गिरिजेश वशिष्ठ-
जगदीश उपासने जाने-माने पत्रकार हैं. वे इस समय प्रसार भारती भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं. साथ ही पूर्व कार्यकारी संपादक, इंडिया टुडे (हिंदी), पूर्व समूह संपादक ‘आर्गनाइजर-पांचजन्य’ साप्ताहिक, श्री उपासने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम् संचार विवि, भोपाल के कुलपति भी रह चुके हैं.
अब इनका ये पोस्ट देखिए. कच्छा कोटे से कैसे लोग पदों पर पहुंचते हैं. इसका अंदाज़ा हो जाएगा. इन महोदय ने अपनी कूढ़ मानसिकता का परिचय देते हुए इंस्टाग्राम से एक मिलती जुलती शक्ल की लड़की की फोटो निकाली. मोदी से सवाल पूछने वाली लड़की का ट्विटर प्रोफाइल निकाला, उसके स्क्रीन पोस्ट निकाले और पोस्ट कर दिया. पुराने जमाने में संघी चुप रहते थे तो मलाई खाते रहते थे. अब एक्सप्रेस करते हैं तो मुंह से कूड़ा निकलता है.
एक पत्रकार का सवाल पूछना इनको इतना अखर रहा है कि अपनी औरतों के बारे में सोच के आधार पर उन पर टुच्ची टिप्पणी करने लगे हैं. मैं इनको अपनी मित्र सूची से बाहर कर रहा हूं. मुझे किसी से कुछ न चाहिए. जिनको चाहिए वो झेले.
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने कैसे जर्नलिस्ट तैयार किये होंगे। सवाल पूछ लेने पर एक जर्नलिस्ट में न जाने क्या दिखा रहे हैं। -प्रवीण सिंह
अनिल जैन-
संघी संस्कारों में रची-पगी ‘खोजी पत्रकारिता’!
प्रधानमंत्री मोदी से सवाल कर चर्चा में आई नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंगी की यह तस्वीर उसके सोशल मीडिया अकाउंट से ‘खोज’ कर लाने वाला ‘सज्जन’ भी ‘पत्रकार’ ही कहलाता है।
इसकी इसी योग्यता के आधार पर इसे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का कुलपति भी बनाया गया था। वैसे माखनलाल विश्वविद्यालय इस समय भी ऐसे ही ‘काबिल’ हाथों में है।
बहरहाल, इस तस्वीर के रूप में खोजी ‘पत्तलकार’ ने शायद अपने जीवन की ‘सबसे बड़ी खबर’ ब्रेक की है।
दुनिया में भारतीय मीडिया का 157वां नंबर ऐसे ही नहीं है। इस पोजिशन पर आने के लिए भारतीय पत्तलकारों ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है।


