सिद्धार्थ अरोड़ा शहर-
अपने देश का सम्मान रखते हुए सच और साफ़गोई से कैसे जवाब दिया जाता है, इसका उदाहरण फ्रेंच प्रेसीडेंट एमनुएल मैक्रों से सीखना चाहिए।
राज शमानी (जो शायद किसी रोज़ जीजस को भी अपनी पॉडकास्ट के लिए मना ही लेगा) ने पूछा कि “एक समय फ्रांस तो इनोवेशन में बहुत आगे हुआ करता था, फिर ऐसा क्या हुआ कि अमेरिका और चाइना टेक में इतने माहिर हो गए और फ्रांस पीछे रह गया?”
फ्रेंच सदर बोले “सबसे पहले तो स्केल, हम उस लेवल पर काम नहीं कर रहे हैं जितने पर चीन या अमेरिका कर रहे हैं।
दूसरे नंबर पर पॉकेट, अमेरिकन्स जिस तरह से पैसा लुटाते हैं, हमारे पास उतना मुश्किल है क्योंकि यूरोपियन लोग सेविंग्स में भरोसा करते हैं, उनकी इनवेस्टमेंट्स टेक में कम और बॉन्ड्स आदी में ज़्यादा होती है।
तीसरा कारण है कि हम रिस्क लेने की एबिलिटी भूलते जा रहे हैं, वर्ना एंटेप्रेनॉर शब्द फ्रांस ने ही दिया था। हमारे पास रिसर्च और इन्वेन्शन का कल्चर हमेशा से है और अब हम फिर से इस दिशा में काम कर रहे हैं!”
मुझे लगा राज इसके बाद कुछ आसान सा कुछ पूछेगा कि मैक्रों साहब आप आम चूस के खाते हैं या…
पर उसने तो जैसे बम फेंका कि “पिछले साल आपने यूरोप का खुद का ए-आई इंफ्रा टेक बनाने की बात की थी जिसके लिए आपने 109 बिलियन यूरोज़ का इनवेस्टमेंट भी जुटाया था। पर इसमें से 50 बिलियन तो यूएई से आया है? यानी इन्फ्रस्ट्रक्चर तो यूएई का होगा, टेक्नॉलजी अमेरिका या चीन से होगी तो फिर इसमें यूरोप का अपना क्या हुआ?”
इसपर भी प्रेसीडेंट साहब ने बड़ा अच्छा उत्तर दिया कि “हमारे पास फंड्स की कमी तो है न, यूएई के पास बहुत फंड है ये भी सच है। पर जब वो हमारे यहाँ इन्वेस्ट करेंगे तो कम से कम हमारे लोगों का डेटा तो सेक्योर रहेगा, कम से कम हमारे प्लेयर्स उसपर काम तो कर सकेंगे। बिना बड़ी इनवेस्टमेंट और टेक के, मैं अपने देश का डेटा सेक्योर कर रहा हूँ, ये क्या छोटी बात है?”
भारतीय मीडिया का सच में पतन हो रहा है। फ्रांस के प्रेसिडेंट मैक्रों इंडिया आए और उन्होंने किसी मेनस्ट्रीम न्यूज़ चैनल की जगह एक यूट्यूबर राज शमानी को इंटरव्यू देने का फैसला किया।
गोदी मीडिया ने अपनी सारी क्रेडिबिलिटी खो दी है और दुनिया अब यह समझ गई है। -दिनेश पुरोहित


