संजय कुमार सिंह
इटली से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के सोशल मीडिया पोस्ट के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती और बेहतरी की खबरें गंभीर और लीड हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को गद्दार कहा है लेकिन खबर है, गद्दार कहने के लिए भाजपा ने राहुल की आलोचना की। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है – मोदी के इटली दौरे के दौरान रोम, दिल्ली ने संबंधों को मजबूत किया है। इसके साथ, युद्ध को लेकर ट्रम्प का दावा भी पूरी गंभीरता से है। ट्रम्प अभी भी कह रहे हैं कि वार्ता अंतिम चरण में है और कोई करार नहीं हुआ तो हमले होंगे। नवोदय टाइम्स की लीड अलग है। इसका शीर्षक है, ईरान मोर्चे से अमरीकी सैनिकों की होगी वापसी। उपशीर्षक है, सीनेट से झटका मिलने के बाद ट्रम्प ने कहा, युद्ध जल्द खत्म होगा। कहने की जरूरत नहीं है कि दोनों खबरें परस्पर विरोधी हैं और अब अखबार अपने हिसाब से किसी एक को महत्व देते हैं। युद्ध से संबंधित तीसरी खबर देशबन्धु में है। इसके अनुसार, अमेरिका के 42 लड़ाकू विमान का नुकसान हुआ है। पत्रकारिता का नियम रहा है कि तथ्यों को पाठक के समक्ष रख दिया जाए, निर्णय उसे करना है। इसलिए एक तरह की खबरें एक साथ रखी जाती हैं। लेकिन अब तो पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे पत्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट के लिए थू-थू हो रही है या उन्होंने ऐसा काम किया है कि थू-थू हो। ऐसे में अखबारों की खबरों की क्या बात की जाए। मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि हेडलाइन मैनेजमेंट जारी है। सरकार और नरेन्द्र मोदी की छवि का पूरा ख्याल रखा गया है। आज की प्रमुख खबरों में जातिवार जनगणना के खिलाफ याचिका खारिज कर दिया जाना, डॉलर 97 रुपए का हो जाना भी महत्वपूर्ण खबरें हैं।

अमर उजाला हमेशा की तरह सरकार को लेकर सबसे ज्यादा आशावादी है। लीड का शीर्षक है, भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदार साथ बनाएंगे उत्पाद, दुनिया भर में बेचेंगे। इसका उपशीर्षक है, प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की पीएम मेलनी के साथ बनाया द्विपक्षीय सहयोग का महत्वाकाक्षी रोडमैप। दि इंडियन एक्सप्रेस ने सरकारी प्रवक्ता या प्रचारक की तरह सरकारी खबर मय शीर्षक के प्रस्तुत कर दी है। खबर है, विशेष रणनीतिक साझेदारी की घोषणा। व्यापार, गलियारा, रक्षा: रोम और दिल्ली ने संबंधों को मजबूत किया। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, मोदी-मेलोनी के संबंधों से द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूती मिली; 15 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड भी इसी विषय पर है लेकिन खबर कुछ अलग है। शीर्षक है, मोदी की इटली यात्रा के दौरान रोम और दिल्ली ने संबंधों को और मजबूत किया। आप जानते हैं कि मामला सिर्फ यात्रा का नहीं संबंधों का है और संबंध भी साधारण नहीं है। ऐसे हैं जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इटली की प्रधानमंत्री के लिए मेलोडी नाम की टॉफी लेकर गए थे (या उपहार दिया)। दोनों नेताओं के नाम (या उपनाम) के मेल से बने मेलोडी नाम की विशेषता छोड़ भी दें तो राष्ट्राध्यक्षों के बीच टॉफी का उपहार अपने आप में अनूठा है। नरेन्द्र मोदी नामुमकिन को मुमकिन करने वाले नेता रहे हैं और ट्रम्प की पत्नी को चांदी का ब्रेसलेट उपहार दे चुके हैं। इसलिए यह सब खबर हो या नहीं, पहले पन्ने पर होना नहीं है। दि एशियन एज के पहले पन्ने पर यह खबर जरूर है कि इटली दौरे के दौरान ‘मेलोडी’ के लिए मेलोनी ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। यह सब पहले पन्ने पर तब है जब दि एशियन एज ने सिंगल कॉलम में एक खबर छापी है जिसका शीर्षक है – मोदी, शाह को ‘गद्दार’ कहने के लिए भाजपा ने राहुल पर हमला बोला।

