सुभाष सिंह सुमन-
बजट में कोई पॉजिटिव सरप्राइज नहीं है इस बार। नेगेटिव सरप्राइज जरूर है, और बाजार देखकर पता चल ही गया होगा। अमूमन बजट के दिन बाजार एकाध पर्सेंट ऊपर-नीचे होता है। आज ऑलमोस्ट ढाई पर्सेंट गिरा। कल अभी और गिरेगा। बाजार वालों के लिए तीन नेगेटिव सरप्राइज हैं।
पहला:- STT बढ़ाना। किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ आने वाला है। दो साल पहले ही बढ़ा था। इस बार इंडस्ट्री कम करने की माँग कर रही थी। हालाँकि आम लोगों को इससे कोई नुकसान नहीं है, बल्कि फायदा ही है। फ्यूचर ऐंड ऑप्शंस को मैं भी सरकार की तरह शुद्ध सट्टा मानता हूँ। 95% से ऊपर ट्रेडर इसमें पैसे गंवाते ही हैं। बाजार को इससे नुकसान है। जीरोधा, ग्रो, CDSL, BSE वगैरह को खास तौर पर।
दूसरा:- शेयर बायबैक पर टैक्सेशन में बदलाव। पहले इन्हें डिविडेंड की कमाई की तरह माना जाता था टैक्स नियमों में, अब इन्हें कैपिटल गेन की तरह माना जायेगा। लेकिन फिर से वही बात कि इससे आम निवेशकों को फायदा ही है, प्रमोटर्स को नुकसान है। बाजार को बुरा लग रहा है, क्योंकि बाजार को छोटी मछलियों की नहीं, मगरमच्छों की फिक्र अधिक रहती है।
तीसरा:- SGB पर टैक्स। अगर आपने RBI से SGB नहीं खरीदा है, बल्कि मार्केट में ट्रेडिंग में खरीदा है, तो अब कैपिटल गेन देने की तैयारी करिये। यह बड़ा लूपहोल था। मुझे आश्चर्य इस बात का है कि सरकार की नींद खुलने में इतने साल लग गये, जब SGB की नयी सीरीज का आना बंद हो चुका है। लेकिन तुरंत ही मुझे किसी ज्ञानी की बात याद आयी- सरकारें नींद लेने के लिए ही बनती हैं।
मेरी टिप्पणी:- इस बार बजट से खास उम्मीद भी नहीं थी। दरअसल बजट ही धीरे-धीरे औचित्य खोता जा रहा है। अब इसका औचित्य लेखा-जोखा से अधिक नहीं है। सरकार ने अपने खर्चों का हिसाब दिया, कमाई की जानकारी दी, बस। यह काम आर्थिक समीक्षा की तरह रिपोर्ट जारी करके भी हो सकता है। अच्छा रहे कि ये बजट तैयार करने का समारोह और पेश करने की परंपरा वगैरह रेल बजट की तरह बंद कर दें। बिना मतलब में हमारा काम बढ़ता है। आज संडे को छुट्टी की जगह 3-4 दिन का काम एकसाथ करना पड़ गया। 😀
वैसे भी पिछले बजट में इनकम टैक्स पर जो पॉजिटिव सरप्राइज मिला था, वह उम्मीद से बहुत ज्यादा था। उसके बाद सरकार कुछ साल के लिए उसी तरह चैन की नींद ले सकती है, जैसे हमारे कई क्रिकेटर एक शतक लगाने के बाद एक-दो साल के लिए टीम में फिक्स होकर आराम से सोते हैं। सरकार ने तो उसके बाद जीएसटी वाला भी परफॉर्म किया है। मैं बजट से पहले निजी चर्चाओं में यही कह रहा था कि पिछले साल के इनकम टैक्स कट और जीएसटी कट के बाद कुछ भी करने से पहले कम से कम यहाँ से एक साल का इंतजार करना चाहिए।
चूँकि सरकार कोविड के बाद अपने सारे घोड़े खोल चुकी है, अब उसके पास बैठकर देखने के सिवाय और कोई विशेष चारा नहीं है। आपने लगातार कैपेक्स बढ़ाकर देख लिया, इनकम टैक्स भी कम कर दिया, जीएसटी भी कम किया, लेकिन फिर भी अर्थव्यवस्था में कहीं कुछ अटका हुआ है। अब एक बार महँगाई वाले घोड़े को थोड़ी ढील देकर देखो। बढ़ने दो कुछ। रिजर्व बैंक को करने दो कुछ कसरत। क्या पता महँगाई 4% पार करे तो नॉमिनल जीडीपी भी 10% पार हो और फिर कॉरपोरेट अर्निंग भी 10% पार कर जायेगी। यह हुआ तो बाजार चल पड़ेगा। प्राइवेट कैपेक्स भी चल सकता है इससे। निजी कंपनियाँ कोविड के बाद से ही पूँजी समेटकर कुंडली मारे बैठी हैं।
बजट में मुझे एक खास शिकायत रही। मेरी यह शिकायत नयी नहीं है। पहले के बजटों पर भी लिखा-बोला है मैंने यह। यह सरकार फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटे) को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर चलती है। अभी से नहीं, शुरू से ही। मुझे यह कंजर्वेटिव अप्रोच लगता है। इसकी अपनी प्रशंसाएँ हैं, अपनी आलोचनाएँ हैं, सब अपनी जगह ठीक हैं, बस मुझे यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने का विषय नहीं लगता।
मिलिन्द खांडेकर-
बजट के बाद ₹10 लाख करोड़ क्यों डूबे?
