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जब जनसत्ता जैसा ब्रांड पहले से आपके पास है तो फिर अंग्रेजी अखबार का हिंदी वर्जन क्यों?

Two men sit at a panel desk at the front of a classroom, one speaking into a microphone while the other listens.

नदीम अख़्तर-

इंडियन एक्सप्रेस समूह का हिंदी मंच पहले से है जनसत्ता। बड़ा और मारक अखबार था। प्रभाष जोशी के ज़माने में। अब अपनी चमक खो चुका है। ऐसे में एक्सप्रेस के मैनेजमेंट ने lallantop वाले सौरभ द्विवेदी की अगुवाई में इंडियन एक्सप्रेस हिंदी का नया मंच लॉन्च किया है। पर सवाल ये उठता है कि जब जनसत्ता जैसा ब्रांड पहले से आपके पास है तो फिर अंग्रेजी अखबार का हिंदी वर्जन क्यों?

ऐसा ही Times of India में अपनी नौकरी के दौरान मैंने देखा। उनका नवभारत टाइम्स जैसा बड़ा और सफल अखबार पहले से था, फिर भी टाइम्स ऑफ इंडिया हिंदी करके वे एक दूसरा अखबार निकाल रहे थे। गजब तो ये कि मास्टहेड अंग्रेजी में ही लिखा जा रहा था।

इंडिया टुडे ग्रुप ने अपने अंग्रेजी न्यूज चैनल Headlines Today का नाम बदलकर अपनी मैगजीन के नाम पे India Today रख दिया। यानि एक नए बनाए ब्रांड को मारकर पुराने ब्रांड को ही टीवी संस्करण पर छाप दिया।

शुक्र है कि मालिक पुरी परिवार ने उनके सफल हिंदी चैनल आज तक का नाम बदलकर इंडिया टुडे हिंदी नहीं रखा। आज तक खुद में एक ब्रांड है, जिसे बरकरार रखा गया।

मुझे फख्र है कि आज तक को बनाने में नवभारत टाइम्स की टीम का ही हाथ रहा। स्वर्गीय एसपी सिंह और Qamar Waheed Naqvi साहब। जो लोग मीडिया से नहीं हैं, उनको शायद ये पता नहीं होगा कि चैनल को आज तक नाम नकवी जी ने ही दिया था। उन्होंने खुद मुझे बताया था कि दिल्ली से राजस्थान जाते हुए बस में उन्हें ये नाम सुझा। आज तक।

इससे पहले दूरदर्शन पर न्यूज बुलेटिन के रूप में प्रसारित होने वाले इस प्रोग्राम का नाम कुछ और रखा गया था, जो किसी और मीडिया आउटलेट से मैच कर रहा था। इस गलती को नकवी जी ने पकड़ लिया और मालिक अरुण पुरी को ये बताया गया। तब एसपी सिंह ने नकवी जी से कहा कि आप ही कोई नया नाम सोचो।

तब नकवी जी ने ये नया नाम सुझाया – आज तक। नकवी जी को इस पोस्ट में टैग कर दिया है। उन्होंने जितना मुझे बताया था और जो मुझे याद है, उसके आधार पर यहां सब लिखा है। अगर कोई फैक्ट गलत हो तो नकवी जी मुझे उसे ठीक करने को कह सकते हैं। मुझे उनका भरपूर स्नेह, सम्मान और विश्वास मिला है, जिसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं।

ऊपर जो फोटो लगा रहा हूं, वह उस वक्त की है, जब हमारी दावत पर नकवी जी IIMC में टीवी स्क्रिप्ट पढ़ाने आए थे। तब श्री KG Suresh IIMC के डायरेक्टर जनरल थे और नकवी जी के पांच दिवसीय वर्कशॉप की मंजूरी उन्होंने ही दी थी। आप दोनों का एक बार फिर शुक्रिया और आभार। वो भी क्या दिन थे!

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