संजय कुमार सिंह –
उत्तर प्रदेश में चुनाव है। सत्तारूढ़ दल का हेडलाइन मैनेजमेंट चलता रहता है। आज अमर उजाला के पहले पन्ने पर ऐसी कई खबरें नहीं हैं, जो दूसरे अखबारों में लीड है। इसके अलावा, आप जानते हैं कि अमर उजाला और नवोदय टाइम्स ने कल एनटीए का बयान छापा था जो री-एग्जाम के पर्चे लीक होने की खबरों पर ध्यान नहीं देने के लिए था और ऐसा था जैसे वह लीक रोकने के लिए बहुत चिन्तित और परेशान है। आज दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर एनटीए से किए गए संसदीय समिति के सवालों से संबंधित चार कॉलम एक खबर है। अमर उजाला में पहले पन्ने पर यह खबर नहीं है। खबर के अनुसार एनटीए से तीखे सवाल किए गए। शीर्षक है, ओएसएम का ठेका जिस कंपनी को दिया गया उसकी पृष्ठभूमि की जांच की गई थी या नहीं। और भी कई सवाल हैं लेकिन इनका उल्लेख अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं है। यह खबर नवोदय टाइम्स में भी है। यहां इसका शीर्षक है, एनटीए बताए पेपर लीक की परिभाषा। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, घरेलू गैस सिलेंडर 29 रुपए महंगा हुआ। तीन महीने में दूसरी बार बढ़ाए गए घरेलू एलपीजी के दाम। इसके साथ छपी एक खबर का शीर्षक है, “जनता को लूट रही है सरकार : खरगे”। यह भी अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड के अनुसार नीट के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले अज्ञात स्थान पर ले जाए गए हैं और 21 जून को परीक्षा होने तक उन्हें अलग-थलग रखने के सख्त प्रोटोकोल का पालन किया जाएगा। हाल के समय में परीक्षा की सुरक्षा के लिए किया गया यह सबसे सख्त उपाय है। निश्चित रूप से एनटीए के कल छपे बयान के मुकाबले बड़ी खबर है लेकिन अमर उजाला में यह भी पहले पन्ने पर नहीं है।
हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड बांबे हाईकोर्ट के एक रिटायर जज को परेशान किए जाने की खबर है। खबर के अनुसार उनके फैसले के कारण ब्रिटेन में रहने वाले उनके परिवार को धमकी दी गई है। निश्चित रूप से यह अपनी तरह का अनूठा मामला है। यह भी अमर उजाला में पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू में कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के हवाले से खबर है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक उनका विरोध जारी रहेगा। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार भाजपा सीजेपी को विदेशी साजिश के रूप में देखती है जो शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खिलाफ डटी हुई है। छह जून को दिल्ली में प्रदर्शन और इसके लिए आश्चर्यजनक रूप से सरकारी अनुमति मिल जाने के बाद से पार्टी और उसके आंदोलन को लेकर तरह-तरह अटकलें हैं। इनमें एक फॉलो अप यह भी हो सकता था कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से बात की जाती, उनका पक्ष पाठकों को बताया जाता। आरोपों और अटकलों पर दीपके का पक्ष जानने की भी उत्सुकता आम पाठकों में होगी। इसीलिए द हिन्दू में आज यह खबर लीड के बराबर, तीन कॉलम में है। लीड नेपाल के साथ सीमा विवाद पर नेपाल के वित्त मंत्री का पक्ष है।
दि एशियन एज की लीड आज इंडिया समूह की बैठक से संबंधित है। खबर के अनुसार, 23 विपक्षी नेताओं ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है। द टेलीग्राफ के अनुसार ममता बनर्जी इसमें शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गई हैं, जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने प्रमुखता से बताया है कि जेडी (यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि इंडिया ब्लॉक के गठजोड़ को दो लोगों ने बर्बाद किया था और ये हैं ममता बनर्जी तथा अरविन्द केजरीवाल। इंडियन एक्सप्रेस की लीड एलपीजी की कीमत बढ़ने की खबर है जबकि अमेरिकी धारा 301 से निपट लेने के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के दावे को भी प्रमुखता से छापा गया है। जाहिर है, सरकार का प्रचार है तो उसके खिलाफ खबर भी है। लेकिन अमर उजाला में सरकार के खिलाफ कुछ नहीं है। लीड नेपाल से सीमा विवाद पर वहां के वित्त मंत्री का बयान है तो उड़ीशा में इंजीनियर की काली कमाई का पता चलने की सरकारी खबर के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर की हत्या का मामला सुलझा लिए जाने का प्रचार है। बैंक धोखाधड़ी में सीबीआई के छापे जैसा प्रचार भी है। यही नहीं, पहले पन्ने पर चौथाई पेज का एक विज्ञापन है फिर भी आज दो पहले पन्ने हैं। भगवा रंग में प्रधानमंत्री आवास का सरकारी विज्ञापन इस दूसरे पहले पन्ने पर है जो कई अन्य अखबारों में पहले पन्ने पर है। ये अखबार है – नवोदय टाइम्स, दैनिक भास्कर, दि एशियन एज, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स। आज मेरे जिन अखबारों में यह सरकारी विज्ञापन नहीं है वे हैं – देशबन्धु, द हिन्दू और द टेलीग्राफ। अकेले अमर उजाला ने इस सरकारी विज्ञापन को पहले पन्ने पर नहीं छापा है।
दि एशियन एज में आज उत्तराखंड की एक खबर है और अमर उजाला में यह भी पहले पन्ने पर हो सकती थी क्योंकि यह अखबार इन क्षेत्रों में ज्यादा पढ़ा जाता है। लेकिन अखबार ने अपनी महान पत्रकारिता (या सरकार से डर) का प्रदर्शन करते हुए एलपीजी के दाम बढ़ने की खबर तो नहीं छापी है भारत में कीमत वैश्विक बाजार के मुकाबले कम होने का सरकारी दावा दूसरे पहले पन्ने पर लीड का शीर्षक है। आप जानते हैं कि पहले डॉलर की कीमत गिरती थी तो केंद्र की सरकार जिम्मेदार होती थी और नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री होने के नाते इसे जानने का दावा भी करते थे लेकिन अब डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गिरती है तो तरह-तरह की कहानियां सुनाई जाती हैं। कुछेक अपवाद को छोड़कर ज्यादातर अखबारों में ऐसे ही प्रचार होते हैं। एलपीजी पर सरकार तब भी सबसिडी देती थी पर तब कीमत बढ़ने पर भाजपा जो विरोध करती थी उसे याद कीजिए और अब अमर उजाला की खबर है (सरकार असल में पेट्रोलियम मंत्रालय ने दावा किया है) कि सबसिडी का बोझ बढ़ गया है। अब भी कंपनियों को प्रति सिलेंडर 700 रुपए का घाटा है। यह दावा या रोना उस सरकार के राज में किया जा रहा है जो हर महीने बताती है कि जीएसटी कलेक्शन कितना बढ़ गया है और इसके जरिए यह दावा भी किया जाता है कि सब चंगा सी और तभी तो इतना कलेक्शन हो रहा है। इस मामले में सच्चाई जो है सो बताने की जरूरत नहीं है। दि एशियन एज की खबर के अनुसार उत्तराखंड में भाजपा एंटी इनकमबेंसी और आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


