अभिषेक उपाध्याय-
न ANI, न PTI मोहन यादव के मसले पर सब ख़ामोश! ठंडा हो गया सारा जोश!!
सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश में कैबिनेट की मीटिंग के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में मोहन यादव के परिवार के ज़मीन के मुद्दे पर किसी एजेंसी से पूछते नहीं बना।
कुछ एजेंसियों ने तो अपने ग्राहकों को इस खबर से जुड़ी फ़ीड तक नहीं सप्लाई की। चैनल सन्नाटा मारे हुए हैं। उनसे वैसे भी उम्मीद नहीं थी।
मगर एजेंसियों से इतनी तो उम्मीद थी कि वे कम से कम अपनी ग्राहकों को इसे जुड़ी News feed तो दे देते। जिन्हें चलाना हो, वे चला लेते!!
मगर अपनी लार से विज्ञापनों का चेहरा भिगो चुकी एजेंसियाँ इस कदर ख़ामोश हो गईं, कि कुछ देर के लिए तो लगा कि कहीं पल्स तो नहीं डूब गई है!

अजीत अंजुम-
इंडियन एक्सप्रेस का बड़ा खुलासा.
एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार ने बीते पांच सालों में 253 एकड़ ज़मीन खरीदी है. ये ज़मीनें उज्जैन के उन इलाकों में खरीदी गई हैं, जहां मध्य प्रदेश सरकार Infrastructure Development का जबरदस्त काम कर रही है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव , बेटा वैभव यादव, बहू शालिनी यादव बड़े भाई नारायण यादव समेत पूरे कुनबे ने सस्ती जमीनें खरीदकर बहुत बड़ा लैंड बैंक बनाया है. सरकारी खजाने से इलाके के विकास की कई गुना कीमत वसूलने की तैयारी की गई है.
पढ़िए और सोचिये कि ये लोग कितने बड़े खिलाड़ी हैं. ऐसे ही बड़े-बड़े लोगों ने अयोध्या में ज़मीन खरीदी थी. आज देखना है कि कौन चैनल इस खुलासे पर मोहन यादव को घेरता है?
मनीष-
ये स्टोरी कमोबेश भोपाल के हर सक्रिय पत्रकार के पास रही होगी क्योंकि एनडीटीवी के एक पूर्व सहयोगी ने कई बार बताया था कि ऐसे जमीन सौदे की संख्या चार सौ के पार हैं और वो करीब पच्चीस हज़ार करोड़ का मामला होगा लेकिन छापने की हिम्मत मालिक के रूप में anant goenka और संपादक rajkamal jha ने जुटायी।
अब देख लीजिए खबर छपने के बाद कितने राष्ट्रीय चैनल और रीजनल चैनल फॉलो अप कर रहे हैं और अगर नहीं कर रहे तो सरकार का विज्ञापन विभाग काफ़ी सक्रिय हैं।
अनिल जैन-
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के भूमि-प्रेम को लेकर दिल्ली के इंडियन एक्सप्रेस ने आज पूरे तीन पन्ने रंगे हैं।
हालांकि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार का कारोबारी साम्राज्य जिस तेजी से फैला है, उससे मध्य प्रदेश, खासकर इंदौर, उज्जैन और भोपाल का मीडिया जगत बखूबी वाकिफ़ है, लेकिन उसे छापा है दिल्ली के अंग्रेज़ी अखबार ने।
मध्य प्रदेश के अखबार वैसे भी मुख्यमंत्री के खिलाफ़ ऐसा-वैसा कुछ नहीं छापते हैं। मुख्यमंत्री कोई भी हो, मध्य प्रदेश के अखबारों के लिए तो वह पद से हटने तक यशस्वी और कर्मठ ही होता है।
बहरहाल दिल्ली के अखबार में मोहन यादव और उनके परिवार के जमीनों से जुड़े कारोबारी साम्राज्य के बारे में छपना इस बात का संकेत है कि मोहन यादव से दिल्ली दरबार खुश नहीं है, अन्यथा दिल्ली के भी किसी अखबार में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह शाह और शहंशाह के किसी मनसबदार/सूबेदार के ख़िलाफ़ ऐसा छाप सके।
शायद मोहन यादव की ओर से दिल्ली की खिदमत में कोई कमी रह गई है!
Indian Express ने इतना बड़ा इन्वेस्टिगेशन किसी और CM Madhya Pradesh के बारे में किया हो याद नहीं आता? केरवा कोठी/चुरहट लॉटरी, डंपरकांड भी इतना बड़ा नहीं था
वीरेंद्र कुमार सकलेचा द्वारा अपने बेटे के नाम खरीदे गए प्लॉट ने भी राज्य की राजनीति को बदल दिया था।
-दिनेश गुप्ता





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मैं चंपत राय की कसम खाकर कहता हूँ; बेईमानी, भ्रष्टाचार, लूट, दगाबाजी, टोपीबाजी जैसे काम भाजपा के लोग कर ही नहीं सकते हैं!



