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सरकारों से सवाल पूछना एक पेशेवर काम है और किसी भी लोकतंत्र में सबसे बेहतर काम मीडिया ही कर सकती है!

Close-up portrait of a man with dark hair and a slight smile, wearing a light shirt.

Neeraj Badhwar-

मोदी जी, आपने प्लेटो को सही साबित कर दिया!

मुझे हैरानी है कि प्रधानमंत्री के 12 साल तक प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने को कैसे डिफेंड किया जा सकता है। इसका बचाव करने वाले अक्सर तर्क देते हैं कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की जवाबदेही जनता के प्रति होती है। मीडिया का एक सेक्शन तो वैसे भी दुर्भावना से काम करता है। पीएम नहीं बोलते तो क्या हुआ, बाकी मंत्री तो मीडिया से बात करते ही हैं। अब ये सारे तर्क बहुत ही पिलपिले हैं।

पहली बात तो ये कि प्रधानमंत्री या किसी सरकार की जवाबदेही जनता के प्रति नहीं, सवालों के प्रति होती है। जनता तो दो हज़ार मुफ्त मिलने पर वोट दे देती है, अपनी जाति का आदमी देखकर वोट दे देती है, उसके अवैध कब्ज़े को पक्का करने के आश्वासन पर वोट दे देती है। चुनावी जीत इस बात का कतई प्रमाण नहीं कि आप हर सवाल से परे हैं।

सरकारों से सवाल पूछना एक पेशेवर काम है। और किसी भी लोकतंत्र में सबसे बेहतर काम मीडिया ही कर सकती है। अगर किसी Highway बनाने में घोटाला हुआ है, कुछ खास लोगों को सरकारी योजनाओं में फायदा पहुंचाया जा रहा है, तो बात मीडिया को ज़्यादा अच्छे से पता होगी न। क्योंकि उनका काम है ऐसी विसंगतियों पर नज़र रखना।

एक सामान्य आदमी सरसरी तौर पर चीज़ों को जज कर सकता है, लेकिन बिना उचित तैयारी के वो ऐसी ठोस और मज़बूत बात सरकार से नहीं पूछ सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसीलिए राष्ट्र प्रमुख मीडिया से बात करते हैं, ताकि उनकी शंकाओं और सवालों का जवाब दे पाएं।

अब मैं ही सरकार से पूछना चाहता हूं कि किसी लोकतंत्र में नेता Private School, College और Hospital कैसे चला सकते हैं? पिछले 12 सालों में 93 हज़ार सरकारी स्कूल बंद कैसे हो गए? Private School में मध्यम वर्ग के लिए पढ़ाना ही बड़ी चुनौती है, तो उस 80 करोड़ को तो भूल ही जाओ जो सरकार से मुफ्त राशन लेकर गुज़ारा कर रही है। ये लोकतंत्र की हत्या है, राजनीतिक अपराध है। मैं जानना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री ये अपराध क्यों होने दे रहे हैं?

IQAIR की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के छह शहर हैं। Global Liveability Index में मुंबई और दिल्ली 141वें नंबर पर हैं। दुनिया के सबसे गर्म शहर भारत के हैं। राजधानी दिल्ली दुनिया की Rape Capital है।

NCRB के अनुसार अकेले दिल्ली शहर में 2024 में 25 हज़ार लोग गायब हो गए। क्या आप कल्पना भी कर सकते हैं कि दुनिया के किसी और देश की राजधानी में एक साल में 25 हज़ार लोग गायब हो जाएं? हर रोज़ 70 से 80 लोग… उनमें भी ज़्यादातर बच्चे और लड़कियां… बावजूद इसके इस पर कोई Discussion न हो… ये कोई मुद्दा न हो।

और इसी दिल्ली शहर में 2019 में प्रधानमंत्री की भतीजी का पर्स चोरी हुआ था। तब दिल्ली पुलिस की Crime Branch से लेकर Special Cell तक को चोरों को ढूंढने में लगा दिया गया। सैकड़ों CCTV Footage खंगाले गए और सिर्फ 24 घंटे में दोनों चोरों को पकड़ लिया गया।

अब क्या किसी PC में प्रधानमंत्री से ये सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि जब आपकी भतीजी के पर्स चोर को 24 घंटे में ढूंढा जा सकता है, उसके लिए Crime Branch और Special Cell को काम में लगाया जा सकता है, तो जो हज़ारों बच्चियां हर साल राजधानी से गायब हो रही हैं, उनके लिए ऐसी Urgency नहीं दिखाई जा सकती?

अगर नहीं दिखाई जा रही, तो इसका मतलब है कि पीएम की भतीजी का पर्स आम आदमी की बच्ची की जान से भी ज़्यादा कीमती है। लेकिन ये सारे सवाल इसलिए बेमानी हो जाते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आप लगातार चुनाव जीत रहे हैं? लेकिन चुनावी जीत क्या जवाबदेही से मुक्ति दिला देती है?

2024 के चुनावों में 57 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्होंने NDA को वोट नहीं दिया। अब इन लोगों की कुछ तो असहमति होगी, कुछ तो शिकायत होगी। अगर मीडिया का एक वर्ग उसी शिकायत पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछना चाहता है, तो क्या प्रधानमंत्री का फ़र्ज़ नहीं है कि उन शिकायतों का निवारण करें?

