नई दिल्ली: न्यूज़ ब्रॉडकास्टर न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 28 जनवरी 2026 को हुई अहम बैठक में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया को फिर पूर्णकालिक निदेशक (Whole Time Director) के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है। इस नियुक्ति का कार्यकाल 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक रहेगा, जबकि इसे कंपनी के आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की स्वीकृति मिलना शर्त के रूप में रखा गया है।
पुगलिया को इससे पहले भी 1 अप्रैल 2023 से तीन साल की अवधि के लिए NDTV का पूर्णकालिक निदेशक बनाया गया था, जो अडानी समूह के NDTV अधिग्रहण के बाद बोर्ड में किए गए व्यापक बदलाव का हिस्सा था।
संजय पुगलिया मीडिया उद्योग में तीन दशक से अधिक समय से हैं। CNBC Awaaz के लगभग 12 वर्षों तक संचालन में उनकी भूमिका, स्टार न्यूज़ और ज़ी न्यूज़ जैसे बड़े नेटवर्क्स में वरिष्ठ पदों पर कार्य, और Aaj Tak के शुरुआती दिनों में उनकी हिस्सेदारी के कारण उन्हें एक स्थापित पत्रकार माना जाता रहा है। उनके करियर में Business Standard और Navbharat Times जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों के साथ जुड़ाव भी शामिल है।
पत्रकारिता के सरोकार बनाम कॉर्पोरेट लायजनिंग
हालांकि पुगलिया का अनुभव पत्रकारिता से जुड़ा रहा है, उनके हाल के दिनों का कैरियर अब अधिक कॉर्पोरेट नेतृत्व और प्रबंधन की ओर मुड़ा हुआ प्रतीत होता है। एक समय जब मीडिया में जनपक्षधर पत्रकारिता, सच्चाई की खोज और स्वतंत्र रिपोर्टिंग केंद्रीय मूल्य थे, आज उनके पद की नवीनीकरण इस बदलाव का प्रतीक बन गई है कि कैसे वरिष्ठ पत्रकार अब व्यवसाय और कॉर्पोरेट रणनीति के हिस्से के रूप में बड़े मीडिया हाउसों में अपनी भूमिका अंजाम दे रहे हैं।
यह बदलाव आलोचनाओं को भी जन्म देता है कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों — जनता के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग — से हटकर अब पत्रकार प्रबंधन और कॉर्पोरेट लॉयजनिंग की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं, जिसका लाभ उन्हें बड़ी कंपनियों के भीतर निदेशक जैसे उच्च पदों पर बैठने के रूप में मिलता दिखता है। इस नियुक्ति को कुछ समीक्षकों ने “अडानी समूह की बढ़ती मीडिया हिस्सेदारी को सुदृढ़ करने” के कदम के रूप में भी देखा है, जहां पत्रकारों का कॉर्पोरेट नेतृत्व में स्थानांतरण पत्रकारिता के पारंपरिक आदर्शों से परे जा रहा है।
पुगलिया की इस नई भूमिका के साथ यह भी देखना बाकी है कि भविष्य में NDTV की खबर और संपादन नीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, खासकर तब जब मीडिया कंपनियों की कमाई और प्रबंधन पर कॉर्पोरेट हितों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। कह सकते हैं, अदानी के हितों की रक्षा में पुगलिया जी अपना सर्वस्व झोंक देंगे।
पुगलिया जी का अभी तक का जीवन सेवकाई में ही बीता है।कभी ये अंबानी के सेवक के रूप में प्रसिद्ध थे। और इनाम तो इन्हें नवभारत टाइम्स के दिनों से ही मिलते रहे हैं।इनाम है तो जीवन है और जीवन है तो इनाम है। -विष्णु नागर



Sumit Gupta
January 30, 2026 at 8:22 pm
In your older posts you mentioned pugaliya ki kya galti thi jo unhe hata diya and now you are saying, he is working from last three years will continue for next three years.
We know only Rahul Sir in NDTV, never seen him for a single day