भारत का युवा कैसे आगे बढ़ेगा – वैसे ही जैसे भाजपा अध्यक्ष बताएंगे। क्योंकि युवा जानता है कि उन्हें कब, किसने कैसे अध्यक्ष चुना है।
संजय कुमार सिंह
आज जब कॉक्रोच जनता पार्टी के धरना – प्रदर्शन की खबर कई अखबारों में लीड है तब अमर उजाला के पहले पन्ने की एक खबर का शीर्षक है, नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के पेपर लीक के दावे फर्जी : एनटीए। खबर के अनुसार एनटीए ने कहा है, परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित, विद्यार्थी करें तैयारी। ऐसी ही एक खबर नवोदय टाइम्स में भी पहले पन्ने पर है। इसका शीर्षक है, नीट री-एग्जाम के पेपर लीक होने की अफवाहों पर ध्यान न दें : एनटीए। इस खबर में ऐसा कुछ नहीं है कि इस पर यकीन किया जाए। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एनटीए की नाक बचाने की कोशिश हो सकती है और इस मामले में सरकार के विरोध के कारण सरकार एनटीए के जरिए ऐसा करवा रही हो। सबको पता है कि सरकार सिर्फ खबरों की राजनीति करती रही है। ऐसे में इस खबर या इसमें किए गए दावों का कोई मतलब नहीं है। पर्चे जब पहले भी लीक हो चुके हैं तो इस बार नहीं होंगे कहने के लिए कोई ठोस आधार चाहिए। ऐसा कुछ बताए बिना एनटीए का दावा खबर तो है लेकिन पहले पन्ने की क्यों? फिर भी पहले पन्ने पर है तो आज मैं इसी की चर्चा करूंगा। खासकर तब जब देश भर में शिक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्री और सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, लगातार तीन परीक्षाओं में गड़बड़ी की खबरें आई हैं, नीट के पर्चे 2024 के बाद 2026 में फिर लीक हुए हैं, सरकार ने भारी दबाव में भी शिक्षा मंत्री को नहीं हटाया है और सीबीएसई की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ियों के लिए अध्यक्ष व सचिव का तबादला कर दिया है। ऐसे में माना जा सकता है कि सरकार सिर्फ सीबीएसई की गड़बड़ियों को स्वीकार कर रही है। नीट की पुनर्परीक्षा हो रही है लेकिन एनटीए ने लीक स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। पुनर्परीक्षा 21 जून को होनी है और उसके भी पर्चे लीक होने की खबर है। देशबन्धु के 5 जून अंक में इस संबंध में खबर छप चुकी है। लीड खबर के अनुसार, टेलीग्राम ग्रुप पर पेपर लीक दावे की जांच साइबर क्राइम विभाग को सौंपी गई। बताया गया था कि प्रश्न पत्र के लिए 35,000 रुपए एडवांस मांगे गए थे और एनटीए ने तुरंत एक्शन लिया। इसके बाद आज की खबर में कुछ नया नहीं है। फिर भी पहले पन्ने पर है।
नवोदय टाइम्स की खबर में लिखा है, एनटीए सक्रिय तरीके से आपत्तिजनक चैनलों, अकाउंट्स और कंटेट की पहचान कर संबंधित प्लेटफार्मों और साइबर अपराध अधिकारियों को इसकी खबर दे रहा है ताकि उन्हें तुरंत हटाया जा सके और एक्शन लिया जा सके। एनटीए, कानून प्रवर्तन और साइबर अपराध अधिकारियों के सामने औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा रहा है। एनटीए के दावे और नवोदय टाइम्स की पहले पन्ने की इस ‘खबर’ के साथ तथ्य यह है कि, सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी औपचारिक नोटिस जारी करे तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कई मामलों में 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी पड़ सकती है। इस नियम के आलोक में कई पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और सामान्य उपयोगकर्ताओं ने अलग-अलग समय पर दावा किया है कि उनकी पोस्ट कुछ ही घंटों में भारत में ब्लॉक हो गई। एनटीए के दावे में ऐसा कुछ नहीं है और वह देश के किसी आम निरीह नागरिक की तरह अपने प्रयास बता रहा है और जाहिर है परीक्षा की पवित्रता के प्रति अगंभीर है। सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने के कुछ मामलों में अकाउंट को चेतावनी मिली या सामग्री बिना विस्तृत कारण बताए हटाई गई। कई उपयोगकर्ताओं ने यह भी कहा है कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि शिकायत किसने की या आदेश किस आधार पर जारी हुआ। Reddit और अन्य मंचों पर 2021 के नियमों और 2026 के तीन घंटे वाले संशोधन को लेकर लोगों ने कहा है कि इससे प्लेटफॉर्म के लिए “पहले हटाओ, बाद में जांच करो” की नीति अपनाना जरूरी हो जाएगा क्योंकि आदेश न मानने पर उनकी कानूनी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में एनटीए के दावे या इस खबर को आप कितना महत्व देंगे तय कर लीजिए। मुझे तो यह एनटीए का प्रचार लगता है। संभव है, एनटीए को तुरंत एक्शन लेने वाली एजेंसी के रूप में प्रचारित करने की कोशिश हो। हालांकि यह काम खबर को अंदर रखकर भी किया जा सकता था।
