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उत्तर प्रदेश

मऊ-सीजेएम कोर्ट के आदेश पर दो पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा, जिले में हड़कंप

रोड किनारे हुए विवाद ने लिया कानूनी रूप, कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज

मऊ- उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में पत्रकारों के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे ने जनपद की सियासत और पत्रकारिता जगत में हलचल तेज कर दी है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर कोतवाली मऊ में हिंदुस्थान समाचार एजेंसी से मान्यता प्राप्त पत्रकार श्रीराम जायसवाल, हिंदुस्तान अखबार के पत्रकार भारतेंदु मिश्रा, उनकी पत्नी तथा दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

दरअसल नगर क्षेत्र सहादतपुरा में करीब एक माह पूर्व रोड किनारे ठेले वाले से विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि ठेला लगाने वाले व्यक्ति द्वारा पहले एक पत्रकार के साथ मारपीट की गई, जिसमें वह घायल हो गया। घटना की सूचना पर पहुंचे कुछ अन्य पत्रकारों ने कथित तौर पर ठेला लगाने वाले अभिषेक मद्धेशिया को एक स्थान पर ले जाकर मारपीट की। जिसपर शिकायतकर्ता पूनम मद्धेशिया, पत्नी आशीष मद्धेशिया, निवासी मुंशीपुरा, मऊ ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र निखिल और अभिषेक के साथ मारपीट की गई तथा पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से 24 घंटे तक लॉकअप में बंद रखा। इसके बाद उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

पूनम मद्धेशिया ने पहले उच्च पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मऊ की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सुनवाई के उपरांत सीजेएम ने पत्रकार श्रीराम जायसवाल, भारतेंदु मिश्रा व उनकी पत्नी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। कोतवाली मऊ में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 3(5), 115(2), 351(2), 352, 309(4), 74, 324(2) सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

पत्रकारों पर बीएनएस 3(5) – संगठित या सामूहिक अपराध से संबंधित, बीएनएस 115(2) – जानबूझकर चोट पहुंचाना (एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान), बीएनएस 351(2) – आपराधिक धमकी, बीएनएस 352 – जानबूझकर अपमान या उकसावे की कार्रवाई, बीएनएस 309(4) – डकैती से संबंधित (10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान), बीएनएस 74 – महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित (5 वर्ष तक की सजा), बीएनएस 324(2) – सार्वजनिक/निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना (5 वर्ष तक की सजा), इन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने से पत्रकार समुदाय में चिंता और आक्रोश का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि पुलिस ने मामला ऐसे दर्ज किया है, मानो किसी बड़े आपराधिक गिरोह पर कार्रवाई की गई हो।

पत्रकारों के खिलाफ इस कार्रवाई के बाद जिले में चर्चा का दौर तेज हो गया है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और जांच किस दिशा में बढ़ती है। फिलहाल, यह प्रकरण मऊ जनपद में न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में बना हुआ है।

एफआईआर की प्रति देखें…

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