नई दिल्ली। BBC India के लिए कंटेंट तैयार करने वाली Collective Newsroom (CnR) में लगातार हो रहे वरिष्ठ स्तर के इस्तीफों ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। एक के बाद एक तीन बड़े नामों के संगठन छोड़ने की खबरों ने न सिर्फ न्यूज़रूम के भीतर की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह चर्चा भी तेज कर दी है कि क्या संस्थान किसी बड़े संक्रमण दौर से गुजर रहा है।
ताजा मामला BBC उर्दू वीडियो डिवीजन का नेतृत्व संभाल रहे मेहताब शाहब के इस्तीफे का है। सूत्रों के मुताबिक, मेहताब शाहब ने अपनी सभी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं।
डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में मेहताब शाहब एक स्थापित नाम हैं। वह द वायर की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रह चुके हैं और उन्हें उन चुनिंदा प्रोफेशनल्स में गिना जाता है, जिन्होंने डिजिटल न्यूज़रूम को सिर्फ खबरें प्रकाशित करने का मंच नहीं, बल्कि प्रभावी डिजिटल स्टोरीटेलिंग का माध्यम बनाया।
बताया जाता है कि पाकिस्तान से भारत शिफ्ट हुए BBC Urdu Video Operation को एशियाई स्तर पर खड़ा करने और उसे दिशा देने की जिम्मेदारी भी मेहताब शाहब को सौंपी गई थी। करीब पांच महीने पहले ही वह Collective Newsroom से जुड़े थे। ऐसे में इतने कम समय में उनका बाहर होना महज एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि संगठन के लिए एक बड़े संपादकीय झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
हिंदी वीडियो टीम के प्रमुख अभय ने भी छोड़ा पद
मेहताब शाहब से पहले हिंदी वीडियो विभाग के प्रमुख अभय ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अभय को तेज न्यूज़ सेंस और राष्ट्रीय मुद्दों की गहरी समझ के लिए जाना जाता है। वह इससे पहले स्टार न्यूज़ में भी काम कर चुके हैं।
Collective Newsroom में वह हिंदी वीडियो कंटेंट की संपादकीय दिशा तय करने और महत्वपूर्ण खबरों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका जाना भी संस्थान के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
परवेज़ अहमद का जाना भी बड़ा झटका
इस्तीफों की इस कड़ी में तीसरा बड़ा नाम परवेज़ अहमद का है, जो वीडियो एडिटिंग और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। परवेज़ को मजबूत एडिटोरियल समझ, टीम निर्माण और प्रशिक्षण कौशल के लिए जाना जाता है। वह इससे पहले न्यूज़ नेशन और न्यूज़ एक्सप्रेस जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं।
करीब एक दशक तक बीबीसी से जुड़े कामकाज में अहम भूमिका निभाने वाले परवेज़, BBC के नए ढांचे में भी मैनेजमेंट के साथ जुड़े रहे। बताया जाता है कि एचटी बिल्डिंग से मैक्स हाउस शिफ्टिंग के दौरान उन्होंने नए न्यूज़रूम सिस्टम को समझने और लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इतना ही नहीं, उन्होंने करीब 150 पत्रकारों को नए सिस्टम की ट्रेनिंग भी दी थी।
ऐसे में उनका बाहर होना अनुभव और संस्थागत स्मृति—दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
क्या Collective Newsroom में सब कुछ सामान्य है?
लगातार हो रहे इन इस्तीफों के बाद मीडिया गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों का दावा है कि संस्थान के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और कई कर्मचारी नए अवसरों की तलाश में जुटे हुए हैं।
यह भी चर्चा है कि हाल ही में लॉन्च हुए R TV सहित कई मीडिया संस्थानों को भेजे गए बायोडाटा में Collective Newsroom से जुड़े पत्रकारों की संख्या उल्लेखनीय रही है। इतना ही नहीं, R TV में काम कर रहे कुछ पेशेवर पहले इसी इकोसिस्टम का हिस्सा रह चुके हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही Collective Newsroom की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
सवाल ज्यादा, जवाब कम
मेहताब शाहब, अभय और परवेज़ अहमद जैसे वरिष्ठ पेशेवरों का एक के बाद एक संस्थान से अलग होना अब महज इस्तीफों की खबर नहीं रह गई है। इसने उस न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जो BBC India के लिए कंटेंट तैयार करता है।
क्या यह सिर्फ बेहतर अवसरों की तलाश में हो रहा सामान्य करियर बदलाव है?
या फिर Collective Newsroom के भीतर कोई बड़ा बदलाव, असंतोष या पुनर्गठन चल रहा है, जिसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है?
बीबीसी के लिए Collective Newsroom में काम कर रहे एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर भड़ास को बताया कि अभी फिलहाल तीन लोगों ने संस्थान छोड़ा है, आगे आने वाले दिनों में और भी लोग कलेक्टिव न्यूजरूम को गुडबॉय कर सकते हैं।
बहरहाल, जवाब कम हैं और सवाल ज्यादा। लेकिन मीडिया जगत की निगाहें अब Collective Newsroom की अगली हलचल पर टिकी हुई हैं।
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