कहने की जरूरत नहीं है कि विपक्ष के नेता ने देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ‘गद्दार’ कहा है तो यह बड़ा मामला है और खबर यह नहीं है कि इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी ने विपक्ष पर हमला बोल दिया है। खबर ‘गद्दार’ कहना और उसका कारण ही है। सत्तारूढ़ दल ने हमला बोला यह मूल खबर पर प्रतिक्रिया या अगली खबर हो सकती है। मूल खबर पहले होनी चाहिए यह कल की बात होती और आज हमला बोलने की खबर होती तो उसकी प्रस्तुति ऐसी हो सकती थी। हेडलाइन मैनेजमेंट के इस अमृतकाल में पत्रकारिता के इन नियमों की परवाह कौन करता है। जहां तक सरकार के काम और प्रशासनिक नियंत्रण की बात है, मणिपुर तीन साल से जल रहा है और देश के पत्रकार नॉर्वे में प्रधानमंत्री से सवाल पूछने वाली महिला पत्रकार को पत्रकारिता के नियम सिखा रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी के आरोपों को देशबन्धु ने लीड बनाया है। शीर्षक है, मोदी-शाह ने देश को बेचने का काम किया। उपशीर्षक है, जनता को त्याग व बचत की सलाह, खुद विलासिता का जीवन जी रहे हैं। इसके साथ एक खबर है, देश मुश्किल में मोदी मेलोनी को टॉफियां खिला रहे हैं। इसके साथ की खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी भेंट की। मुझे लगता है कि सरकारी खबरों को ही प्राथमिकता देने की मजबूरी से अलग या आगे, देशबन्धु ने सरकार विरोधी खबर भी दी है। सरकारी खबर तो है ही। इसमें व्यापार करार का बहुत मतलब नहीं है जितना है उतनी खबर है। इटली से करार और व्यापार वाली खबर के मुकाबले तो जरूर। द टेलीग्राफ ने बंगाल सरकार से संबंधित अंतरराष्ट्रीय खबर को लीड बनाया है। इसके अनुसार, बंगाल सरकार 2025 के केंद्रीय निर्देश को लागू करेगी और बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों का पता लगाएगी। इन्हें वापस बांग्लादेश भेजने के लिए सीमा सुरक्षा बल को सौंपा जाएगा। देखना है यह काम कितनी गंभीरता से होता है और कितने लोग बांग्लादेश को सौंपने के लिए सीमा सुरक्षा बल को सौंपे जाते हैं। उनका क्या होता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर विज्ञापन है और पहला पन्ना खबरों का ही पन्ना लगता है। हालांकि विज्ञापन के बाद खाली जगह में खबरें भरी गई लगती हैं। लीड का शीर्षक आज के सभी अखबारों से अलग है। सरकार ने कहा – उत्तराखंड में गंगा पर कोई नई हाईडल परियोजना नहीं होगी। सरकार ने यह बात सुप्रीम कोर्ट में कही है। लेकिन आज अखबार में एक और पहला पन्ना है। दूसरे पहले पन्ने की लीड अन्य अखबारों की ही तरह इटली की ही है और संभव है पहले पन्ने की विशेष खबरें विज्ञापन के कारण हों, संपादकीय नीति के कारण नहीं। इस लिहाज से इटली की खबर यहां भी सामान्य गंभीरता के साथ ही है। शीर्षक और खबर विदेश नीति के मेलोडीकरण और चॉकलेटी प्रचार की है। इसमें मेलोडी चॉकलेट के साथ मोदी और मेलोनी की फोटो तो है ही, पार्ले के ब्रांड नाम के कारण पार्ले के शेयरों की बिक्री और कीमत बढ़ने की खबर भी है। हालांकि, दोनों पार्ले अलग कंपनियां हैं। जो भी हो, प्रधानमंत्री की तस्वीर का उपयोग विज्ञापन में होता रहा है भले उपयोग करने वालों को माफी मांगनी पड़ी हो। इस बार प्रधानमंत्री ने खुद प्रचार किया है और मेलोडी का जो प्रचार हुआ उसे रुपए या डॉलर में नहीं आंका जा सकता है। हालांकि, वह अलग कहानी है। दिल्ली के अखबारों में आज अकेले द हिन्दू ने इटली की खबर को लीड नहीं बनाया है। द हिन्दू की लीड जनगणना की खबर है और इटली की खबर सेकेंड लीड है। यहां भी विज्ञापन के कारण खबरें कम हैं लेकिन पहला पन्ना एक ही है। लीड के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जाति गणना में कुछ गलत नहीं है और इसके खिलाफ दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया गया। निश्चित रूप से यह भी बड़ी खबर है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


