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सियासत

द हिंदू : इंदिरा गांधी अपील की ये न्यूज़पेपर कटिंग फर्जी है या असली है?

बीजेपी आईटी सेल द्वारा 1967 में इंदिरा जी द्वारा सोना न खरीदने की अपील वाली जो द हिन्दू की क्लिपिंग चलाई जा रही है उसे The Hindu अखबार ने FAKE बताया है। अंधभक्तों को भी उसी अखबार का सहारा लेना पड़ता है, जिसे वे हर वक़्त गरियाते रहते हैं। फर्जी ही बनाना था तो पांचजन्य का क्यों नहीं बनाया? अपने “सनातनी ब्रांड” पर भरोसा नहीं है क्या?

6 जून,1967 के ‘द हिंदू’ अखबार में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आम लोगों से सोना न खरीदने की अपील का यह पेज झूठा, फर्ज़ी है । खुद ‘द हिंदू’ ने इस बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है और पाठकों से इसे साझा करने से पहले सावधानी बरतने और जांच-पड़ताल कर लेने की हिदायत दी है।


संजय कुमार सिंह-

सोशल मीडिया के जरिए फर्जी नैरेटिव (कहानी) गढ़ने की कोशिश बुरी तरह पिटी। इस फर्जी कतरन से गिरोह का काम चाहे जितना सधा हो, इसकी आलोचना कम नहीं हुई। पोल भी खुली। है इसी लायक। इसे फर्जी होना ही था, सच भी होता तो किसी लायक नहीं था। इस पर मैं काफी लिख चुका इसलिए और लिखने की जरूरत नहीं है।

अभी यह बताते हुए मुझे कोल्डरिन का विज्ञापन याद आ रहा है, ये क्या हाल बना लिया है, कुछ लेते (करते) क्यों नहीं? सच्चाई यही है कि लेने की सीमा हो या नहीं हो, करने की सीमा होती है और उसके लिए योग्यता जरूरी है।


The hindu ने अमित मालवीय के गुलामों के मुंह पर तुल्लकी मार दी.. The hindu ने आज 12:56 पर ट्वीट करके बताया है,
“सोशल मीडिया पर आजकल एक ऐसी डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर घूम रही है, जिसे 6 जून, 1967 के ‘द हिंदू’ अखबार का पहला पन्ना बताया जा रहा है। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह हमारे आर्काइव (संग्रह) का कोई असली पन्ना नहीं है। ‘द हिंदू’ अपने पाठकों से आग्रह करता है कि वे इसे शेयर करने से पहले सावधानी बरतें और इसकी सच्चाई की जाँच कर लें” -गिरधारी लाल गोयल


कृष्णन अय्यर-

स्वर्गीय कांग्रेसी PM श्रीमती इंदिरा गांधी के नाम पर फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ा गया है.. इंदिराजी के नाम पर “The Hindu” अख़बार का 1967 का एक स्क्रीनशॉट वायरल करवाया गया. इस में लिखा था कि इंदिराजी ने 1967 में भारतीयों से गोल्ड नहीं ख़रीदने की अपील की थी.

इंदिराजी ने गोल्ड नहीं ख़रीदने की कोई अपील नहीं की थी..बल्कि इंदिराजी ने ख़ुद का गोल्ड भारत सरकार के ख़ज़ाने में जमा’ करवा दिया था.

मोदी की बकवास को सही साबित करने के लिए स्वर्गीय इंदिराजी का फ़र्ज़ी बयान बनाया गया. सूअरमीडिया के प्रेस्टिट्यूट्स ने भी इस फ़र्ज़ी ख़बर को चला कर ख़ुद को “नारंगी प्रेस्टिट्यूट्स” साबित किया.

एक मूर्ख की मूर्खता को सही करने के लिए इंदिराजी का नाम क्यों लेना था?

हेडगंवार, गोलूवालकर, (सावरकर + गोडसे), श्यामाप्रसाद, अटल, आडवाणी जैसों के बयान बना देते?

अब शक हो रहा है कि क्या कोई बड़ा उद्योगपति “रिटेल ज्वेलरी” के व्यापार में आ रहा है? क्या उस व्यापारी के लिए गहना उद्योग को कमज़ोर/ख़त्म करने की साज़िश है?

हालांकि रिटेल ज्वेलरी में टाटा ग्रुप जैसे बड़े कॉरपोरेट का भी व्यापार है..शायद बड़ी चोट पहुंचाने की साज़िश है.


अरविंद शर्मा-

सॉरी, मैं भी झांसे में आ गया

सोशल मीडिया पर “द हिंदू” अखबार की एक कथित पुरानी कटिंग तेजी से वायरल हो रही थी। इसमें दावा किया गया था कि 6 जून 1967 को इंदिरा गांधी ने लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। पहली नजर में यह कटिंग बिल्कुल असली लग रही थी। पुराने अखबार की डिजाइन, भाषा और प्रस्तुति इतनी वास्तविक दिखाई दे रही थी कि मुझे भी यह सही लगी। हालांकि उस दौर की स्थितियां बता रही हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने ऐसी अपील की थी। हिंदू ने सिर्फ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कटिंग का खंडन किया है। खबर का नहीं। फिर भी ऐसी भ्रामक सूचनाओं से मुझे परहेज करना चाहिए था।

दरअसल, मैं इसलिए भी झांसे में आ गया क्योंकि इसे मीडिया की एक बड़ी और चर्चित हस्ती ने साझा किया था। उनके भरोसे और प्रस्तुति को देखकर लगा कि खबर की जांच जरूर हुई होगी। लेकिन बाद में खुद “द हिंदू” ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया कि यह तस्वीर उनके अभिलेखागार का वास्तविक फ्रंट पेज नहीं है, बल्कि डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री है। इसके बाद साफ हो गया कि सोशल मीडिया पर फैल रही इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक और वैचारिक बहस को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा था।

यह घटना मेरे लिए भी एक सीख है। आज तकनीक के जरिए पुरानी तस्वीरों, दस्तावेजों और अखबारों को एडिट करके भ्रम फैलाना बहुत आसान हो गया है। इसलिए किसी भी वायरल सामग्री पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। हम सभी को जिम्मेदारी के साथ जानकारी साझा करनी चाहिए और भ्रामक सूचनाओं से परहेज करना चाहिए।

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