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उत्तर प्रदेश

एसआईटी ने जिस संजय प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी है, वह खुद राम मंदिर ट्रस्ट के मेंबर हैं और जांच के घेरे में हैं!

Two men exchange a document across a large desk in a formal office, with an ANI watermark in the corner.

अभिषेक उपाध्याय-

ये तो सीधा हितों का टकराव है? आखिर SIT संजय प्रसाद को अपनी रिपोर्ट कैसे सौंप सकती है?

वे तो खुद राम मंदिर ट्रस्ट के मेंबर हैं। उनकी सुदर्शन तस्वीर ट्रस्ट की वेबसाइट पर चस्पा है।

इस लिहाज से वे खुद अपनी भूमिका को लेकर जांच के घेरे में हैं, कि चढ़ावा चोरी का इतना बड़ा महापाप होता रहा और बतौर अपर मुख्य सचिव गृह उन्हें भनक तक नहीं लगी!!

Incompetence का इससे बड़ा उदाहऱण दूसरा क्या होगा? SIT को जिससे पूछताछ करनी चाहिए थी, वो उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंप रही है।

क्या कलियुग यही है?

प्रधानमंत्री जी, इससे तो अच्छा था कि आप SIT से कहते कि वो बिल्ली के हाथ में दूध की रखवाली विषय पर कम शब्दों में एक सारगर्भित निबंध लिखती!

राम मंदिर SIT की रिपोर्ट संजय प्रसाद को सौंपकर बाहर निकले विजय विश्वास पंत को सुनिए। कह रहे हैं कि सब कुछ गोपनीय है। अभी कुछ बता नहीं सकते।

मगर जो गोपनीय नहीं है और पूरी तरह सार्वजनिक है, वो मैं बताए देता हूँ।

पहला- इस SIT को जिस राम मंदिर ट्रस्ट की जाँच करनी है, उसी ट्रस्ट की सिफारिश पर ये गठित की गई है।

दूसरा- जो अधिकारी बतौर अपर मुख्य सचिव गृह ख़ुद राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा है और इस लिहाज़ से ख़ुद जांच के दायरे में है, उसी को ये रिपोर्ट सौंपी गई है।

इसी से आप समझ सकते हैं कि इस SIT का अंजाम क्या होने जा रहा है?

अब इसके आगे सुदर्शन फाखिर का ये शेर पढ़िए-

“मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा!”

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