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आज के अखबार : प्रधानमंत्री ने कांग्रेसी CM बदलने का कारण जनआक्रोश बताया, अपने प्रधान पर चुप्पी साधे हैं

Close-up portrait of a senior man in a blue checked suit, on a newspaper page accompanying a political leadership article.

संजय कुमार सिंह

आज अच्छी और गंभीर खबरों को छोड़कर जीडीपी बढ़ने का प्रचार तथा विदेशी निवेश के प्रयास लीड हैं। हालांकि, कर्नाटक में कांग्रेसी मुख्यमंत्री बदलने का कारण जनआक्रोश बताया तो वह पहले पन्ने पर है लेकिन अपने प्रिय और प्रधान शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र के इस्तीफे की मांग पर चुप हैं। कॉक्रोच जनता पार्टी के आज के आंदोलन पर भी अखबारों में पहले पन्ने पर किसी तरह की कोई खबर नहीं है। यह भी नहीं अनुमति नहीं ली-दी गई है और रैली नहीं होने दी जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने सूरत में कहा, जनता के गुस्से की वजह से कांग्रेस को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदलना पड़ा। प्रधानमंत्री ने सूरत में 18,800 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है – इस मौके पर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की बात की और हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे पहले पन्ने पर छाप दिया। यह सब तब हो रहा है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री से जनता की नाराजगी की खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। आज उस पर अपनी तरह के पहले आयोजन की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दूसरी ओर, कर्नाटक के एक मंत्री ने पंसदीदा मंत्रालय नहीं मिलने से इस्तीफा दे दिया तो वह भी पहले पन्ने पर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के इस्तीफे की खबर भी पहले पन्ने पर है। हालांकि इसे पूर्व अध्यक्ष का प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा कहा गया है। इस तरह भाजपा का मामला सिंगल कॉलम में और कांग्रेस के आंतरिक मामले पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी (जो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के प्राथमिक सदस्यता छोड़ने जैसी खबर नहीं है) पहले पन्ने पर है। बेशक इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल का प्रचार तो है ही। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल की गैर जरूरी आलोचना है। अमृतकाल में मीडिया के लिए यह आम है और इसीलिए उल्लेखनीय है। हिन्दुस्तान टाइम्स में आज ही खबर है कि सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन का काम कोएम्प्ट से नहीं कराने का निर्णय लिया है जबकि इसी को ठेका देने में पक्षपात और गड़बड़ी की चर्चा है। इसी के विरोध में आंदोलन हो रहा है, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा है और प्रधानमंत्री इस समान्य व जायज मांग की पूर्ति नहीं कर रहे हैं। उसकी खबर पहले पन्ने पर नहीं है। उसपर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं सो अलग।

देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, विवादों में सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली। कांग्रेस ने सीबीएसई ओएसएम टेंडर मामले में गड़बड़ी का आरोप लगाया। ऐसे में हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है, “…. दक्षिणी राज्य में उसके (कांग्रेस के) “कुशासन” को लेकर जनता में गुस्सा था। बिखरती हुई कांग्रेस की राजनीति,जो खुद पैदा की गई अराजकता में मौका ढूंढती है, वह काम नहीं करेगी। कर्नाटक में भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा है। और इसीलिए कांग्रेस ने सीएम को बदल दिया।” भाजपा के तमिलनाडु अध्यक्ष के इस्तीफे की खबर ऐसे है, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कहा, भाजपा अध्यक्ष (नितिन नवीन) ने तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई का प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा केंद्रीय अध्यक्ष द्वारा स्वीकार किया जाना गौरतलब है और निश्चित रूप से हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए किया गया शब्दों का खेल है। सरकार के प्रचार और बचाव की ऐसी कोशिशों में जब अर्थव्यवस्था की हालत खराब है, बढ़ती महंगाई, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है, पेट्रोल-डीजल ईंधन की बढ़ती कीमत पर सवाल हैं, डेड इकनोमी का आरोप है, अमेरिका से ‘बेच देने’ वाले करार की तैयारी जैसी खबरें हैं तो जीडीपी बढ़ने की खबर को महत्व देने का मकसद समझना मुश्किल नहीं है। हालांकि आज ही विदेशी पूंजी आकर्षित करने के भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों का भी प्रचार है। यह हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया और दि इंडियन एक्सप्रेस में भी लीड है।

