Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

हरदोई के इस पत्रकार पर की गई हाईकोर्ट की टिप्पणी सभी पत्रकारों को पढ़नी चाहिए!

Hindi newspaper clipping with a bold headline about action against journalists involved in anti-social activities; two-column Devanagari text

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरदोई के एक पत्रकार को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि पत्रकारिता की आड़ में असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति शमीम अहमद की एकल पीठ ने हरदोई के पुनीत मिश्रा और एक अखबार के डिस्ट्रीब्यूटर प्रदीप वैश्य की याचिका खारिज कर दी। दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर, आरोपपत्र और समन आदेश को चुनौती देते हुए कोर्ट से राहत मांगी थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पत्रकारिता से जुड़े हैं और खबरें प्रकाशित करने के कारण उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दलील दी कि मामले की एफआईआर घटना के 15 दिन बाद दर्ज की गई थी, इसलिए उस पर सवाल उठाए जाने चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो लोगों को ब्लैकमेल कर धन उगाही जैसे काम करता है। सरकार का दावा था कि याचिकाकर्ता भी इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए इस स्तर पर आरोपपत्र या समन आदेश रद्द नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की आड़ में असामाजिक गतिविधियों में शामिल है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है। अदालत ने माना कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार के पास पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पत्रकारिता की आड़ में ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के आरोपों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन