संजय कुमार सिंह
वैसे तो आज भारत के पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज करार दिए जाने की खबर बहुत बड़ी है। जब बीएलओ किसी की नागरिकता पर शक कर सकता है अनजाने और अभी तक अप्रयुक्त सॉफ्टवेयर की निकाली लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के कारण लाखों लोग वोट नहीं दे पाए तो पासपोर्ट बनाने, जारी करने और उसपर हो रहे खर्च तथा इसकी पूरी प्रक्रिया और जरूरत पर सवाल है। विदेशों में रह रहे नागरिकों से कहा जाए कि नागरिकता का दस्तावेज दीजिए तो वे क्या देंगे? क्योंकि सरकार कह रही है कि वह यात्रा का दस्तावेज है (नागरिकता का नहीं)। कोई देश किसी ऐसे पासपोर्ट धारक को क्यों अपने यहां रहने दे जिसकी नागरिकता का ही पता नहीं है। सरकार की नई घोषणा से आधार कार्ड होते हुए अलग से मतदाता पहचान पत्र बनाने, आधार से वोट देने की व्यवस्था नहीं करने और एक देश एक चुनाव के लिए नाक रगड़ रहे देश में एक देश एक पहचान पत्र पर चुप्पी क्यों? जैसे कई मामले खड़े हो गए हैं। इसके बावजूद ‘खबर’ आज सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। कहने की जरूरत नहीं है कि भारत के पासपोर्ट पर यात्रा करेंगे तो दूसरे देश में भारत के नागरिक ही माने जाएंगे पर भारत में इसे यात्रा दस्तावेज कहने का कारण यही है कि भाजपा या सरकार जिसे चाहे उसे ही मतदाता बनाने की अपनी व्यवस्था को जारी रखना चाहती है। आज इस खबर को महत्व नहीं मिलने का कारण आज की दूसरी खबरें भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, कलकत्ता में एक निर्माणाधीन गोदाम गिर जाने से पांच लोगों की मौत हो गई। यह खबर द टेलीग्राफ के साथ द हिन्दू और नवोदय टाइम्स में लीड है। कलकत्ता में 2016 में चुनाव के समय एक निर्माणाधीन पुल गिरा था तो मुख्यमंत्री ने इसे ऐक्ट ऑफ गॉड कहा था। नरेन्द्र मोदी ने इसे ऐक्ट ऑफ फ्रॉड कहा था। तब तो ममता बनर्जी ही चुनाव जीती थीं, उसके बाद 2021 में भी ममता बनर्जी को कामयाबी मिली। इस बार भाजपा कैसे सत्ता में आई है वह सबको पता है और मछली खाने का ड्रामा भी याद ही होगा।
आज अंडे को मिड डे मील से हटाने की खबर भी है। यह आशंका पहले भी जताई गई थी। तभी मछली खाने का ड्रामा किया गया हालांकि जीतने का कारण तो हर किसी को मालूम है। इसलिए अब शाकाहार को बढ़ावा दिया जा रहा है और अंडे को मिडडे मील से हटा दिया गया है। निश्चित रूप से यह सब ऐक्ट ऑफ गॉड है कि सरकार बनने के बाद हादसा हुआ। मध्य प्रदेश के भाजपाई मुख्यमंत्री द्वारा जमीन खरीदने के इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे पर भी हंगामा है लेकिन उसकी खबर मदद प्रदेश के अखबारों में भी पहले पन्ने पर नहीं है। देशबन्धु अपवाद है, दिल्ली में इसकी लीड का शीर्षक, मध्य प्रदेश में जमीन की लूट मची कांग्रेस का आरोप है। दैनिक भास्कर की लीड मानसून के मध्य प्रदेश पहुंचने की खबर है तो अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, टैरिफ की समय सीमा करीब, लेकिन अंतरिम समझौते पर असमंजस। खबर है कि भारत अमेरिका के बीच दो दिन की व्यापार वार्ता में ठोस नतीजा नहीं निकला। अंग्रेजी अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, ट्रम्प ने अपनी ही सरकार के डेटा को खारिज कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है, गैर टैरिफ बाधाओं के लिए बाजार ऐक्सेस : भारत अमेरिका ने व्यापार से संबंधित खास मामलों की समीक्षा की। उपशीर्षक है, वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश संतुलित, व्यावसायिक तौर पर अर्थपूर्ण करार के लिए प्रतिबद्ध हैं। पहली नजर में इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स की खबर एक ही लगती हैं और ऐसा लगता है कि दोनों अखबारों ने एक ही मामले को अपने-अपने ढंग से रिपोर्ट किया है। लेकिन खबर पढ़ने से पता चलता है कि अमेरिका का एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत में था। दो दिन की वार्ता के बाद कहा गया है कि व्यापक समीक्षा की गई है। दूसरी ओर, टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर एक किताब के हवाले से दी गई है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने एक काम की खबर दी है। इसके अनुसार, तेल की कीमत खाड़ी युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच गई है और अब यह घटकर 75 डॉलर से भी नीचे है। देखना है, सरकार तेल की कीमत कम करती है या नहीं। पश्चिम बंगाल में मिड डे भोजन से अंडा गायब होने की खबर आज दि एशियन एज में सिंगल कॉलम में है। दैनिक भास्कर में भी यह सिंगल कॉलम में है जबकि इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने् पर सूचना भर है कि खबर अंदर