भगवान राम ने एक धोबी के कहने पर जब माता सीता को छोड़ा, तो इसका ये मतलब थोड़ा था कि उन्हें सीता जी पर शक था। इसका संदेश यही था कि अगर किसी समाज में एक धोबी जैसा साधारण व्यक्ति भी कोई संदेह व्यक्त करता है, सवाल पूछता है, तो राजा का फ़र्ज़ है कि वो उसे भी संबोधित करे।

दूसरा, ये कहना कि मीडिया का एक वर्ग तो बुरी नीयत से पूछता है, इसलिए पीएम बात नहीं करते। अरे, ये क्या बात हुई? पीएम एक Statesman होता है। सारे विभाग उसके अंतर्गत आते हैं। उसकी एक आवाज़ पर लोग सांसद बन सकते हैं। क्या वो शख्स इतनी योग्यता या संप्रेषण क्षमता नहीं रखता कि कोई उसे बहलाने की कोशिश करे, तो बड़ी विनम्रता से वहीं उसके झूठ का पर्दाफाश कर सके?

प्रधानमंत्री को अगर लगता है कि मीडिया विश्वास करने योग्य नहीं है, उससे बात नहीं की जा सकती, तो कल को जनता कह दे कि हमने देखा है कि High Court के जज के घर से 15 करोड़ मिले थे। हमें पता है जज बिकाऊ हैं, हम आज से अदालत के किसी फैसले को नहीं मानते?

बच्चे कह दें कि हमने देखा है कि चार सालों से NEET के पेपर लीक हो रहे हैं। अब से हम पेपर नहीं देंगे, सीधे हमें 12वीं के नंबर के आधार पर Doctor बनाओ, तो आप क्या जवाब देंगे?

और Middle Class ये कह दे कि नेताओं ने आज तक हमारा भला नहीं किया। न हम सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं, न सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, न हम मुफ्त राशन लेते हैं। जाओ, आज से हम Tax नहीं देते, तो सरकार क्या करेगी? अगर इस तरह का वर्ग मिलकर एक अवज्ञा आंदोलन चला दे, तो सरकार कैसे Deal करेगी? क्या देशभर में अराजकता नहीं फैल जाएगी?

दाग तो हर संस्था पर है। लेकिन ये कह देना कि पूरा मीडिया ही मेरा दुश्मन है — वो भी तब, जब आप 12 साल से सरकार में हैं — इसलिए मैं कोई PC नहीं करूंगा, Direct कोई सवाल नहीं लूंगा, ये बताता है कि आपको अपनी बौद्धिक योग्यता और पेशेवर सत्यनिष्ठा पर भरोसा नहीं है। और यही भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

प्लेटो ने आज से ढाई हज़ार साल पहले (380 BCE में) अपनी किताब The Republic में कहा था कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी खामी ये है कि यहां सबसे लोकप्रिय आदमी चुनाव जीतता है, सबसे सही नहीं। उन्होंने कहा कि अगर एक हलवाई और Doctor चुनाव में खड़े हैं, तो हलवाई कह सकता है कि तुम Doctor को वोट क्यों दे रहे हो? ये तो हमेशा तुम्हें अच्छी चीज़ें खाने से रोकता है, ये तुम्हें कड़वी दवाई भी देता है, दस तरह की टोका-टोकी करता है। तुम मुझे जिताओ, मैं तुम्हें हर रोज़ मिठाई खिलाऊंगा। कभी कुछ भी खाने से नहीं रोकूंगा।

अब ये ऐसी बात है जिससे आम आदमी को बहलाया जा सकता है। और यही लोकतंत्र के साथ हो रहा है। मुफ्तखोरी के नाम पर, जातिवाद के नाम पर हमारी राजनीतिक व्यवस्था सालों से जनता को मिठाई खिला रही है। Doctor डर के मारे बंकरों में छिप गए हैं। हलवाइयों ने देश पर राज कर लिया है। देश 80 साल से हलवाइयों के हवाले है।

अब हलवाई समोसा तो बना सकता है, आपको रबड़ी वाला दूध भी पिला सकता है, लेकिन वो Fighter Jet का इंजन नहीं बना सकता। न वो AI की दौड़ में कहीं है, वो दुनिया से 15 साल बाद Semiconductor बनाना शुरू करता है।

वो ऐसा पुल नहीं बना सकता जो उद्घाटन से पहले टूट न जाए। वो लोगों को ऐसी सब्जियां नहीं दे सकता जिनमें मिलावट न हो। वो ऐसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकता जहां पांच-पांच करोड़ Case Pending न हों। वो ऐसी सड़कें नहीं दे सकता जहां हर साल 5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे न जाएं। वो अपनी नदियां नहीं साफ कर सकता, वो साफ हवा नहीं दे सकता और छोड़ो, खुद को धार्मिक बताने वाला यही हलवाई अपने धार्मिक स्थलों को कूड़ेदान बनने से नहीं रोक सकता। उसे उगाही और लूट का अड्डा बनने से नहीं रोक सकता।

वो झूठे नारे गढ़ता है, झूठे दावे करता है, Headline Manage करता है और हर दीवार पर कील ठोकता है ताकि उस पर अपनी तस्वीर टांग सके।

वो हर बुराई को तिरपाल के नीचे ढककर आपको सब कुछ सुंदर दिखाना चाहता है… और कोई पूछ न ले कि तिरपाल के नीचे क्या है, इसलिए वो कभी Press Conference नहीं करता!

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