यशवंत सिंह-
4पीएम वाले संजय शर्मा की फ़िल्म सेंसर बोर्ड में अटक गई है। गाँव वाले जेनजी के गुस्से और नक्सलवाद वाले माहौल को लेकर बनी उनकी फ़िल्म “साहिया” को सेंसर बोर्ड ने रिव्यू कमेटी में भेजकर अटका दिया है। इस फ़िल्म को बनाने में अपना सब कुछ दांव पर लगा चुके संजय शर्मा के लिए ये बड़ा झटका माना जा रहा है। इस प्रकरण पर आज सुबह मैंने उनसे बात की।
फिल्म “साहिया (SAHIYA)” के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा ने सेंसर प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म के लिए तत्काल (Priority) श्रेणी में आवेदन किया गया था, लेकिन स्क्रीनिंग करीब डेढ़ महीने बाद हुई।
संजय शर्मा के मुताबिक, स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म को नक्सलवाद की पृष्ठभूमि बताकर रिव्यू कमेटी के पास भेजने की बात कही गई। उनका कहना है कि “साहिया” नक्सलवाद पर नहीं, बल्कि जंगल की पृष्ठभूमि में बनी एक मानवीय और पारिवारिक प्रेम कहानी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्क्रीनिंग के 10 दिन से अधिक समय बाद भी न तो रिव्यू कमेटी को भेजे जाने की आधिकारिक सूचना मिली है और न ही कोई अंतिम निर्णय। उनका कहना है कि ऐसी देरी से निर्माताओं को आर्थिक नुकसान होता है और फिल्मों की रिलीज़ प्रभावित होती है।
संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से “साहिया” पर जल्द निर्णय लेने और प्रमाणन प्रक्रिया को समयबद्ध व पारदर्शी बनाने की मांग की है।
क्या कहा 4पीएम वाले संजय शर्मा ने-
मुंबई. फिल्म “साहिया (SAHIYA)” की सेंसर प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर इसके निर्माता एवं निर्देशक संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.
संजय शर्मा, जो 4PM मीडिया समूह से जुड़े हैं, ने बताया कि फिल्म के लिए तत्काल (Priority) श्रेणी में आवेदन किया गया था. उनके अनुसार, तत्काल श्रेणी के प्रावधानों के तहत फिल्म का परीक्षण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाना चाहिए था, लेकिन फिल्म की स्क्रीनिंग लगभग डेढ़ महीने बाद की गई.
उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान यह बताया गया कि फिल्म में नक्सलवाद की पृष्ठभूमि होने के कारण इसे रिव्यू कमेटी के पास भेजा जाएगा. उनका कहना है कि “साहिया” नक्सलवाद पर आधारित फिल्म नहीं है, बल्कि जंगल की पृष्ठभूमि में बुनी गई एक पारिवारिक और मानवीय प्रेम कहानी है. फिल्म में किसी भी प्रकार की हिंसक विचारधारा या नक्सलवाद का समर्थन अथवा प्रचार नहीं किया गया है.
संजय शर्मा का कहना है कि स्क्रीनिंग के बाद भी दस दिनों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक न तो फिल्म को औपचारिक रूप से रिव्यू कमेटी को भेजे जाने की सूचना दी गई है और न ही कोई अंतिम निर्णय उपलब्ध कराया गया है.
उन्होंने कहा कि यदि किसी फिल्म को लेकर बोर्ड की कोई आपत्ति है तो उसका परीक्षण और निर्णय पूरी तरह नियमों के अनुसार होना चाहिए, लेकिन प्रक्रिया समयबद्ध भी होनी चाहिए. उनका कहना है कि अनावश्यक देरी से न केवल निर्माता-निर्देशकों को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि फिल्मों की निर्धारित रिलीज़ योजनाएँ भी प्रभावित होती हैं.
संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से अनुरोध किया है कि “साहिया” के संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि यदि फिल्म प्रमाणन के मानकों के अनुरूप है तो उसे बिना अनावश्यक विलंब के दर्शकों तक पहुँचाया जा सके.
फिल्म “साहिया” की शूटिंग झारखंड के नेतरहाट क्षेत्र में की गई है. फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी और रिंकू राजगुरु प्रमुख भूमिकाओं में हैं. फिल्म के संगीत में सोना मोहपात्रा, जावेद अली, रिचा शर्मा, कृष्णा बेउरा और स्वानंद किरकिरे ने अपनी आवाज़ दी है, जबकि गीत समीर अंजन और स्वानंद किरकिरे ने लिखे हैं.


