नई दिल्ली। टेलीविजन समाचार चैनलों की रेटिंग व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव फिलहाल अधर में लटका हुआ है। केरल हाईकोर्ट ने लैंडिंग पेज रेटिंग सुधार से जुड़े मामले की सुनवाई एक बार फिर टालते हुए अगली तारीख 13 जुलाई तय कर दी है। इसके साथ ही समाचार चैनलों की रेटिंग बहाली और नई मापन प्रणाली लागू होने को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
यह मामला 19 जून को न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की अदालत में सूचीबद्ध था। अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करने संबंधी प्रक्रिया के तहत 13 जुलाई तक स्थगित कर दिया।
दरअसल, 22 मई को केरल हाईकोर्ट ने टीवी रेटिंग पॉलिसी-2026 के क्लॉज 5.4.1 के तहत लैंडिंग पेज से जुड़े प्रावधान के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला 8 जून, 15 जून और 19 जून को सूचीबद्ध हुआ, लेकिन किसी भी तारीख पर अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी।
यह याचिका ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और डेन नेटवर्क्स की ओर से केंद्र सरकार, ट्राई और बार्क इंडिया के खिलाफ दायर की गई है। विवाद टीवी रेटिंग पॉलिसी-2026 के उस प्रावधान को लेकर है, जिसमें लैंडिंग पेज के जरिए मिलने वाली दर्शक संख्या को रेटिंग गणना से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है।
मीडिया उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में केंद्र सरकार ने इस मामले को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद की सुनवाईयों में वह अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा सकी। उद्योग जगत के कई जानकारों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में नई नीति को जल्द लागू करना चाहती, तो अदालत में मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करती।
गौरतलब है कि 3 जून को केंद्र सरकार ने मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए विशेष आवेदन भी दायर किया था। इसके बावजूद सुनवाई लगातार टलती रही।
टीवी रेटिंग पॉलिसी-2026 के तहत लैंडिंग पेज को मार्केटिंग और प्रमोशन के साधन के रूप में जारी रखने की अनुमति है, लेकिन उससे मिलने वाली दर्शक संख्या को रेटिंग में शामिल नहीं किया जाना है। बार्क इंडिया ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए परिचालन दिशा-निर्देश भी तैयार कर लिए थे, लेकिन अदालत की अंतरिम रोक के कारण पूरी प्रक्रिया ठप हो गई।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी दर्शक के सेट-टॉप बॉक्स पर लैंडिंग पेज के रूप में कोई चैनल सबसे पहले दिखाई देता है, तो उस व्यूअरशिप को रेटिंग में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि यदि दर्शक बाद में अपनी पसंद से उसी चैनल को देखता है, तो उस व्यूअरशिप को मान्य माना जाएगा।
याचिकाकर्ता एआईडीसीएफ का तर्क है कि लैंडिंग पेज वह पहला चैनल होता है, जिससे दर्शक टीवी चालू करते ही रूबरू होता है। ऐसे में उसे पूरी तरह गैर-दर्शकता मान लेना वास्तविक उपभोक्ता व्यवहार के अनुरूप नहीं है। संगठन का यह भी कहना है कि इस व्यवस्था से मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (MSO) की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक संपत्ति कमजोर होगी।
वहीं केंद्र सरकार का पक्ष है कि लैंडिंग पेज और बूट-अप स्क्रीन के कारण रेटिंग्स कृत्रिम रूप से प्रभावित होती हैं, क्योंकि यह दर्शकों की वास्तविक पसंद नहीं बल्कि चैनल की स्थिति का परिणाम होती है। सरकार का कहना है कि टीवी दर्शकता की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए यह सुधार आवश्यक है।
मामले में लगातार हो रही देरी का सबसे बड़ा असर समाचार चैनलों की रेटिंग व्यवस्था पर पड़ा है। उद्योग जगत के कई विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति लागू होने से लैंडिंग पेज आधारित कृत्रिम बढ़त खत्म होती और रेटिंग्स वास्तविक दर्शक पसंद के अधिक करीब पहुंचतीं। फिलहाल अदालत के अंतिम निर्णय तक पूरी प्रक्रिया अनिश्चितता के घेरे में बनी हुई है।


