रवीश कुमार-
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lit से घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। कार का औसत 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा।
उमाशंकर सिंह-
गडकरी जी अब भक्तों तक को गड़ने लगे हैं। उनकी सड़कें पहली बरसात में ही फट रही हैं और उनके एथेनाल ने मध्य वर्गीय गाड़ी मालिकों में उनके लिए नफ़रत पैदा कर दी है। संलग्न हैं दो पोस्ट और उनमें से ताजी पोस्ट का अनुवाद! एक भक्त अकाउंट के हृदय की आह है! एक समय वे मोदी मोदी कर रही थीं और अब विपक्ष ढूँढ रही हैं!


“पिछले सप्ताहांत हम कसौली घूमने गए थे। चंडीगढ़ से ठीक पहले हमने गाड़ी में पेट्रोल भरवाया। हमारी डिफेंडर आराम से चल रही थी। लेकिन पेट्रोल भरने के तुरंत बाद गाड़ी कुछ मीटर चलकर रुकने लगी।
हम किसी तरह 10 घंटे में कसौली पहुंचे। वहाँ कोई मैकेनिक भी डिफेंडर की जानकारी नहीं रखता था।
वापसी पर कार डीलर ने बताया कि पेट्रोल की वजह से फ्यूल टैंक खराब हो गया है। luckily हमारी एक्सटेंडेड वारंटी थी, इसलिए कुछ खर्चा बचा।
लेकिन अब मैं सोच रही हूँ कि 1.3 करोड़ रुपये की डिफेंडर के साथ क्या करूँ?
किसी के बेटे ने लाखों भारतीयों की जेब काटकर पैसा बना लिया है। पेट्रोल में एथनॉल मिलाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। फिर भी विपक्ष इस मुद्दे को क्यों नहीं उठा रहा है?”