आज देशबन्धु, दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस में कॉक्रोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन की खबर लीड है। लेकिन नवोदय टाइम्स और अमर उजाला में यह खबर लीड नहीं है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर है लेकिन नवोदय टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। कोलकाता के द टेलीग्राफ में लीड तो बंगाल की नई बनी सरकार की खबर है लेकिन उसके बराबर में चार कॉलम के शीर्षक के साथ छपी खबर भले एक कॉलम की है लेकिन कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की फोटो तीन कॉलम में है। अंग्रेजी अखबार, हिन्दुस्तान टाइम्स में दोनों खबरें, कॉक्रोचों का विरोध प्रदर्शन और एनटीए का प्रचार पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू में यह खबर लीड नहीं है लेकिन तीन कॉलम की फोटो के साथ तीन कॉलम की खबर और शीर्षक है, (धर्मेंद्र) प्रधान का इस्तीफा मांगने के लिए सीजेपी के प्रदर्शन में सैकड़ों एकत्र हुए। दि एशियन एज में भी विरोध प्रदर्शन की खबर सिंगल कॉलम में है लेकिन टॉप पर तीन कॉलम की फोटो के साथ। एनटीए का प्रचार यहां भी नहीं है। कुल मिलाकर मेरे 10 में से आठ अखबारों में एनटीए का प्रचार पहले पन्ने पर नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स और नवोदय टाइम्स को छोड़कर 10 में से आठ अखबारों में कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की खबर पहले पन्ने पर है। नवोदय टाइम्स में सरकार या सीबीएसई के प्रचार की भी एक खबर है। जब मुद्दा यह है कि सीबीएसई की कॉपी जांचने का काम कोएम्प्ट को कैसे दिया गया, किसकी कंपनी है – तब सीबीएसई ने यह निर्णय किया है कि डेटा को कंपनी के सर्वर पर नहीं रखकर सीबीएसई अपने पोर्टल पर रखेगी। जाहिर है, पहले का निर्णय गलत था। इसके लिए कार्रवाई की जानी चाहिए। गलती ऐसी है कि निचले स्तर पर हो ही नहीं सकती है और जांच या कार्रवाई के लिए जरूरी है कि सबसे ऊपर वाले को हटाया जाए तभी निष्पक्ष और ईमानदार जांच हो सकेगी। वह तो नहीं हो रहा है लेकिन प्रचार के लिए छोटे मोटे काम किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई पिछले कोई दो सप्ताह से नीट-यूजी पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) विवाद तथा अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी आंदोलन चला रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खिलाफ इन संगठनों की प्रमुख मांग उनका इस्तीफा और परीक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र जांच है। इसके लिए विभिन्न राज्यों में धरने, मशाल जुलूस, शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। 1 जून को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुए प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था, जबकि कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। कल (6 जून) आंदोलन का प्रमुख कार्यक्रम कर्नाटक के चित्रदुर्ग में आयोजित हुआ, जहां एनएसयूआई के नेतृत्व में बड़ी छात्र रैली निकाली गई। रैली में हजारों छात्रों ने भाग लिया और आरोप लगाया कि परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने तथा निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। कांग्रेस का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा व्यापक अभियान है। एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के अनुसार पिछले एक महीने में देशभर में 50 से अधिक विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं और आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली के अखबारों में ये खबरें पहले पन्ने पर नहीं के बराबर छपी होंगी।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


