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लोग शक कर रहे हैं कि इंडियन एक्सप्रेस में छपा यह लेख नीतीश कुमार ने ही लिखा है!

नीतीश कुमार शुद्ध हिंदी नहीं लिख पाते तो फिर अंग्रेजी में इतना लंबा लेख कैसे लिख डाला?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम से इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख चर्चा में है। “Modi milestone is affirmation of strength and openness of Indian democracy” शीर्षक से प्रकाशित इस लेख में नीतीश कुमार ने मोदी सरकार के नेतृत्व, लोकतांत्रिक स्वीकार्यता और बिहार के विकास में केंद्र की भूमिका की खुलकर सराहना की है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि नीतीश कुमार शुद्ध हिंदी नहीं लिख पाते तो फिर अंग्रेजी में इतना लंबा लेख कैसे लिख डाला? बहरहाल, आप पहले लेख और लेख का निचोड़ समझ लीजिए बाद में इस लेख को लेकर कुछ मजेदार कमेंट्स भी पढ़िए…

नीतीश कुमार के इस लेख के जरिए पीएम मोदी को खूब रिझाने और खुश करने की कोशिश की गई है।

लेख की शुरुआत इस बात से होती है कि भारत जैसे विशाल और प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में जनता का भरोसा जीतना और उसे लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं है। नीतीश कुमार लिखते हैं कि लगातार राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक जांच-परख के बावजूद नरेंद्र मोदी जनता का विश्वास बनाए रखने में सफल रहे हैं। भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति में नया मानदंड स्थापित किया है।

नीतीश कुमार ने लिखा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंच कुछ विशेष वर्गों तक सीमित रही, लेकिन नरेंद्र मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर प्रधानमंत्री बनना लोकतंत्र की खुली और समावेशी प्रकृति का प्रमाण है। उन्होंने इसे उन लोगों के लिए प्रेरणा बताया जो सीमित संसाधनों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ना चाहते हैं।

लेख में दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण, बैंक खाते, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंचा।

नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्गों के साथ-साथ महिलाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास सामाजिक न्याय को नई दिशा देता है।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई योजनाओं ने उनके जीवन को आसान बनाया और बिहार में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला।

लेख का बड़ा हिस्सा बिहार को मिले केंद्रीय सहयोग पर केंद्रित है। नीतीश कुमार ने दावा किया कि मोदी सरकार के दौरान बिहार में सड़क, पुल, रेलवे और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिली।

उन्होंने विशेष रूप से इन परियोजनाओं का उल्लेख किया—

  • गंगा नदी पर महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण,
  • राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार,
  • ग्रामीण सड़कों का विकास,
  • रेलवे के आधुनिकीकरण,
  • वंदे भारत जैसी नई ट्रेनों की शुरुआत,
  • भागलपुर में मखाना बोर्ड के गठन को समर्थन,
  • बाढ़ प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी की छवि का जिक्र

आखिर में क्या कहा?

अपने लेख के अंत में नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को उनके 12 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबे सार्वजनिक जीवन की कामना की। उन्होंने लिखा कि नेतृत्व के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और जनता से संवाद जरूरी है और मोदी ने इन गुणों का प्रदर्शन किया है।

लेख का राजनीतिक निचोड़

इस पूरे लेख का राजनीतिक संदेश साफ दिखाई देता है। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले नीतीश कुमार ने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की, बल्कि बिहार के विकास में केंद्र सरकार के योगदान को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। इसे एनडीए के भीतर राजनीतिक एकजुटता और भाजपा-जेडीयू रिश्तों को मजबूत करने वाले संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।


रवीश कुमार-

ऐसा दौर आ गया है कि लोग शक कर रहे हैं कि यह लेख नीतीश कुमार ने ही लिखा है?

मैं इस विवाद में जाना ही नहीं चाहता कि खुद लिख रहे हैं या कोई और लिख रहा है, मैं तो चाहता हूँ कि नीतीश कुमार लिखते रहे, उनके नाम से कुछ न कुछ छपता रहे। एक्सप्रेस की टीम को बधाई। एक्सप्रेस ने छापा है तो यकीन करूंगा कि यह लेख नीतीश कुमार ने लिखा है।

मेरे इस विश्वास को खुद एक्सप्रेस भी नहीं हिला सकता है। नीतीश कुमार दो साल से मीडिया के सामने नहीं आए हैं। प्रेस से बात नहीं कर रहे हैं। अच्छा लगा कि एक्सप्रेस के लिए लिख रहे हैं। उनका चिंतन पक्ष और लेखक कर्म सक्रिय बना रहे।

Newspaper opinion page with a bold headline about a milestone in Indian democracy and a colorful circular illustration.

क्या नीतीश कुमार हिंदी भी ठीक ठीक लिख पाने की हालत में हैं? फिर इंडियन एक्सप्रेस ने उनके नाम से अंग्रेजी में लेख छाप दिया। यह सब फ्रॉड संजय झा मोदी कैबिनेट में जगह पाने के लिए कर रहे हैं।
जदयू नेता संजय झा यह लेख अंग्रेजी छोड़िये हिंदी में कैमरे पर लिख कर दिखायें।
लिखता कोई नाम किसी का आजकल यही चल रहा है।
-आईपी सिंह, वरिष्ठ नेता, सपा


बृजेंद्र सिंह-
यह लेख आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी का हो ही नहीं सकता है, यही संघी रणनीति है उनको मोदी जी का भक्त बताने की।


आज एक हालिया बने भूतपूर्व मुख्यमंत्री के नाम से प्रधानमंत्री जी की तारीफ़ में कसीदे लिखे गए आलेख को एक अंग्रेज़ी दैनिक में छपवाया गया। किसी ने जाकर उनसे कहा कि ऐसा एक आलेख आया है आपके नाम से। उन भूतपूर्व साहब ने पूछा..आयँ आयँ…कब? कहाँ? कैसे हुआ? किसने किया? ख़ैर जय हिन्द
-मनोज कुमार झा, सांसद, जदयू

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