और मौजूदा रिपोर्ट में ऐसा कोई नया तथ्य नहीं है, जिससे किसी प्रकार के अतिरिक्त खुलासे की आवश्यकता पैदा होती हो।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को यह भी बताया कि प्रेस रिपोर्ट की सामग्री से सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस, 2015 के तहत रेगुलेशन 30 के अंतर्गत कोई नई या अनिवार्य सूचना सामने नहीं आती। अदानी एंटरप्राइजेज के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट में उल्लिखित मामले में न तो कंपनी पर कोई आरोप लगाया गया है और न ही कंपनी किसी कानूनी कार्यवाही में पक्षकार है।

अदानी समूह ने अपने पत्र के जरिए यह आग्रह किया है कि इस स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लिया जाए। पत्र पर कंपनी के सेक्रेटरी और जॉइंट प्रेसिडेंट (लीगल) जतीन जालुंधवाला के हस्ताक्षर हैं।

कुल मिलाकर, अदानी समूह ने स्टॉक एक्सचेंजों को भेजे गए इस जवाब के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि ‘कानूनी शिकंजा’ या ‘नया विवाद’ जैसी सुर्खियों के बीच फिलहाल कंपनी के खिलाफ न तो कोई औपचारिक आरोप है और न ही ऐसा कोई घटनाक्रम, जिससे निवेशकों को अलग से सतर्क होने की जरूरत पड़े।

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