Connect with us

Hi, what are you looking for?

प्रिंट

अंग्रेज़ी भाषा का एक अख़बार उस समय सबसे ज्यादा देखा गया, जब देश का सबसे बड़ा जनसमूह हिंदी भाषी माना जाता है!

Portrait of a middle-aged man with dark hair and a mustache, wearing a beige Nehru jacket against a light background.

पंकज शुक्ला-

क्या आपको पता है कि 18 जुलाई से 24 जुलाई के बीच छात्र आंदोलन के दौरान जब पूरा देश जवाब खोज रहा था, तब सबसे ज़्यादा लोगों ने अंग्रेज़ी अख़बार The Hindu के वीडियोज़ क्यों देखे?

20 जुलाई के बाद दिल्ली का जंतर-मंतर केवल एक विरोध स्थल नहीं रहा। वह देश की राजनीति, पुलिस व्यवस्था और मीडिया की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन गया। सड़कों पर लाठीचार्ज हो रहा था, अदालतों में याचिकाएँ दाख़िल हो रही थीं और सोशल मीडिया पर हर मिनट नए वीडियो सामने आ रहे थे। ऐसे समय में देश का एक बड़ा वर्ग जवाब तलाश रहा था।

सवाल यह था कि वह जवाब किससे तलाश रहा था?

डाटा बीईंग्स के यूट्यूब के सप्ताह 30 (18 जुलाई से 24 जुलाई) के आँकड़े इस संदर्भ में एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। इस अवधि में समाचार पत्रों के यूट्यूब चैनलों पर अपलोड किए गए वीडियो को कुल 13.24 करोड़ से अधिक बार देखा गया।

इनमें अकेले The Hindu के वीडियो 2.55 करोड़ बार देखे गए और उसे कुल व्यूअरशिप का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा मिला। दूसरे स्थान पर Live Hindustan रहा, जबकि The Indian Express तीसरे स्थान पर रहा।

सबसे रोचक तथ्य यह नहीं है कि The Hindu पहले स्थान पर है। असली कहानी यह है कि अंग्रेज़ी भाषा का एक अख़बार उस समय सबसे अधिक देखा गया, जब देश का सबसे बड़ा जनसमूह हिंदी भाषी माना जाता है। यह संयोग नहीं हो सकता।

Table of top 10 YouTube channels by weekly views for Week 30, listing channel, views (million), and share percentage (The Hindu leads with 25.5M views, 19%).

जब कोई बड़ा संकट सामने आता है, तब दर्शक केवल सबसे तेज़ सूचना नहीं खोजता, बल्कि सबसे विश्वसनीय व्याख्या भी खोजता है। सोशल मीडिया के दौर में हर मोबाइल कैमरा एक न्यूज़ सोर्स बन चुका है। इसलिए पत्रकारिता का मूल्य अब केवल पहले होने में नहीं, बल्कि सही होने में है।

संभवतः इसी कारण बड़ी संख्या में दर्शकों ने उस मंच की ओर रुख किया, जिसकी पहचान लंबे समय से अपेक्षाकृत संयमित, दस्तावेज़ आधारित और कम उत्तेजक पत्रकारिता के रूप में रही है। सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करने वाले युवाओं का सबसे पसंदीदा अख़बार आज भी The Hindu ही माना जाता है।

The Hindu का डिजिटल मॉडल पिछले कुछ वर्षों में लगातार एक्सप्लेनर पत्रकारिता (Explainer Journalism), कानूनी विश्लेषण, नीति आधारित रिपोर्टिंग और तथ्यपरक वीडियो पर केंद्रित रहा है। छात्र आंदोलन जैसे संवेदनशील विषयों में यह शैली उन दर्शकों को आकर्षित करती है जो केवल घटनाएँ नहीं, बल्कि उनके पीछे का संदर्भ भी समझना चाहते हैं।

