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आज के अखबार : दिल्ली में सब चलता है, कलकत्ता में मेयर का इस्तीफा, बिहार के अस्पताल में आग से पांच मरे

शीर्षक के साथ मोदी-ट्रंप की तस्वीर: अमेरिका भारत पर दबाव बनाने के प्रयास के बारे में रिपोर्ट

संजय कुमार सिंह

सब डबल इंजन वाले राज्य हैं। बंगाल सबसे नया और सबसे ज्यादा खबरें वहीं से हैं। हालांकि, सब कोलकाता के द टेलीग्राफ में। दि एशियन एज और दि इंडियन एक्सप्रेस की सबसे बड़ी खबर वेनेजुएला (आबादी – 2.86 करोड़) की कार्यवाहक राष्ट्रपति की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री से चर्चा है। देशबन्धु में नीट रीएग्जाम के पेपर लीक होने की खबर है तो इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि पेपर लीक के मामले में ज्यादातर आरोपी बच जाते हैं। दैनिक भास्कर ने गोल्ड किंग, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर सेबी के शिकंजे की खबर छापी है। खबर है कि कंपनी की 15 लाख करोड़ की कमाई संदिग्ध है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर दिल्ली के एक होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद लाइसेंस के नवीकरण का आवेदन किए जाने की है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने होटल मालिक के हवाले से लिखा है, कहा गया था दिल्ली में सब चलता है। नवोदय टाइम्स की लीड है – लवकेश गिरफ्तार, एक्शन में एजेंसियां। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, लवकेश उस बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल के मालिक हैं जिसमें आग लगने से 12 विदेशियों समेत 21 लोगों की मौत हो गई। बजाज ने इस बिल्डिंग को तीन साल पहले खरीदा था और बेचने वाले ने उनसे कहा था कि परिवर्तन आम है तथा दिल्ली में सब चलता है। संभव है दिल्ली में आग और मौत का कारण नियमों का पालन नहीं करना हो तथा इसके पीछे रिश्वत खोरी और खर्च बचाना हो। लेकिन बिहार के निजी अस्पताल में भी संभवतः यही हुआ है। द हिन्दू की लीड के अनुसार, मुजफ्फरपुर के अस्पताल में आग लगने से पांच लोगों की मौत हुई है। कई घायल हैं। यहां नियमों का पालन हुआ हो या नहीं, कारण जो हो डबल इंजन की सरकार है। आप जानते हैं कि देश में गंगोत्री से गंगा सागर तक भाजपा की सरकार है। राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी डबल इंजन की सरकार बनाने की बात करते हैं। हालांकि, बंगाल का मामला अलग रहा। सच्चाई यह है कि आज की इन खबरों से डबल इंजन वाले राज्यों में भिन्न किस्म की लापरवाही और भ्रष्टाचार का पता चलता है। 

दूसरी ओर, भारत-वेनेजुएला के बीच दीर्घ अवधि के ऊर्जा करार के लिए वार्ता चल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आए थे और मई में ही कहा था कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत तेल बिक्री पर चर्चा के लिए आएंगी। इससे यात्रा को “ऑयल टॉक्स” के रूप में काफी प्रचार मिला। खबरों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाना चाहता है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम रहे। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति जोखिमों के कारण वैकल्पिक स्रोतों की तलाश जरूरी हो गई है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल भारत की कुछ बड़ी रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त और आर्थिक रूप से लाभकारी माना जाता है। ऐसे में यह स्पष्ट हो चला है कि भारत का तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था से पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है। फरवरी 2026 में अमेरिकी प्रशासन ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर लगे कई प्रतिबंधों में ढील दी और लाइसेंस जारी किए। इसके बाद भारतीय कंपनियों के लिए तेल खरीदना फिर संभव हुआ है। इससे पहले, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने वेनेजुएला से आयात कम किया था। 2026 में आयात बढ़ना तब संभव हुआ जब अमेरिकी नीति में कुछ नरमी आई। वैसे यह भी संभव है कि भारत अमेरिकी प्रतिबंधों, बाजार कीमतों, उपलब्धता और अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहा है। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने तो कहा ही है कि तेल खरीद के फैसले “व्यावसायिक व्यवहार्यता” और “ऊर्जा सुरक्षा” के आधार पर किए जाते हैं। इसमें प्रधानमंत्री के दौरे और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति का भारत आना महत्वपूर्ण है। देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई है। हालत यह है कि भारत अब अपनी मर्जी से रूस या ईरान जैसे देशों से तेल नहीं खरीद सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि कृषि क्षेत्र पर भी बड़ी चोट की गई है। अमेरिकी कपास, सोयाबीन, मक्का, फल, अखरोट व बादाम आदि के लिए भारत का बाजार खोल दिया गया है।

एक दिन पहले खबर थी – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी सरकार की व्यवस्था पर पकड़ कमजोर पड़ रही है। उनके अनुसार नरेंद्र मोदी अगले एक साल तक प्रधानमंत्री पद पर नहीं रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि देश गंभीर आर्थिक चुनौतियों की ओर बढ़ रहा है, जबकि संस्थाओं के भीतर भी असंतोष बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमर उजाला में यह खबर इतनी प्रमुखता से नहीं थी। सरकार के खिलाफ खुद, ढूंढ़ कर खबरें देना तो दूर, विपक्ष के नेता के बयान को भी दबा देने या पी जाने वाले अखबारों में से एक, अमर उजाला ने आज पहले पन्ने पर यह खबर छापी है। इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रचार तो है ही उसे मेहनत का नतीजा कहा गया है। सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के कहे, …. लेकिन सभी जानते हैं मोदी पर दबाव बनाना नामुमकिन है को शीर्षक बनाया है। निश्चित रूप से यह प्रधानमंत्री की तारीफ का गैरजरूरी प्रचार है और विपक्ष के नेताओं का भी इसी तरह प्रचार किया जा रहा होता तो सामान्य था लेकिन प्रधानमंत्री को राहुल गांधी ने कंप्रोमाइज्ड कहा है, एप्सटीन फाइलों का मामला है ही और उसमें बुरी तरह उलझे हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं लिया गया है। बंगाल चुनाव और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस का हाल भी शिवसेना जैसा करने की कोशिशों की खबर तो नहीं ही छपी है। अगर यह सरकारी विज्ञापनों के लिए किया जा रहा है तो भ्रष्टाचार है और निष्पक्ष पत्रकारिता तो नहीं ही है। यह सब तब किया जा रहा है जब मोदी शासन में सब ठीक नहीं है।

