रांची। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 35 वर्षों से अधिक समय तक अपनी सेवाएं देने वाले वरिष्ठ पत्रकार दीपेश कुमार का आकस्मिक निधन हो गया। बताया जा रहा है कि कार्यालय में काम के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
दीपेश कुमार ने अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में कई प्रतिष्ठित अखबारों के साथ काम किया और अपनी निष्पक्ष, संतुलित तथा जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के लिए पहचान बनाई। वे उन पत्रकारों में शामिल थे जिन्होंने बदलते मीडिया दौर में भी पेशेवर मूल्यों और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी।
रांची और झारखंड की पत्रकारिता में उनका विशेष योगदान रहा। उनके साथ काम करने वाले पत्रकार उन्हें एक कुशल संपादक, मार्गदर्शक और बेहद मिलनसार व्यक्ति के रूप में याद करते हैं। युवा पत्रकारों को प्रोत्साहित करना और उन्हें पत्रकारिता की बारीकियां सिखाना उनकी खास पहचान थी।
उनके निधन की खबर मिलते ही पत्रकारों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
दीपेश कुमार का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। अपने चार दशक के करीब लंबे करियर में उन्होंने जो पहचान और सम्मान अर्जित किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
दयानंद रॉय-
पत्रकार को उसके निधन के बाद उसका अखबार भी सिंगल कॉलम में निबटा देता है
एक पत्रकार के निधन की खबर अखबार में सिंगल कॉलम से ज्यादा की हकदार नहीं होती अगर वो कोई प्रख्यात संपादक न हो तो। सोचता हूं कि यह व्यवस्था कैसे बनी होगी कि किसी पत्रकार का अगर निधन हो जाए तो उसकी खबर अखबार में सिंगल कॉलम की जगह घेरेगी। इससे ज्यादा की नहीं। किसी संपादक ने ही तय किया होगा, या फिर मैनेजमेंट का ही निर्देश होगा कि किसी पत्रकार के निधन को अधिक प्रमुखता नहीं देनी है। या फिर यह भी हो सकता है कि पेजीनेटरों और उप संपादकों ने ही तय कर लिया होगा कि कहीं सिंगल कॉलम में निबटा देना है।
एक पत्रकार अपना पूरा जीवन समाज के लिए जीता है। जैसे राजनेता जीते हैं, चंद पत्रकार व्यवस्था के साथ सेटिंग कर अपने लिए बेहतर जीवन तलाश लेते हैं पर अधिकांश के हिस्से जिंदगी भर संघर्ष के सिवा कुछ नहीं आता। दूसरों की खबर लेने वाला पत्रकार खुद अपनी ही कायदे की खबर नहीं बन पाता। अखबारों और मीडिया संस्थानों को इस नजरिये में बदलाव लाने की जरूरत है। कल दीपेश जी के निधन के बाद उनकी खबर अखबारों में खंगाल रहा था।
प्रभात खबर में सिंगल, हिन्दुस्तान में यही स्थिति और दैनिक भास्कर भी उनके साथ साम्य लिए हुए था। माने सिंगल कॉलम। हालांकि, दैनिक आजाद सिपाही ने उनके निधन को तीन कॉलम में जगह दी। यह सम्मानजनक महसूस हुआ। दीपेश जी करीब 35-चालीस साल से पत्रकारिता कर रहे थे।
क्या वे प्रमुख अखबारों में वे सिंगल कॉलम से अधिक की जगह के हकदार नहीं थे। अगर एक अखबार में अखबारनवीस का निधन ही लगभग नगण्य या महत्वहीन हो जायेगा तो समाज फिर पत्रकार को कितनी तवज्जो देगा। अखबार के मालिकों, संपादकों और पत्रकारों को इसपर विचार अवश्य करना चाहिए।
दीपेश जी को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
झारखंड (रांची) के वरिष्ठ पत्रकार दीपेश कुमार जी के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक एवं स्तब्ध करने वाला है।
दीपेश जी ने अपनी निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को हमेशा प्रमुखता से उठाया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका असमय निधन झारखंड की पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।
-जयराम महतो
रमेश पुष्कर-
वरिष्ठ पत्रकार श्री दीपेश कुमार के निधन का दुखद समाचार मिलने से हतप्रभ हूं …. मर्माहत हूं…..आँखें भर आई … अखबार के दफ्तर में ही उन्हें हार्ट अटैक आया … और उस क्रूर काल ने उनको हमलोगों से छीन लिया…

लंबे समय से मित्र रहे दीपेश जी सदैव बड़े गर्मजोशी से मिलते थे … राजनीति से लेकर सभी विषयों पर लंबी बातें होती थीं … अब उनकी आवाज “कहिए पुष्कर जी क्या हाल है” नहीं सुन पाएंगे।
उनके आकस्मिक निधन से रांची राजधानी ने एक बेहतरीन पत्रकार एवं इंसान खो दिया है।
देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें अपने श्री चरणों में पुण्य स्थान प्रदान करें .. उनके परिजनों को इस भारी भरकम दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें … उन्हें शत शत नमन … ॐ शांति शांति