दूसरे स्थान पर Live Hindustan का पहुँचना भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। यह बताता है कि हिंदी का दर्शक समाप्त नहीं हुआ है। बल्कि वह ऐसे मंचों की तलाश में है जो भाषा के साथ-साथ विश्वसनीयता और डिजिटल प्रस्तुति, दोनों प्रदान कर सकें।

लेकिन, इसी आँकड़े में एक और कहानी छिपी हुई है।

देश के सबसे बड़े हिंदी समाचार समूहों में गिने जाने वाले दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर का प्रदर्शन अपेक्षा से काफी कमज़ोर दिखाई देता है। अमर उजाला की गिनती तो टॉप फ़ाइव में भी नहीं है, हां, दैनिक जागरण पाँचवें स्थान पर है, जबकि दैनिक भास्कर शीर्ष दस में भी दिखाई नहीं देता।

यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रिंट प्रसार के मामले में ये दोनों संस्थान दशकों से हिंदी पत्रकारिता के सबसे प्रभावशाली नाम रहे हैं। यदि अख़बार की प्रतियाँ लाखों घरों तक पहुँचती हैं, तो वही प्रभाव डिजिटल वीडियो में क्यों दिखाई नहीं देता?

कह सकते हैं कि प्रिंट पत्रकारिता की ताक़त और वीडियो पत्रकारिता की भाषा पूरी तरह अलग है। अख़बार में उत्कृष्ट रिपोर्ट लिखने वाला पत्रकार आवश्यक नहीं कि कैमरे के सामने भी उतना ही प्रभावशाली हो।

दूसरा कारण संपादकीय रणनीति हो सकता है। कई बड़े हिंदी समाचार समूह अब भी वीडियो को अपने प्रिंट कंटेंट का विस्तार मानते हैं, जबकि सफल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म वीडियो को स्वतंत्र उत्पाद की तरह विकसित करते हैं।

The Hindu, Indian Express और कुछ अन्य संस्थानों ने वीडियो के लिए अलग संपादकीय भाषा विकसित की है। हिंदी के अनेक बड़े समाचार पत्र अब भी इस संक्रमण के दौर में दिखाई देते हैं।

तीसरा कारण दर्शकों की बदलती अपेक्षाएँ हैं। आज का डिजिटल दर्शक एंकर की ऊँची आवाज़ से अधिक दस्तावेज़, ग्राफिक्स, घटनास्थल की वास्तविक तस्वीरें और तथ्य आधारित विश्लेषण चाहता है। लेकिन, हिंदी अख़बारों के वीडियो चैनल अब भी शोर को ही अपना हथियार मान रहे हैं।

यूट्यूब उन वीडियो को अधिक आगे बढ़ाता है जिन्हें दर्शक अंत तक देखते हैं। यदि किसी चैनल के वीडियो केवल क्लिक तो प्राप्त करते हैं, लेकिन दर्शक उन्हें जल्दी छोड़ देता है, तो प्लेटफ़ॉर्म उनकी पहुँच सीमित कर देता है। इसलिए केवल ब्रांड का बड़ा होना डिजिटल सफलता की गारंटी नहीं है।

भरोसा एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें प्रिंट, वेबसाइट, सोशल मीडिया, टेलीविज़न और प्रत्यक्ष पाठकीय अनुभव, सभी शामिल होते हैं। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन जैसे संवेदनशील सप्ताह में यूट्यूब पर सबसे अधिक दर्शकों ने The Hindu के वीडियो देखे। यह डिजिटल समाचार उपभोग के बदलते स्वरूप की ओर एक महत्वपूर्ण संकेत है।

शायद यह हिंदी पत्रकारिता के लिए भी एक संदेश है। डिजिटल युग में ब्रांड की विरासत नहीं, बल्कि कंटेंट की विश्वसनीयता, प्रस्तुति की गुणवत्ता और संदर्भ देने की क्षमता ही दर्शकों को अपने साथ जोड़कर रखती है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन