दिल्ली हाईकोर्ट ने 4पीएम नेशनल यूट्यूब चैनल को बहाल किए जाने का आदेश जारी किया है। पिछले महीने मोदी सरकार ने चैनल को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए बैन करवा दिया था। यह दूसरी बार था जब सरकार ने 4पीएम को बैन कराया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जो कुछ कहा वो सभी डिजिटल मीडिया संचालकों और पत्रकारों को जरूर पढ़ना चाहिए….
संजय शर्मा-
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का डर दिखाकर 85 लाख सब्सक्राइबर्स वाले 4PM चैनल को बंद कर दिया. लेकिन जब मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा तो सच अदालत के रिकॉर्ड में खुद सामने आ गया.
कोर्ट ने साफ लिखा कि 4PM पर लगभग 50 हजार वीडियो थे और उनमें से सिर्फ 26 वीडियो पर आपत्ति जताई गई.
फिर सवाल ये है कि 50 हजार वीडियो वाले पूरे चैनल को क्यों बंद किया गया ! क्या यही लोकतंत्र है!
अगर 26 वीडियो पर विवाद था तो कानून के मुताबिक उन्हीं वीडियो पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. लेकिन यहाँ पूरा चैनल बंद कर दिया गया. यानी निशाना वीडियो नहीं था. निशाना आवाज थी.
सरकार अदालत में राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर जैसे भारी-भरकम शब्द लेकर पहुँची. लेकिन आखिर में कोर्ट को कहना पड़ा कि कथित आपत्तिजनक वीडियो अस्थायी रूप से ब्लॉक करो और चैनल बहाल करो.
मतलब साफ है. करोड़ों दर्शकों की आवाज बंद करने की कोशिश की गई.
आज देश में हालत ये है कि सरकार से सवाल पूछो तो राष्ट्रविरोधी सच दिखाओ तो खतरा और सत्ता की आलोचना करो तो पूरा चैनल बंद.
लेकिन याद रखिए. 4PM बिकने वालों में नहीं है. डरने वालों में नहीं है. झुकने वालों में नहीं है.
मोदी सरकार पूरी ताकत लगाकर भी सच की आवाज को स्थायी रूप से बंद नहीं कर सकी.
आखिरकार अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हो गया कि 50 हजार वीडियो वाले चैनल को सिर्फ 26 वीडियो के नाम पर बंद किया गया था. साथ ही ये आज तक नहीं बताया गया कि इन 26 विडियो में आपत्तिजनक क्या था !
इतिहास गवाह है. सत्ता हमेशा सवालों से डरती है. और जब सरकार मीडिया से डरने लगे, समझ लीजिए सच अभी जिंदा है
दिल्ली हाईकोर्ट का ऑर्डर…







Arun Joshi
May 12, 2026 at 11:10 am
सत्यमेव जयते