सरकार के प्रचार में ट्रम्प का बयान दि एशियन एज में लीड है। इसके अनुसार – “ट्रम्प ने कहा, मोदी अच्छे मित्र हैं; भारत अमेरिका व्यापार करार जल्दी ही होगा”। अमर उजाला में ट्रम्प के बिगड़े बोल भी हैं। नवोदय टाइम्स, दैनिक भास्कर के साथ अंग्रेजी अखबारों में द हिन्दू की लीड जीडीपी बढ़ने के ‘अनुमान’ की खबर है जबकि अमर उजाला ने लीड के शीर्षक में लिखा है, ‘बढ़ी’ और दैनिक भास्कर ने ‘उम्मीद से बेहतर’ कहा है और यह लीड है। मणिपुर में तीन साल से चल रही हिन्सा रुकी नहीं है। नये सिरे से भड़की हिन्सा में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है। द टेलीग्राफ ने आज इसे सेकेंड लीड बनाया है। चेन्नई से दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव खबर ज्यादा जरूरी और पठनीय है। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है – सुप्रीम कोर्ट के फैसले में देरी पर मद्रास हाई कोर्ट ने उठाया सवाल। खबर है, मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि चुनाव याचिकाओं के निपटारे में देरी लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है और देश को तानाशाही की राह पर ले जा सकती है। जस्टिस जी जयचंद्रन ने 2016 के राधापुरम विधान सभा चुनाव विवाद पर फैसला सुनाते हुए कहा, जनप्रतिनिधित्व एक्ट, 1951 की धारा 86(7) के तहत चुनाव याचिकाओं का निपटारा छह महीने में होना चाहिए। यदि अदालतें मोहम्मद अकबर मामले में सुप्रीम कोर्ट की अपनी ही टिप्पणियों का पालन नहीं करेंगी, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। खबर में यह भी कहा गया है, हाईकोर्ट के पुनर्गणना आदेश को चुनौती देकर इनबादुरई 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। शीर्ष अदालत ने पुनर्गणना जारी रहने दी, लेकिन परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी। 21 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और फैसला सुनाने से अंतरिम रोक हटा दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। हिन्दी पट्टी में ऐसे मामलों का क्या होता रहा है, बताने की जरूरत नहीं है। कुछेक का जिक्र मेरी किताब, ईवीएम वाशिंग मशीन में धुली में है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में हाईकोर्ट ने ऐसा कहा है तो तथ्य है कि तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी की दाल नहीं गली। इस बार फिल्म अभिनेता थलपति विजय मुख्यमंत्री बने हैं और भाजपा को 234 में से केवल 1 सीट पर जीत हासिल हुई है। यह ऊधगमंडलम (ऊटी) विधानसभा क्षेत्र में है। दि एशियन एज में आज ही छपी सिंगल कॉलम की खबर के अनुसार, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष ने के अन्नामलाई ने इस्तीफा दे दिया है। चुनाव से पहले थलपति विजय को दबाव और प्रभाव में लेने की भाजपा की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं सो अलग। विजय के कार्यक्रम में भगदड़ और उसकी कथित जांच की खबरें दिल्ली में छपती रहीं लेकिन तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के इस्तीफे की खबर दिल्ली में पहले पन्ने पर नहीं दिखी। चुनावी मामले में हाईकोर्ट के इस आदेश की खबर भी नहीं ही है। दूसरी ओर, हिन्दी अखबारों में जीडीपी बढ़ने का भाजपाई प्रचार है तो उसका असर हम चुनाव नतीजों के रूप में देखते हैं। गैर हिन्दी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के बाद भाजपा का अगला प्रयास तमिलनाडु में हो सकता है पर वह बाद की बात है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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