STT यानी Securities Transaction Tax बजट के बाद फिर से चर्चा में आ गया है. वित्त मंत्री ने F&O में STT बढ़ा दिया है. Futures में बढ़ोतरी 150% हुई है यानी पहले 0.02% टैक्स था, अब बढ़कर 0.05% जबकि Options में 50%. पहले 0.10% टैक्स था और अब 0.15% . कैश मार्केट के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इस टैक्स बढ़ोतरी का नतीजा यह हुआ कि शेयर बाज़ार दो प्रतिशत नीचे बंद हुआ. क़रीब दस लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हो गया
तो हिसाब किताब में समझिए कि STT क्या है?
यह टैक्स 2004 में UPA सरकार ने लाया था. शेयर बाज़ार में ख़रीदने और बेचने पर टैक्स लगाया गया था. एक तरह का टोल टैक्स है. आप हाइवे पर आएँगे या जाएंगे तो टैक्स चुकाना पड़ेगा. तब सरकार ने कहा कि यह टैक्स दीजिए हम शेयरों पर LTCG यानी Long Term Capital Gains Tax नहीं लगाएँगे.
2018 में NDA सरकार ने इसे पलट दिया. STT क़ायम रखा, शेयर से होने वाले फायदे पर LTCG फिर लगा दिया. अब सरकार का लॉजिक था कि बाकी Assets पर LTCG लगता है तो शेयरों को अलग कैसे रखें? 2024 में यह टैक्स बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया.
इन दोनों टैक्स से इनवेस्टर्स ख़ासकर FII परेशान चल रहे थे. बाज़ार सुस्त है इसलिए उम्मीद थी कि STT और LTCG में राहत मिलेगी लेकिन वित्त मंत्री ने इसे बढ़ा दिया. सरकार का लॉजिक है कि Derivatives में भारत की GDP से 500 गुना ज़्यादा ट्रेडिंग हर साल हो रही है. भारत की GDP 300 लाख करोड़ रुपये है जबकि Derivatives trading 150 लाख लाख करोड़ रुपये. इसी सट्टेबाजी को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.
SEBI की रिपोर्ट कहती है कि 100 में से 90 इनवेस्टर्स F&O में नुक़सान में हैं. इसे रोकने के लिए पिछले दो साल में कदम भी उठाए गए हैं, टर्न ओवर 25% तक कम हुआ है.सरकार को यह पर्याप्त नहीं लगता है. यही कारण है कि STT का रेट सरकार ने बढ़ाया है . सट्टेबाजी रुकेगी या नहीं, इसका पता नहीं मगर बाज़ार का मूड ज़रूर ख़राब हो गया है . समीर अरोड़ा जैसे जानकार तो कह रहे हैं कि शेयर बाज़ार और रुपया आने वाले दिनों में और टूटेगा.
सुप्रिया श्रीनेत-
बजट का फाइन प्रिंट : चालू वर्ष 2025–26 की वित्तीय स्थिति
सरकार की संशोधित राजस्व प्राप्तियाँ ₹78,086 करोड़ कम रहीं
संशोधित शुद्ध कर प्राप्तियाँ ₹1,62,748 करोड़ कम रहीं
कुल खर्च ₹1,00,503 करोड़ घटाया गया
पूंजीगत खर्च (Capex) में ₹1,44,376 करोड़ की भारी कटौती
जिन क्षेत्रों में बजट कटौती हुई
स्वास्थ्य: ₹3,686 करोड़
शिक्षा: ₹6,701 करोड़
सामाजिक कल्याण: ₹9,999 करोड़
कृषि: ₹6,985 करोड़
ग्रामीण विकास: ₹53,067 करोड़
शहरी विकास: ₹39,573 करोड़
पूर्वोत्तर भारत का विकास: ₹1,436 करोड़ की कटौती
SC, ST, OBC योजनाओं में कटौती
PM अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना: ₹890 करोड़
PM यंग अचीवर्स स्कॉलरशिप (OBC, EBC, DNT): ₹690 करोड़
SC छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप: ₹360 करोड़
आदिवासी विकास कार्यक्रम: ₹1,559 करोड़
अन्य बड़ी कटौतियाँ
जल जीवन मिशन / राष्ट्रीय पेयजल मिशन: ₹50,000 करोड़ की कटौती
PM आवास योजना: ₹3,200 करोड़ कम
अगले वर्ष 2026–27 के लिए सरकारी आवंटन
FY27 में कई योजनाओं को पिछले वर्ष (RE 2025–26) से कम पैसा दिया गया है:
फसल बीमा योजना
यूरिया सब्सिडी
PM गरीब कल्याण अन्न योजना
रक्षा क्षेत्र में विमान और एयरो इंजन
नौसेना डॉकयार्ड परियोजनाएँ
वायुसेना की परियोजनाएँ
राष्ट्रीय सुरक्षा में तकनीक
गरीब परिवारों के लिए LPG कनेक्शन
FY27 के लिए अनुमानित नाममात्र GDP वृद्धि: 10%
(जो मौजूदा वर्ष से भी कम है)
निष्कर्ष
बजट के आँकड़े खर्चों में भारी कटौती करके पूरे किए गए हैं
स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सामाजिक कल्याण और SC/ST/OBC स्कॉलरशिप जैसे जरूरी क्षेत्रों में पैसे काटे गए हैं
दूषित पानी से लोग मर रहे हैं, लेकिन पेयजल योजनाओं में भारी कटौती कर दी गई है
4.4% का राजकोषीय घाटा कोई उपलब्धि नहीं है, क्योंकि यह जरूरी खर्च घटाकर हासिल किया गया है
कम राजस्व प्राप्तियाँ साफ संकेत हैं कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती है
FY27 के लिए घोषित ₹17.14 लाख करोड़ का Capex भरोसा नहीं जगाता, क्योंकि इसी साल Capex में ₹1.44 लाख करोड़ की कटौती हो चुकी है


