नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान Indian Institute of Mass Communication (आईआईएमसी) के उर्दू पत्रकारिता पाठ्यक्रम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक ईमेल के स्क्रीनशॉट में दावा किया गया है कि पर्याप्त संख्या में छात्रों के आवेदन न मिलने के कारण शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए उर्दू पत्रकारिता कार्यक्रम को स्थगित (Suspend) कर दिया गया है और अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क वापसी के लिए बैंक विवरण मांगे गए हैं।

वायरल ईमेल में उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि आवश्यक संख्या में छात्रों की कमी के चलते संस्थान ने 2026-27 के लिए उर्दू पत्रकारिता कार्यक्रम को निलंबित करने का निर्णय लिया है। साथ ही अभ्यर्थियों से फीस रिफंड की प्रक्रिया के लिए बैंक संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। आईआईएमसी ने अप्रैल और मई 2026 में उर्दू पत्रकारिता के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए बाकायदा आवेदन आमंत्रित किए थे और इसके लिए अलग प्रवेश प्रक्रिया भी संचालित की गई थी।
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में उर्दू पत्रकारिता कोर्स की प्रवेश परीक्षा में उर्दू लिपि को अनिवार्य बनाए जाने का मामला भी चर्चा में रहा था और यह मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
मीडिया जगत के कुछ जानकारों का मानना है कि यदि वास्तव में छात्रों की संख्या कम होने के कारण कोर्स को स्थगित किया गया है तो यह उर्दू पत्रकारिता शिक्षा के लिए चिंताजनक संकेत है। आईआईएमसी लंबे समय से उर्दू पत्रकारिता में विशेष प्रशिक्षण देने वाले देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल रहा है।
फिलहाल संस्थान की ओर से इस वायरल ईमेल पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आईआईएमसी इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण जारी करता है और क्या उर्दू पत्रकारिता पाठ्यक्रम को भविष्य में फिर से शुरू किया जाएगा।
देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) में इस साल उर्दू जर्नलिज्म की पढ़ाई नहीं होगी! IIMC के एक फैसले से उर्दू जर्नलिज्म डिपार्टमेंट में ताला लग गया है।
कुछ दिन पहले हमने आशंका जताई थी कि ऐसा हो सकता है!
-प्रभाकर कुमार मिश्रा



