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इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर इन चीफ राजकमल झा का ये संबोधन सबके सुनने लायक है, रामनाथ गोयनका पत्रकारिता अवार्ड पाने वालों को बधाई!

“मैं पिछले महीने हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में उस शिक्षिका को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने एक बेहद उल्लेखनीय बात कही थी, ‘तुम्हारा छह मेरा नौ हो सकता है।’”

आरएनजी अवॉर्ड्स में राज कमल झा ने इस बेहद प्रभावशाली प्रसंग का इस्तेमाल आज के सूचना परिदृश्य में सच और धारणा के रिश्ते पर विचार रखने के लिए किया।

जो बात पहली नजर में एक साधारण और हल्की-फुल्की टिप्पणी लगती है, वही आगे चलकर इस गहरी सच्चाई पर सशक्त टिप्पणी बन गई कि आज के दौर में सामूहिक रूप से किसी स्पष्ट झूठ को झूठ मान लेना कितना दुर्लभ हो गया है।

सुनिए राजकमल झा का पूरा भाषण-

https://x.com/indianexpress/status/2037551197796938057?s=46



एलपी पंत-

दैनिक भास्कर के दो रिपोर्टर्स को मिला प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड। अवधेश अकोदिया को जयपुर (राजस्थान) से लेकर बांग्लादेश तक फैले किडनी डोनर रैकेट का पर्दाफाश करने वाली स्टोरी के लिए सम्मान मिला। वहीं विजय पाल डूडी को चाइल्ड ट्रैफिकिंग के महीन जाल को उजागर करने वाली रिपोर्ट के लिए अवॉर्ड मिला। सच्ची बात, बेधड़क।


अवधेश अकोडिया-

शुक्रवार को नई दिल्ली में Vice President of India श्री सीपी राधाकृष्णन ने ‘रामनाथ गोयनका अवॉर्ड फ़ॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज़्म’ से सम्मानित किया। देश में पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए जूरी और Indian Express का धन्यवाद।

यह सम्मान अंग तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का सिलसिलेवार ढंग से भंडाफोड़ करने के लिए मिला है। बेख़ौफ़ होकर इस तरह की बड़ी ख़बरें करने की पूरी आज़ादी देने के लिए Dainik Bhaskar का बहुत-बहुत शुक्रिया। नेशनल एडिटर Laxmi Prasad Pant सर का विशेष आभार, जिनके मार्गदर्शन में इस तरह की असरदार ख़बरें मुक़म्मल होती हैं। अवॉर्ड उन सभी पत्रकार साथियों, मित्रों और शुभचिंतकों को समर्पित, जो सराहना करते हैं और साथ खड़े रहते हैं। यूं ही स्नेह बनाए रखें, इसी से ‘सच्ची बात, बेधड़क’ कहने की ऊर्जा मिलती है।


संजय श्रीवास्तव-

फिर बधाई मृदुलिका झा को. लगातार दूसरे साल रामनाथ गोयनका अवार्ड. अबकी बार खोजी पत्रकारिता के लिए, जो अब पत्रकारिता में दुर्लभ ही हो चुकी है. ये काम उन्हें “आजतक” में डिजिटल मीडिया के लिए रिपोर्टिंग करते हुए मिला. रिपोर्टिंग को तब चार चांद लग जाते हैं, जब आपके पास उसमें टांकने वाले शब्द और भाव हों और उन्हें मुकम्मल शक्ल देने की क्षमता.

बंगाल से लेकर पंजाब तक उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण, खोजी पत्रकारिता और दूसरे पहलुओं से जुडी़ ऐसी स्टोरीज की हैं, जो पत्रकारिता में भरोसा पैदा करती हैं. वह बेचैन रहती हैं, रहना भी चाहिए. …इन राहों पर चलना इतना आसान भी नहीं…

हमेशा मृदुलिका की प्रवाहपूर्ण और प्रभावपूर्ण भाषा का कायल रहा हूं. .. तो ये अवार्ड एक अच्छा क्रेडिट ही है. फिर बधाई. #ramnathgoenkaaward #journalism

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