आज छपी एक्सप्रेस इंवेस्टीगेशन रिपोर्ट के अनुसार, 2002 से 2025 के बीच एक लाख प्रत्येक से ज्यादा उम्मीदवार वाली परीक्षाओं में पेपर लीक के 45 मामले हुए हैं और इनमें सिर्फ दो मामलों में सजा हुई है। यह 2002 से 2025 तक के बीच की कहानी है। शिक्षा और रोजगार की इन परीक्षाओं में 3.86 करोड़ उम्मीदवार थे। गिरफ्तारी 1658 लोगों की हुई, 925 लोगों के खिलाफ चार्जशीट हुई। दो मामलों में 18 लोगों को सजा हुई। 43 लोग न्यायिक हिरासत में है। आज का दूसरा मामला 15 लाख करोड़ की संदिग्ध कमाई से शेयरधारकों को लूटने का है और इसमें भी लुटने वाला शेयरधारक एलआईसी है। सेबी ने इस मामले को समय से पकड़ा या देरी हो चुकी है इस संबंध में कोई भी राय बनाने से पहले पूर्व सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच के काम, कार्यकाल और कारनामों को याद करना चाहिए। इनमें एक संसदीय समिति के तहत उपस्थिति नहीं होना भी है। इसके लिए उनके उनके खिलाफ किसी कार्रवाई की खबर नहीं है और कार्रवाई तो कई अन्य मामलों में नहीं हुई। उस समय उनका मकसद सरकारी सेठ को बचाना था और संभवतः बचा ले गईं क्योंकि वहां 20,000 करोड़ के कथित निवेश का मामला निपट नहीं रहा था। अब राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड का यह मामला क्या और कैसा है, शायद कुछ दिनों में समझ में आए। संभव है नहीं भी पता चला और मामला ठंडे बस्ते में चला जाए। भास्कर एक्सप्लेनर के अनुसार, शेयरधारक की शिकायत पर दो साल जांच के बाद परतें खुलीं हैं। सेबी हैरान है कि कंपनी ने 5 साल में 15.45 लाख करोड़ का राजस्व दिखाया। इसके बावजूद शेयर बाजार में कंपनी की वैल्यू हमेशाा बहुत कम रही। आर्थिक स्थिति और आर्थिक भ्रष्टाचार को अगर छोड़ भी दिया जाए तो परीक्षा की हालत पर भी लिखा जाना जरूरी है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अलावा आज देशबन्धु की लीड चिन्ताजनक है। शीर्षक है, नीट री-एग्जाम पेपर लीक के दावे से हड़कंप। उपशीर्शक है, टेलीग्राम ग्रुप पर पेपर लीक दावे की जांच साइबर क्राइम विभाग को सौंपी गई। खबर के अनुसार, एडवांस में 35,000 रुपए की मांग की गई है। एनटीए ने इस मामले में तुरंत एक्शन लिया है लेकिन ऐसा हो कैसे सकता है। व्यवस्था कहां है? जो कर रहा है उसे डर नहीं है। संभव है नहीं हो। जब लोगों के पास काम नहीं होगा, खाने के पैसे नहीं होंगे तो जेल जाने से कौन डरेगा? जो जेल जाने से नहीं डरेगा वह कुछ भी कर सकता है और मुझे लगता है बेरोजगारी के कारण यह स्थिति आ गई है। हालांकि, भ्रष्टाचार, कमाई और कमीशन की स्थिति भी बहुत बुरी है। कमीशन ले-देकर कुछ भी काम होता हो तो यह भी निकल जाएगा। एक बार जब हमारे सिस्टम ने प्रश्नपत्र लीक होना स्वीकार करके परीक्षा रद्द नहीं की है तो हर बार यह कोशिश हो सकती है। इस बार परीक्षा रद्द हो गई लेकनि एनटीए ने लीक होना स्वीकार नहीं किया है। कुछ लोगों को प्रश्नपत्र बेचने से सबका भला हो सकता है। पता नहीं वास्तविकता क्या है लेकिन जो भी हो, स्थिति शर्मनाक है। जोगेंद्र सोलंकी की बाईलाइन वाली खबर इस प्रकार है, नीट पेपर लीक का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि एक बार फिर नीट एग्जाम के कथित पेपर लीक के दावे ने खलबली मचा दी है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि 21 जून 2026 को होने वाले नीट री-एग्जाम का पेपर भी आ गया है। एक तरफ सीबीआई 3 मई 2026 को हुए नीट पेपर लीक मामले की जांच में जुटी हुई है। पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पूरी नीट परीक्षा रद्द करने के बाद बाद, 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित की जानी है। हालांकि, एनटीए ने नहीं माना है कि पेपर लीक हुआ है। फिर भी, नीट पेपर लीक के कथित दावे ने परीक्षा की शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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