के पन्ने पर है। इस तरह जब भाजपा देश भर में अपना एजंडा लागू कर रही है तो भाजपा अध्यक्ष ने कहा है और अमर उजाला में लीड के साथ टॉप पर छपा है, तुष्टीकरण नहीं, परफॉर्मेंस पर चुनी जा रहा है सरकार। परफॉर्मेंस का हाल यह है कि नवोदय टाइम्स ने आज ही बताया है, डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराध पर मोदी सख्त। उपशीर्षक के अनुसार, प्रधानमंत्री ने समीक्षा बैठक में समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश भी अब जाकर दिए हैं। प्रधानमंत्री पहले कह चुके हैं कि वे तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण करते हैं। अब संतुष्टी का ऐसा आलम है कि चंदाचोरी की खबर है, दूसरी ओर, विदेशी चंदे का धंधा ही बंद करा दिया गया है।
आइए, इन खबरों के आलोक में मोदी सरकार की रिपोर्ट कार्ड देखें। सबसे पहले डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराध। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की खबरों के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि यह अपराध भारतीय सुरक्षा तंत्र के लिए कितना पुराना और गंभीर हो चुका है। वैसे तो डिजिटल अरेस्ट अब कोई नया तरीका नहीं रह गया है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में यह ठगों का सबसे मारक हथियार रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा जून 2026 में साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साइबर अपराधों का ग्राफ डराने वाला है। पिछले 6 वर्षों में भारतीयों ने साइबर धोखाधड़ी के कारण लगभग ₹52,976 करोड़ गंवाए हैं। कुल साइबर ठगी का लगभग 8% हिस्सा (करीब ₹4,200 करोड़) अकेले डिजिटल अरेस्ट से जुड़ा हुआ है। अकेले वर्ष 2025 में वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए 3,000 से अधिक डिजिटल अरेस्ट के मामले दर्ज किए गए। सीबीआई (सीबीआई) और साइबर सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इन डिजिटल अरेस्ट रैकेट्स के तार भारत के बाहर दक्षिण-पूर्वी एशिया (जैसे म्यांमार, कंबोडिया और लाओस) में सक्रिय ‘साइबर स्कैम कंपाउंड्स’ से जुड़े हैं। कार्रवाई के स्तर पर भारत सरकार ने स्थानीय स्तर पर ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर किराए के बैंक खाते) पर नकेल कसी है और ट्राई (टीआरएआई) के जरिए ओवर-द-टॉप (ओटीटी) कॉलिंग प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियमन की तैयारी की जा रही है।
दूसरा मामला बंगाल चुनाव के समय ‘मछली खाने का ड्रामा’ और अब मिड-डे मील से अंडा हटाना है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही कहा था कि भाजपा सत्ता में आ गई तो राज्य के लोगों पर शाकाहार थोप सकती है। तब भाजपा के नेताओं ने इसे गलत बताने के लिए मछली खाने का ड्रामा किया था और इसमें शामिल था कि मछली बिना लहसुन प्याज के बनी थी इसलिए शाकाहार है। वैसे तो यह एक अलग मामला है लेकिन सोमवार, 22 जून 2026 को राज्य का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने घोषणा की कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) बनाने और बांटने का जिम्मा इस्कॉन की अन्नअमृत फाउंडेशन को दिया जाएगा। इस्कॉन के कोलकाता प्रवक्ता राधारमण दास ने पुष्टि की कि उनके द्वारा दिए जाने वाले भोजन में अंडे शामिल नहीं होंगे। इसकी जगह बच्चों को सोयाबीन, पनीर, राजमा और दालें जैसे शाकाहारी प्रोटीन विकल्प दिए जाएंगे। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए 24 जून 2026 को टीएमसी के राज्यसभा सांसद और संयुक्त सचिव डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, “चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाने के तमाशे के बाद अब ‘गुजरात जिमखाना’ खुलकर सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार काम पर है। विरोधियों पर अंडे फेंको, लेकिन मिड-डे मील से अंडे हटाकर बच्चों को पोषण से वंचित कर दो। शाकाहार थोपा जा रहा है, जिसे बंगाल खारिज करता है।” नेताओं पर अंडे फेंकने की घटनाएं पर प्रतिक्रिया देते हुए 18 जून 2026 को हुगली में भाजपा नेता और राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इसे ‘डीमोक्रेसी’ (अंडे वाला लोकतंत्र) कहा था। असल में बांग्ला में अंडे को डीम कहा जाता है। इसलिए अंडा फेंकने को तो डीमोक्रेसी कहा जा रहा है लेकिन खाना प्रतिबंधित हो गया है। टीएमसी नेताओं का सीधा आरोप है कि उनके सचिव और कार्यकर्ताओं पर अंडे फेंकने के पीछे सीधे तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं का हाथ है, जो राजनीतिक विद्वेष के तहत ऐसा कर रहे हैं।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



